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52 करोड़ से 1054 पंचायतों में बनेंगे खेल मैदान
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गोंडा में अदम गोंडवी खेल मैदान।
- फोटो : GONDA
गोंडा। गांवों में संसाधनों के जीर्णोद्धार के लिए ऑपरेशन कायाकल्प चल रहा है तो अब खेल प्रतिभाओं की तरक्की के लिए खेल मैदान अभियान की पहल शुरू हुई है। जिला योजना समिति की सहमति पर मुख्य विकास अधिकारी आशीष कुमार ने मुहिम का आगाज किया है। उन्होंने हर गांव में एक-एक खेल मैदान चिन्हित करके उसको विकसित कराने का बीड़ा उठाया है। पंचायतों ने भी मुहिम को रफ्तार देना शुरू कर दिया है। एक खेल मैदान पर करीब 5 लाख रुपये खर्च होंगे। 1054 पंचायतों में खेल मैदान अभियान पर करीब 52 करोड़ 70 लाख रुपये खर्च होंगे। अभियान के लिए मनरेगा से बजट खर्च होगा।
विकास योजनाओं के लिए चलाई जा रही योजनाओं के बेहतर उपयोग के लिए प्रशासन ने गंभीर रुख अपना रखा है। मनरेगा से जिले में वित्तीय वर्ष 2019-20 में 556 करोड़ रुपये का बजट खर्च होने के लिए तय हैं। वित्तीय वर्ष में अभी चार महीने से अधिक का समय शेष है। ऐसे में बजट का सदुपयोग करने के साथ ही गांवों में संसाधनों और सुविधा के विकास पर जोर दिया जा रहा है। हर गांव में दो से पांच सरकारी स्कूल हैं और प्रत्येक गांव में एक हजार से अधिक पढ़ने-लिखने वाले युवा व बच्चे रहते हैं। इसमें अधिकतर में खेल के प्रति रुचि है। जिले में वर्ष 2016-17 में प्रगति मुहिम से खेल प्रतियोगिता का अवसर दिया गया तो एक लाख से अधिक छात्रों ने पंजीकरण कराया और प्रतिभाग भी किया। इसके बाद स्कूल स्तर पर तो आयोजन हुए लेकिन प्रगति जैसी मुहिम नहीं शुरू हो पाई। इसके पीछे गांवों में मैदान की व्यवस्था न होना प्रमुख कारण है।
मुख्य विकास अधिकारी ने समस्या को गंभीरता से लिया और बीते दिनों जिला योजना की बैठक में पंचायत स्तर पर खेल मैदान के विकास पर सहमति भी बनी। बुधवार को सीडीओ आशीष कुमार ने अमर उजाला को बताया कि हर गांव में खेल मैदान के विकास की मुहिम शुरू की जा रही है। उन्होंने सभी 16 खंड विकास अधिकारियों को निर्देश दिया है कि गांवों में खेल मैदान के लिए स्थल चिन्हित करें। जिन पंचायतों में खेल मैदान की उपलब्धता नहीं है, वहां के प्राइमरी या जूनियर हाईस्कूलों के मैदानों को ही विकसित करें। खेल मैदान को विकसित करने के लिए मनरेगा से प्रर्याप्त बजट खर्च किया जा सकता है। इससे 60 फीसदी बजट श्रमांश और 40 फीसदी बजट सामग्री पर खर्च हो सकेगा। जिससे मैदानों को मजदूरों से समतल कराने और अन्य कार्य तो होंगे, सामग्री अंश से स्थायी विकास की व्यवस्था भी हो सकेगी। खेल मैदान के विकास के लिए हर पंचायत को कार्य योजना बनाने को कहा गया है।
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पायका से तैयार किए गए खेल मैदानों को मिलेगी संजीवनी
केंद्र सरकार की ओर से पंचायती क्रीड़ा अभियान से जिले के 200 पंचायतों में खेल मैदान वर्ष 2008 से 2010 में तैयार किए गए थे। बाद में योजना बंद हो गई तो मैदानों का प्रयोग नहीं हो पाया। मैदानों को तैयार करने के लिए उस समय पाइका से एक-एक लाख रुपये खर्च भी किए गए थे। अब विकास विभाग से अभियान शुरू होने से इन मैदानों के भी अच्छे दिन आएंगे। करीब सात सालों से इन मैदानों की उपेक्षा ही रही। जिससे मैदानों की स्थिति खेलने लायक नहीं रही और उस समय बजट कम होने से ठीक से बन भी नहीं पाए थे।
मैदानों से जोड़े जाएंगे खेल, स्कूल भी कराएंगे प्रतियोगिता
गांवों में खेल मैदानों में कई खेल जोड़े जाएंगे। मैदान के समतलीकरण के साथ ही घास लगवाने का कार्य होगा। इसके अलावा मैदान की सीमाओं पर पौधरोपण भी होगा। मैदान में बालीवाल, कुश्ती, कबड्डी के खेलों के लिए ट्रैक भी बनाए जाएंगे। इसके अलावा अन्य खेलों का आयोजन भी होगा। स्कूलों की ओर प्रतिभाओं को निखारने का कार्य होगा।
