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बिजली की कटौती से लोग बेहाल, अस्पताल में ज्यादा बुरा हाल
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फोटो-5 गोंडा के मेडिकल वार्ड में घर से लाकर पंखा चलाते तीमारदार।- संवाद
- फोटो : GONDA
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गोंडा। सूरज की तपिश अपने चरम पर है। तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है। घर से लेकर अस्पतालों तक में आमजन के साथ ही मरीज व तीमारदार गर्मी से बेहाल हैं। इसी बीच बिजली की अघोषित कटौती व लो-वोल्टेज की समस्या से लोग परेशान हैं। पंखे धीरे-धीरे घूमते हैं तो वहीं, एसी व कूलर बेदम हो गये हैं। जिला अस्पताल के विभिन्न वार्डों में धीमी गति से चल रहे पंखे गर्म हवा फेंक रहें है, जिससे मरीज भीषण गर्मी में तप रहे हैं।
जिले में इन दिनों पड़ रही भीषण गर्मी के चलते बिजली की मांग डेढ़ गुना से अधिक तक बढ़ गई है। सामान्य दिनों में जहां करीब 140 मेगावाट बिजली की खपत होती थी, वहीं अब करीब 230 मेेगावाट बिजली की मांग है। जिसके चलते जिले में अघोषित बिजली कटौती व लो-वोल्टेज की समस्या बनी रहती है। हर रोज बिजली की आंखमिचौली चलती रहती है। ग्रामीण इलाकों में रात में भी लंबे समय तक बिजली गुल रहती है। किसी भी समय मरम्मत के नाम पर बिजली कटौती कर दी जाती है। घंटों बिजली गुल रहने से उपभोक्ता बेहाल हैं।
भीषण गर्मी में जिला अस्पताल के वार्डों में भर्ती मरीज व उनके तीमारदार बेहाल हैं। इस समय विभिन्न वार्डों में करीब दो सौ मरीज भर्ती हैं। जिनको गर्मी से निजात देने के लिए सिर्फ पंखे लगे हैं। दूसरी मंजिल पर बने वार्डों में लगे पंखे गरम हवा फेंक रहे हैं, जिससे मरीज व तीमारदार परेशान हैं। बुधवार को जिला अस्पताल के मेडिकल वार्ड में तीमारदार हाथ के पंखों से मरीजों को गर्मी से राहत देने का प्रयास करते दिख रहे थे। उन्होंने बताया कि वार्ड में लगे पंखों की स्पीड इतनी धीमी है कि हवा उन तक नहीं पहुंच रही है। ऐसे में हाथ के पंखे से अपने मरीजों को हवा दे रहे हैं।
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वहीं, कई तीमारदार अपने घरों से पंखा लाकर मरीज को गर्मी से राहत दिलाने का प्रयास कर रहे थे। तीमारदारों ने बताया कि यहां बिजली कटने के बाद जेनरेटर नहीं चलाया जाता है। तब हाथ का पंखा ही जानलेवा गर्मी से कुछ राहत प्रदान करता है। जिला अस्पताल के मेडिकल वार्ड में भर्ती महिला मरीज के बेटे रामचरन ने बताया कि वह अपनी मां का इलाज कराने आया है। गर्मी में मां तो परेशान ही हैं, ऐसा लग रहा है कि गर्मी के कारण वह खुद भी बीमार हो जाएगा।
गांवों में छह घंटे ही बिजली
मसकनवा क्षेत्र में 14 से 16 घंटे बिजली कटौती की जा रही है। उपकेंद्र के ज्यादातर फीडर जर्जर हैं। छपिया, बगदर, मसकनवा खालेगांव, गौराचौकी आदि फीडर के सबसे जर्जर तार व पोल हैं, जो कि अक्सर लोड पड़ने से टूट जा रहे हैं। वहीं, क्षमता बढ़ने से पुराने ट्रांसफार्मर जल जाते हैं। जिसके चलते छह घंटे ही सप्लाई मिल पा रही है। अवर अभियंता अमित कुमार पटेल ने बताया की जो बिजली मिल रही है। उसे सभी फीडरों पर आपूर्ति करने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। कटरा बाजार नगर को चरेरा उपकेंद्र से विद्युत आपूर्ति की जा रही है। जिससे अधिकांश फीडरों के तार जर्जर हैं, जो हर रोज टूटते रहते जिससे बिजली बाधित होती है। नगर के राजेश निगम, पिंटू खान, मेराज, अफजाल, नितिन, शिवम आदि ने बताया कि इस समय छह से आठ घंटे तक ही बिजली मिल पा रही है। उपकेंद्र का सीयूजी नंबर पिछले दो महीने से बंद है। उपखंड अधिकारी एसके बर्मा ने बताया कि लटक रहे केवल को जल्द ही सही करा दिया जाएगा। उपकेंद्र कटरा में मोबाइल खराब होने के कारण दिक्कतें आ रही हैं, जिसका निस्तारण कराया जाएगा।
