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पंचायतों के पदों पर आरक्षण तय होने से चढ़ा सियासी पारा

Wed, 10 Feb 2021 10:08 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 10 Feb 2021 10:08 PM IST
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Political mercury rises due to fixation of reservation policy in panchayat elections
गोंडा। शासन की ओर से पंचायतों चुनाव के लिए आरक्षण की नीति तय होने के बाद सियासी पारा चढ़ गया है। माना जा रहा है कि 17 मार्च तक आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव की तारीखों का ऐलान हो जाएगा।
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जिले में 160 नई पंचायतों के गठन से नए सिरे आरक्षण लागू होने के फैसले से लोगों को राहत मिली है। वैसे इस बार आरक्षण में करीब-करीब सभी सीटों में बदलाव तय माना जा रहा है।
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1204 पंचायतों के प्रधानों की सीटों का आरक्षण काफी अहम माना जा रहा है। जिसमें 600 सीटें आरक्षित वर्ग के कोटे में जाएंगी और करीब 200 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इसके बाद 400 के करीब पंचायतों पर सभी को चुनाव लड़ने का मौका मिलेगा।
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जिले की 1612 क्षेत्र पंचायत सदस्यों और 65 जिला पंचायत सीटों के आरक्षण पर भी लोगों की निगाहें टिकी हुईं हैं। माना जा रहा है कि इन सीटों पर भी आरक्षण नए सिरे से ही होगा। कारण इनके चक्रानुक्रम की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
पंचायतों के साथ ही गांव पंचायतों में प्रधान के अलावा सदस्यों के पदों पर भले ही ज्यादा जोर नहीं रहता लेकिन आरक्षण वहां भी होना है। 15410 सदस्यों के पदों पर आरक्षण की प्रक्रिया ब्लाक स्तर से होगी। इसके अलावा जिला पंचायत सदस्यों के पदों पर आरक्षण राज्य स्तर से होना है। प्रधान व क्षेत्र पंचायत सदस्यों के लिए आरक्षण जिला स्तरीय कमेटी करेगी।
अब वे पंचायतें जो पहले एससी के लिए आरक्षित होती रहीं और ओबीसी के आरक्षण से वंचित रह गईं। वहां ओबीसी का आरक्षण होगा और इसी तरह जो पंचायतें अब तक ओबीसी के लिए आरक्षित होती रही हैं वे अब एससी के लिए आरक्षित होंगी।
इसके बाद जो पंचायतें बचेंगी, वह आबादी के घटते अनुपात में चक्रानुक्रम के अनुसार सामान्य वर्ग के लिए होंगी। पांच चुनावों में महिलाओं के लिए तय 33 प्रतिशत आरक्षण का कोटा तो पूरा होता रहा, मगर एससी के लिए 21 प्रतिशत और ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण कोटे के हिसाब से कई ग्राम, क्षेत्र व जिला पंचायतें आरक्षित नहीं हो पाईं।
पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण तय करते समय सबसे पहले यह देखा जाए कि वर्ष 1995 से अब तक के पांच चुनावों में कौन सी पंचायतें अनुसूचित जाति (एससी) व अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षित नहीं हो पाई हैं। इन पंचायतों में इस बार प्राथमिकता के आधार पर आरक्षण लागू किया जाए।

वैसे अब मार्च में पंचायत चुनावों की अधिसूचना जारी होने का रास्ता साफ हो गया है। शासनादेश के जारी होते ही यह स्थिति साफ हो जाएगी कि कौन सा गांव अनारक्षित है और कौन सा गांव किस जाति के लिए आरक्षित हुआ है। आरक्षण सूची जारी होने के बाद माना जा रहा है कि चुनाव आयोग तारीखों का ऐलान कर देगा।
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