मनेरगा से हर गांव में खेल मैदान का विकास कराया जा रहा है। इसके लिए हर पंचायत से स्थल चिन्हित करने को कहा गया है। खेल प्रतियोगिताओं को बढ़ावा देने के लिए यह अभियान शुरू किया जा रहा है। -आशीष कुमार, सीडीओ
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विकास योजनाओं के लिए चलाई जा रही योजनाओं के बेहतर उपयोग के लिए प्रशासन ने गंभीर रुख अपना रखा है। मनरेगा से जिले में वित्तीय वर्ष 2019-20 में 556 करोड़ रुपये का बजट खर्च होने के लिए तय हैं। वित्तीय वर्ष में अभी चार महीने से अधिक का समय शेष है। ऐसे में बजट का सदुपयोग करने के साथ ही गांवों में संसाधनों और सुविधा के विकास पर जोर दिया जा रहा है। हर गांव में दो से पांच सरकारी स्कूल हैं और प्रत्येक गांव में एक हजार से अधिक पढ़ने-लिखने वाले युवा व बच्चे रहते हैं। इसमें अधिकतर में खेल के प्रति रुचि है। जिले में वर्ष 2016-17 में प्रगति मुहिम से खेल प्रतियोगिता का अवसर दिया गया तो एक लाख से अधिक छात्रों ने पंजीकरण कराया और प्रतिभाग भी किया। इसके बाद स्कूल स्तर पर तो आयोजन हुए लेकिन प्रगति जैसी मुहिम नहीं शुरू हो पाई। इसके पीछे गांवों में मैदान की व्यवस्था न होना प्रमुख कारण है।
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मुख्य विकास अधिकारी ने समस्या को गंभीरता से लिया और बीते दिनों जिला योजना की बैठक में पंचायत स्तर पर खेल मैदान के विकास पर सहमति भी बनी। बुधवार को सीडीओ आशीष कुमार ने अमर उजाला को बताया कि हर गांव में खेल मैदान के विकास की मुहिम शुरू की जा रही है। उन्होंने सभी 16 खंड विकास अधिकारियों को निर्देश दिया है कि गांवों में खेल मैदान के लिए स्थल चिन्हित करें। जिन पंचायतों में खेल मैदान की उपलब्धता नहीं है, वहां के प्राइमरी या जूनियर हाईस्कूलों के मैदानों को ही विकसित करें। खेल मैदान को विकसित करने के लिए मनरेगा से प्रर्याप्त बजट खर्च किया जा सकता है। इससे 60 फीसदी बजट श्रमांश और 40 फीसदी बजट सामग्री पर खर्च हो सकेगा। जिससे मैदानों को मजदूरों से समतल कराने और अन्य कार्य तो होंगे, सामग्री अंश से स्थायी विकास की व्यवस्था भी हो सकेगी। खेल मैदान के विकास के लिए हर पंचायत को कार्य योजना बनाने को कहा गया है।
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पायका से तैयार किए गए खेल मैदानों को मिलेगी संजीवनी
केंद्र सरकार की ओर से पंचायती क्रीड़ा अभियान से जिले के 200 पंचायतों में खेल मैदान वर्ष 2008 से 2010 में तैयार किए गए थे। बाद में योजना बंद हो गई तो मैदानों का प्रयोग नहीं हो पाया। मैदानों को तैयार करने के लिए उस समय पाइका से एक-एक लाख रुपये खर्च भी किए गए थे। अब विकास विभाग से अभियान शुरू होने से इन मैदानों के भी अच्छे दिन आएंगे। करीब सात सालों से इन मैदानों की उपेक्षा ही रही। जिससे मैदानों की स्थिति खेलने लायक नहीं रही और उस समय बजट कम होने से ठीक से बन भी नहीं पाए थे।
मैदानों से जोड़े जाएंगे खेल, स्कूल भी कराएंगे प्रतियोगिता
गांवों में खेल मैदानों में कई खेल जोड़े जाएंगे। मैदान के समतलीकरण के साथ ही घास लगवाने का कार्य होगा। इसके अलावा मैदान की सीमाओं पर पौधरोपण भी होगा। मैदान में बालीवाल, कुश्ती, कबड्डी के खेलों के लिए ट्रैक भी बनाए जाएंगे। इसके अलावा अन्य खेलों का आयोजन भी होगा। स्कूलों की ओर प्रतिभाओं को निखारने का कार्य होगा।
मनेरगा से हर गांव में खेल मैदान का विकास कराया जा रहा है। इसके लिए हर पंचायत से स्थल चिन्हित करने को कहा गया है। खेल प्रतियोगिताओं को बढ़ावा देने के लिए यह अभियान शुरू किया जा रहा है। -आशीष कुमार, सीडीओ