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एक लाख किशोर स्कूल में ही पाएंगे स्वास्थ्य की शिक्षा
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ोटो-19 गोंडा में प्रशिक्षण कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षक। (संवाद)
- फोटो : GONDA
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गोंडा। जिले के 1033 स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को स्वास्थ्य शिक्षा देने के लिए शिक्षकों को हेल्थ एंड वेलनेंस एंबेसडर बनाने की तैयारी की जा रही है। जिले के करीब एक लाख छात्रों को स्वास्थ्य की शिक्षा देने के लिए 2066 शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण पाने वाले शिक्षक अपने स्कूल में प्रत्येक कक्षा के दो छात्र को हेल्थ एंड वेलनेंस मैसेंजर के रूप में चयनित करेंगे। प्रत्येक सुबह अन्य छात्रों को स्वास्थ्य संबधी जानकारी देंगे।
किशोंरो को चोट, हिंसा, मादक पदार्थो के सेवन तथा जोखिम भरा यौन व्यवहार को रोकने के लिए शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण पाने के बाद स्कूलों में बच्चों के समग्र शैक्षणिक विकास के लिए विद्यालयों में प्रत्येक सप्ताह में एक दिन स्कूल हेल्थ एंड वेलनेस डे आयोजित होगा। शिक्षक हेल्थ एंड वेलनेस एंबेसडर बनेंगे। ऐसा इसलिए कि बच्चों के समग्र विकास में स्वास्थ्य एवं पोषण-स्तर की सकारात्मक भूमिका होती है। अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ एपी सिंह ने बताया कि केंद्रीय परिवार कल्याण मंत्रालय तथा मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से आयुष्मान भारत कार्यक्रम के अंतर्गत स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम जिले में आरंभ किया गया है। कार्यक्रम के तहत विद्यालयों के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्कूल जाने वाले बच्चों में स्वास्थ्य एवं स्वच्छता संबंधी जागरूकता तथा विद्यालय स्तर पर संचालित स्वास्थ्य गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
शिक्षक बनेंगे हेल्थ एंड वेलनेस एंबेसडर
आयुष्मान भारत के तहत बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के प्रभारी डॉ आरएस राठौर ने बताया कि स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत प्रत्येक विद्यालय से दो शिक्षकों (एक महिला व एक पुरुष) को हेल्थ एंड वेलनेस एंबेसडर के रूप में नामित करने का काम शिक्षा विभाग ने शुरू कर दिया है। इन शिक्षकों को स्वास्थ्य व्यवहार को बढ़ावा देने और रोगों के रोकथाम के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। हेल्थ एंड वेलनेस एंबेसडर प्रत्येक सप्ताह एक घंटे रोचक गतिविधियों के माध्यम से सत्र आयोजित करेंगे। प्रत्येक कक्षा से दो नामित छात्र इन स्वास्थ्य संवर्धक संदेशों को समाज तक पहुंचाने के लिए हेल्थ एंड वेलनेस मैसेंजर के रूप में कार्य करेंगे। विद्यालय में प्रत्येक बुधवार को हेल्थ एंड वेलनेस डे का आयोजन किया जाएगा। प्रत्येक स्कूल में प्रशिक्षित शिक्षकों की ओर से स्वस्थ व्यवहार को बढ़ावा देने व विभिन्न बीमारियों के रोकथाम के लिए आयु विशेष शिक्षा प्रदान की जाएगी। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की समर्पित मोबाइल टीम के माध्यम से चिन्हित स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान व समाधान भी किया जाएगा। सैनिटरी नैपकिन प्रावधान करने तथा तथा आयु विशेष के लिए टीकाकरण का प्रबंध भी करने का टास्क पीएचसी प्रभारियों को सौंपा गया है। छात्रों को बुनियादी प्राथमिक चिकित्सा का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
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किशोंरो को चोट, हिंसा, मादक पदार्थो के सेवन तथा जोखिम भरा यौन व्यवहार को रोकने के लिए शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण पाने के बाद स्कूलों में बच्चों के समग्र शैक्षणिक विकास के लिए विद्यालयों में प्रत्येक सप्ताह में एक दिन स्कूल हेल्थ एंड वेलनेस डे आयोजित होगा। शिक्षक हेल्थ एंड वेलनेस एंबेसडर बनेंगे। ऐसा इसलिए कि बच्चों के समग्र विकास में स्वास्थ्य एवं पोषण-स्तर की सकारात्मक भूमिका होती है। अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ एपी सिंह ने बताया कि केंद्रीय परिवार कल्याण मंत्रालय तथा मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से आयुष्मान भारत कार्यक्रम के अंतर्गत स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम जिले में आरंभ किया गया है। कार्यक्रम के तहत विद्यालयों के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्कूल जाने वाले बच्चों में स्वास्थ्य एवं स्वच्छता संबंधी जागरूकता तथा विद्यालय स्तर पर संचालित स्वास्थ्य गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
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शिक्षक बनेंगे हेल्थ एंड वेलनेस एंबेसडर
आयुष्मान भारत के तहत बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के प्रभारी डॉ आरएस राठौर ने बताया कि स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत प्रत्येक विद्यालय से दो शिक्षकों (एक महिला व एक पुरुष) को हेल्थ एंड वेलनेस एंबेसडर के रूप में नामित करने का काम शिक्षा विभाग ने शुरू कर दिया है। इन शिक्षकों को स्वास्थ्य व्यवहार को बढ़ावा देने और रोगों के रोकथाम के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। हेल्थ एंड वेलनेस एंबेसडर प्रत्येक सप्ताह एक घंटे रोचक गतिविधियों के माध्यम से सत्र आयोजित करेंगे। प्रत्येक कक्षा से दो नामित छात्र इन स्वास्थ्य संवर्धक संदेशों को समाज तक पहुंचाने के लिए हेल्थ एंड वेलनेस मैसेंजर के रूप में कार्य करेंगे। विद्यालय में प्रत्येक बुधवार को हेल्थ एंड वेलनेस डे का आयोजन किया जाएगा। प्रत्येक स्कूल में प्रशिक्षित शिक्षकों की ओर से स्वस्थ व्यवहार को बढ़ावा देने व विभिन्न बीमारियों के रोकथाम के लिए आयु विशेष शिक्षा प्रदान की जाएगी। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की समर्पित मोबाइल टीम के माध्यम से चिन्हित स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान व समाधान भी किया जाएगा। सैनिटरी नैपकिन प्रावधान करने तथा तथा आयु विशेष के लिए टीकाकरण का प्रबंध भी करने का टास्क पीएचसी प्रभारियों को सौंपा गया है। छात्रों को बुनियादी प्राथमिक चिकित्सा का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
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