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रुपये निकालने को जूझे लोग
अमर उजाला/गोंडा
Updated Mon, 28 Nov 2016 11:53 PM IST
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रुपये निकालने के लिए जुटी भीड़
- फोटो : अमर उजाला
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दो हजार रुपये निकालने के लिए लोगों को एटीएम बूथों पर दिन भर जूझना पड़ा। शनिवार व रविवार को बैंक में अवकाश होने के साथ-साथ एटीएम भी नहीं चले। इससे लोगों के कैश की जरूरतें पूरी नहीं हो सकीं। सोमवार को जब बैंक खुले तो बैंक के साथ व एटीएम बूथों पर भी पैसा निकालने के लिए लोगों की काफी भीड़ उमड़ी।
दो दिन अवकाश के बाद सोमवार को एत्तेफाक से शहर के कई एटीएम में कैश भरे गये। कैश भरे जाने के पहले ही लोगों की अलग-अलग एटीएम बूथों पर लंबी-लंबी लाइन लगी। शहर के स्टेट बैंक के सभी, आईसीआईसीआई बैंक के दो, एक्सिस बैंक के एटीएम पर सुबह से शाम तक पैसा निकालने के लिए लोगों की भीड़ लगी रही।
सिविल लाइन के आईसीआईसीआई बैंक के एटीएम पर 20 दिन बाद सोमवार को पहली बार कैश डाला गया। अलग-अलग बूथों पर लाइन में लगे लोग बैंक व सरकार की ओर से पर्याप्त इंतजाम न किये जाने को लेकर तरह तरह की जुमलेबाजी करते रहे।
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इस बाबत एलबीएम एके पांडेय ने बताया कि आरबीआई से पर्याप्त कैश न आने से बैंकों में कैश के कमी की समस्या आ रही है। सोमवार को कुछ एटीएम चले हैं। हर कोई बड़ा भुगतान भी कैश निकाल कर ही करना चाह रहा है। नेट बैंकिंग या चेक आदि से भी भुगतान करने में लोगों की दिलचस्पी कम है। हर कोई कैश की किल्लत के चलते बैंक व एटीएम से रुपये निकाल रहा है जबकि डिमांड के मुताबिक, आरबीआई से कैश कम मिल रहा है।
नोटबंदी के बाद से कैश की किल्लत से लोग क्या बैंक भी उबर नही पा रहे हैं। नोटबंदी के दूसरे सप्ताह में ही जिले के सर्व यूपी बैंक की 85 बैंक शाखाएं कैश से खाली हो गईं। इन बैंकों के खाताधारकों में कैश न मिलने से हाहाकार मचा है।
रोजाना बैंकों पर कैश आने के इंतजार में खाताधारकों की लाइन लग रही है। आखिरकार उन्हें मायूस होकर लौैटना पड़ रहा है। बैंक के आला अधिकारी अपने बैंक को संबद्ध करने वाले पीएनबी समेत सभी अन्य करेंसी चेस्ट वाले बैंकों से कैश की मांग कर चुके हैं लेकिन आज तक खाली हाथ हैं।
अब कैश खत्म होने की इस समस्या की लाइन में बड़े बैंक की भी शाखाएं आने लगी हैं। सोमवार को बताया जाता है कि सिविल लाइन की स्टेट बैंक में भी कैश नही रहा। इस बाबत खाताधारकों को लौटना पड़ा।
गायत्रीपुरम निवासी प्रवीन मिश्र सोमवार को स्टेट बैंक की सिविल लाइन शाखा से दो हजार रुपये निकालने गए थे। लेकिन मैनेजर बीके पाण्डेय ने उनके विड्राल फार्म पर यह लिखकर लौटा दिया कि बैंक में कैश उपलब्ध नही है। प्रवीन ने बताया कि उनके फादर ने अपना विड्राल फार्म भरकर मुझे बैंक से रुपये निकालने भेजा था।
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दो दिन अवकाश के बाद सोमवार को एत्तेफाक से शहर के कई एटीएम में कैश भरे गये। कैश भरे जाने के पहले ही लोगों की अलग-अलग एटीएम बूथों पर लंबी-लंबी लाइन लगी। शहर के स्टेट बैंक के सभी, आईसीआईसीआई बैंक के दो, एक्सिस बैंक के एटीएम पर सुबह से शाम तक पैसा निकालने के लिए लोगों की भीड़ लगी रही।
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सिविल लाइन के आईसीआईसीआई बैंक के एटीएम पर 20 दिन बाद सोमवार को पहली बार कैश डाला गया। अलग-अलग बूथों पर लाइन में लगे लोग बैंक व सरकार की ओर से पर्याप्त इंतजाम न किये जाने को लेकर तरह तरह की जुमलेबाजी करते रहे।
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इस बाबत एलबीएम एके पांडेय ने बताया कि आरबीआई से पर्याप्त कैश न आने से बैंकों में कैश के कमी की समस्या आ रही है। सोमवार को कुछ एटीएम चले हैं। हर कोई बड़ा भुगतान भी कैश निकाल कर ही करना चाह रहा है। नेट बैंकिंग या चेक आदि से भी भुगतान करने में लोगों की दिलचस्पी कम है। हर कोई कैश की किल्लत के चलते बैंक व एटीएम से रुपये निकाल रहा है जबकि डिमांड के मुताबिक, आरबीआई से कैश कम मिल रहा है।
नोटबंदी के बाद से कैश की किल्लत से लोग क्या बैंक भी उबर नही पा रहे हैं। नोटबंदी के दूसरे सप्ताह में ही जिले के सर्व यूपी बैंक की 85 बैंक शाखाएं कैश से खाली हो गईं। इन बैंकों के खाताधारकों में कैश न मिलने से हाहाकार मचा है।
रोजाना बैंकों पर कैश आने के इंतजार में खाताधारकों की लाइन लग रही है। आखिरकार उन्हें मायूस होकर लौैटना पड़ रहा है। बैंक के आला अधिकारी अपने बैंक को संबद्ध करने वाले पीएनबी समेत सभी अन्य करेंसी चेस्ट वाले बैंकों से कैश की मांग कर चुके हैं लेकिन आज तक खाली हाथ हैं।
अब कैश खत्म होने की इस समस्या की लाइन में बड़े बैंक की भी शाखाएं आने लगी हैं। सोमवार को बताया जाता है कि सिविल लाइन की स्टेट बैंक में भी कैश नही रहा। इस बाबत खाताधारकों को लौटना पड़ा।
गायत्रीपुरम निवासी प्रवीन मिश्र सोमवार को स्टेट बैंक की सिविल लाइन शाखा से दो हजार रुपये निकालने गए थे। लेकिन मैनेजर बीके पाण्डेय ने उनके विड्राल फार्म पर यह लिखकर लौटा दिया कि बैंक में कैश उपलब्ध नही है। प्रवीन ने बताया कि उनके फादर ने अपना विड्राल फार्म भरकर मुझे बैंक से रुपये निकालने भेजा था।