बिजली की खपत बढ़ने से लोड बढ़ गया है, जिससे फाल्ट व लो-वोल्टेज की समस्या आ रही है। जल्द की समस्या का निस्तारण करने का प्रयास किया जा रहा है। लोकल फाल्ट कम समय में सही करके बिजली सप्लाई शुरू कर दी जा रही है। रमेश चंद्र, अधीक्षण अभियंता
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जिले में इन दिनों पड़ रही भीषण गर्मी के चलते बिजली की मांग डेढ़ गुना से अधिक तक बढ़ गई है। सामान्य दिनों में जहां करीब 140 मेगावाट बिजली की खपत होती थी, वहीं अब करीब 230 मेेगावाट बिजली की मांग है। जिसके चलते जिले में अघोषित बिजली कटौती व लो-वोल्टेज की समस्या बनी रहती है। हर रोज बिजली की आंखमिचौली चलती रहती है। ग्रामीण इलाकों में रात में भी लंबे समय तक बिजली गुल रहती है। किसी भी समय मरम्मत के नाम पर बिजली कटौती कर दी जाती है। घंटों बिजली गुल रहने से उपभोक्ता बेहाल हैं।
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भीषण गर्मी में जिला अस्पताल के वार्डों में भर्ती मरीज व उनके तीमारदार बेहाल हैं। इस समय विभिन्न वार्डों में करीब दो सौ मरीज भर्ती हैं। जिनको गर्मी से निजात देने के लिए सिर्फ पंखे लगे हैं। दूसरी मंजिल पर बने वार्डों में लगे पंखे गरम हवा फेंक रहे हैं, जिससे मरीज व तीमारदार परेशान हैं। बुधवार को जिला अस्पताल के मेडिकल वार्ड में तीमारदार हाथ के पंखों से मरीजों को गर्मी से राहत देने का प्रयास करते दिख रहे थे। उन्होंने बताया कि वार्ड में लगे पंखों की स्पीड इतनी धीमी है कि हवा उन तक नहीं पहुंच रही है। ऐसे में हाथ के पंखे से अपने मरीजों को हवा दे रहे हैं।
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वहीं, कई तीमारदार अपने घरों से पंखा लाकर मरीज को गर्मी से राहत दिलाने का प्रयास कर रहे थे। तीमारदारों ने बताया कि यहां बिजली कटने के बाद जेनरेटर नहीं चलाया जाता है। तब हाथ का पंखा ही जानलेवा गर्मी से कुछ राहत प्रदान करता है। जिला अस्पताल के मेडिकल वार्ड में भर्ती महिला मरीज के बेटे रामचरन ने बताया कि वह अपनी मां का इलाज कराने आया है। गर्मी में मां तो परेशान ही हैं, ऐसा लग रहा है कि गर्मी के कारण वह खुद भी बीमार हो जाएगा।
गांवों में छह घंटे ही बिजली
मसकनवा क्षेत्र में 14 से 16 घंटे बिजली कटौती की जा रही है। उपकेंद्र के ज्यादातर फीडर जर्जर हैं। छपिया, बगदर, मसकनवा खालेगांव, गौराचौकी आदि फीडर के सबसे जर्जर तार व पोल हैं, जो कि अक्सर लोड पड़ने से टूट जा रहे हैं। वहीं, क्षमता बढ़ने से पुराने ट्रांसफार्मर जल जाते हैं। जिसके चलते छह घंटे ही सप्लाई मिल पा रही है। अवर अभियंता अमित कुमार पटेल ने बताया की जो बिजली मिल रही है। उसे सभी फीडरों पर आपूर्ति करने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। कटरा बाजार नगर को चरेरा उपकेंद्र से विद्युत आपूर्ति की जा रही है। जिससे अधिकांश फीडरों के तार जर्जर हैं, जो हर रोज टूटते रहते जिससे बिजली बाधित होती है। नगर के राजेश निगम, पिंटू खान, मेराज, अफजाल, नितिन, शिवम आदि ने बताया कि इस समय छह से आठ घंटे तक ही बिजली मिल पा रही है। उपकेंद्र का सीयूजी नंबर पिछले दो महीने से बंद है। उपखंड अधिकारी एसके बर्मा ने बताया कि लटक रहे केवल को जल्द ही सही करा दिया जाएगा। उपकेंद्र कटरा में मोबाइल खराब होने के कारण दिक्कतें आ रही हैं, जिसका निस्तारण कराया जाएगा।
बिजली की खपत बढ़ने से लोड बढ़ गया है, जिससे फाल्ट व लो-वोल्टेज की समस्या आ रही है। जल्द की समस्या का निस्तारण करने का प्रयास किया जा रहा है। लोकल फाल्ट कम समय में सही करके बिजली सप्लाई शुरू कर दी जा रही है। रमेश चंद्र, अधीक्षण अभियंता