फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gonda News ›   Problem..

प्रवासी श्रमिकों का नाम व पता गलत, किसे दें रकम

Tue, 09 Jun 2020 09:24 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 09 Jun 2020 09:24 PM IST
विज्ञापन
Problem..
करनैलगंज (गोंडा)। कोरोना महामारी के दौरान विभिन्न प्रदेशों से आए प्रवासी श्रमिक प्रशासन के गले की फांस बन गए हैं। जिले में आए करीब एक लाख से अधिक प्रवासी श्रमिकों में अधिकांश लोगों में अपना नाम, पता एवं मोबाइल नंबर गलत दर्ज करवा दिया। जिससे अब उनकी तलाश कर उनके खातों में पैसा भेजने की कवायद फेल होती नजर आ रही है।
विज्ञापन

मार्च के महीने से और जून के मौजूदा समय तक प्रवासी श्रमिकों एवं बाहरी प्रदेशों में फंसे लोगों के आने का सिलसिला चल रहा है। मार्च से मई महीने तक लगातार प्रवासियों के भीड़ की भगदड़ में प्रशासन द्वारा बाहर से आने वाले लोगों की थर्मल स्क्रीनिंग और उनका नाम पता दर्ज करने की प्रक्रिया अपनाई गई थी। जिसमें प्रशासन के सारे किए धरे पर पानी फिरता नजर आ रहा है।
विज्ञापन

मात्र गोंडा जिले में आए करीब एक लाख से अधिक प्रवासी श्रमिकों के नाम और पते की तलाश करने पर सही शिनाख्त नहीं हो पा रही है। श्रमिकों द्वारा जिन गांवों का पता दिखाया जा रहा है वहां उस नाम के आदमी नहीं है। अगर उस नाम के व्यक्ति हैं तो उनके पिता का नाम मेल नहीं खा रहा है। उसके बावजूद जो मोबाइल नंबर दर्ज कराए गए हैं वह मोबाइल नंबर अधिकांश लोगों के फर्जी साबित हो रहे हैं। राजस्व विभाग के कर्मचारी श्रमिकों की तलाश में हलकान हैं। क्योंकि प्रवासी श्रमिकों को चिह्नित कर उनके खातों में एक हजार रुपये प्रति श्रमिक भुगतान करने का सरकारी फरमान फेल होता नजर आ रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

बताया जा रहा है कि बाहर से आए श्रमिकों ने अपने नाम, पिता के नाम एवं पता के साथ मोबाइल नंबर की गलत एंट्री करव कर मात्र प्रमाण पत्र प्राप्त किया और चलते बने। जिन लोगों को क्वारंटीन किया गया। उनसे भी कोई दस्तावेज जमा नहीं कराए गए। जिससे अब लोगों की तलाश कर पाना राजस्व विभाग एवं स्वास्थ्य विभाग के लिए मुश्किल भरा काम हो गया है। बताया जा रहा है कि इन लोगों को बिना दस्तावेज देखे या बिना उनकी तस्दीक किए ही राशन की किटों का भी वितरण किया जा चुका है और अब उसके सत्यापन में प्रशासन के सामने दिक्कतें आ रही हैं।
बाहर से आए श्रमिक प्रशासन एवं राजस्व विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों की गले की फांस बन चुके हैं।
उनकी तलाश में गांव गांव राजस्व निरीक्षक, लेखपाल, संग्रह अमीन के साथ साथ अन्य कर्मचारी लगाए गए हैं। जहां उनकी तस्दीक नहीं हो पा रही है। श्रमिकों के आने का सिलसिला जब थोड़ा कम हुआ तो प्रशासन ने उनके ब्यौरे को एकत्र करना शुरू किया। जिसमें आधार नंबर आधार में दर्ज नाम और पता उसके साथ ही उनके खाते का अकाउंट नंबर लिखा जाने लगा। उसके पूर्व आए श्रमिकों का कोई रिकॉर्ड विभाग के पास उपलब्ध नहीं है। जो रिकॉर्ड उपलब्ध भी है तो उसका मिलान नहीं हो पा रहा है। जिससे प्रत्येक श्रमिक के खाते में पैसा जमा करवाना प्रशासन के लिए एक बड़ी समस्या बन गया है।

बताया जाता है कि लोग डर के कारण अपना नाम पता सही नही दर्ज कराए है कि उन्हें गांव से उठाकर कहीं अलग क्वारंटीन न कर दिया जाये। उप जिलाधिकारी ज्ञान चंद्र गुप्ता बताते हैं कि जो प्रवासी श्रमिक बाहरी प्रदेशों से क्षेत्र में आए हुए हैं उनको होम क्वारंटीन का प्रमाण पत्र दिया गया है। वह अपना-अपना सत्यापन अपने क्षेत्र के लेखपाल व राजस्व निरीक्षक से मिलकर करा सकते हैं। अपने खाता अकाउंट का नंबर उपलब्ध करा सकते हैं। जिससे उनके खाते में पैसा भेजा जा सके। उन्होंने स्वीकार किया कि अधिकांश लोगों ने अपना नाम पता गलत तरीके से दर्ज कराया है जिससे अब उनकी तलाश करने में समस्या आ रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed