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दवाओं को लगी महंगाई की बीमारी, बढ़ा मरीजों का दर्द
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फोटो-5 गोंडा में मेडिकल स्टोर पर दवा खरीदते ग्राहक। -संवाद
- फोटो : GONDA
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गोंडा। डीजल-पेट्रोल की बढ़ती कीमतों से आसमान छू रही महंगाई की मार सेहत के इलाज पर पड़ी है। बुखार, दर्द निवारक व एंटीबायोटिक दवाओं की कीमतों में दस फीसदी तक बढ़ोत्तरी हुई है। इसके चलते ही महंगी दवाओं ने इलाज करा रहे मरीजों का दर्द कम करने की जगह और बढ़ा दिया है। नियमित तौर पर दवाओं का सेवन करने वाले मरीजों की परेशानी भी इस महंगाई में दो गुना हो गई है।
बुखार से लेकर दर्द निवारक और जीवन रक्षक की श्रेणी में आने वाली दवाओं के दाम में हुई बढ़ोत्तरी को लेकर मरीजों से लेकर तीमारदारों तक ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि जरूरी सामान और खाद्यान्न की महंगाई पहले ही कमर तोड़ रही है। अब दवाएं भी महंगी हो गई हैं। ऐसे में महंगाई से हालात और खराब व बेहाल हो जाएंगे। निजी अस्पताल के फार्मासिस्ट ने बताया कि पहली अप्रैल से ही दर्द निवारक, विभिन्न संक्रमण, हृदय, किडनी और अस्थमा के मरीजों की दवाओं की फुटकर कीमतों में दस फीसदी तक बढ़ोत्तरी हो गई है।
महंगी दवाएं खरीदने को किया जा विवश
ज्यादातर प्राइवेट अस्पतालों में अपने खुद के मेडिकल स्टोर संचालित हैं। डॉक्टर वही दवा मरीज को लिखते हैं, जो सिर्फ उनके मेडिकल स्टोर पर मिलती है। अगर उस सॉल्ट की दवा दूसरे मेडिकल से खरीद ली जाए तो डॉक्टर उसे मरीज को देने से साफ मना कर देते हैं। इससे मजबूरीवश अस्पताल के मेडिकल स्टोर से महंगी दवा लेकर ही मरीज को खिलाना मजबूरी बनता है।
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बोले तीमारदार, इलाज ने बढ़ाया बोझ
जिला अस्पताल के सामने मेडिकल स्टोर पर दवा लेने आए अजय ने बताया कि हमारे परिवार में दो लोगों की डॉक्टर की सुझाव से नियमित दवा चल रही है। हृदयरोग की दवा पहले आठ सौ रुपये हर सप्ताह में लगता था,लेकिन अब दवाओं का खर्च नौ सौ रुपये हो गया है। ऐसे में घर का बजट बिगड़ जा रहा है। अधिवक्ता राहुल द्विवेदी ने बताया कि उनकी घर में तीन लोगों की नियमित दवाएं चलती हैं अब दवाओं के महंगाई से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शिवम तिवारी ने कहा कि दवाओं के महंगाई से आम लोगों की कमर टूट गई है। घर में आए दिन दवाओं की जरूरत पड़ती रहती है। प्रिंट रेट पर सारी दवाइयां मिलती हैं जिससे आर्थिक बोझ तले दबना पड़ रहा है।
प्राइवेट की जगह प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र पर लें दवा
एसीएमओ डॉ. जयगोविंद का कहना है कि महंगी दवा खरीदने से बचने के लिए जेनेरिक दवाओं का प्रयोग करना बेहतर विकल्प है। यह दवाएं प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र पर काफी कम दामों में मिल सकती हैं। प्राइवेट अस्पताल में ब्रांड वाली कंपनियों की दवाएं दी जाती हैं, अगर वही सॉल्ट औषधि केंद्र की सस्ती दर की दवा में मिल रहा हो तो महंगी दवा क्यों खरीदी जाए।
ऐसे हुआ दाम में इजाफा
दवा मार्च की दर अप्रैल में दर
पेंटाप (गैस की दवा)- 80 120
सिफोडाक्सिम (एंटीबायोटिक) 130 149
आयरन 130 158
पेट दर्द की दवा 74 85
हृदयरोग संबंधी दवा 799 880
(दवाओं की खुदरा कीमत कीमत प्रति पत्ता प्रति रुपया की दर से)
अप्रैल महीने से कई दवाओं के दाम बढ़े हैं, मेडिकल स्टारों का निरीक्षण कर बिक रही दवाओं के बारे में जानकारी ली जा रही है। जिन मेडिकल स्टोरों पर पुराना स्टाक है वहां पुुराने रेट में दवाएं मिल रही हैं, बाकी स्थानों में नए रेट से दवाएं दी जा रही हैं। रजिया बानो, औषधि निरीक्षक
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बुखार से लेकर दर्द निवारक और जीवन रक्षक की श्रेणी में आने वाली दवाओं के दाम में हुई बढ़ोत्तरी को लेकर मरीजों से लेकर तीमारदारों तक ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि जरूरी सामान और खाद्यान्न की महंगाई पहले ही कमर तोड़ रही है। अब दवाएं भी महंगी हो गई हैं। ऐसे में महंगाई से हालात और खराब व बेहाल हो जाएंगे। निजी अस्पताल के फार्मासिस्ट ने बताया कि पहली अप्रैल से ही दर्द निवारक, विभिन्न संक्रमण, हृदय, किडनी और अस्थमा के मरीजों की दवाओं की फुटकर कीमतों में दस फीसदी तक बढ़ोत्तरी हो गई है।
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महंगी दवाएं खरीदने को किया जा विवश
ज्यादातर प्राइवेट अस्पतालों में अपने खुद के मेडिकल स्टोर संचालित हैं। डॉक्टर वही दवा मरीज को लिखते हैं, जो सिर्फ उनके मेडिकल स्टोर पर मिलती है। अगर उस सॉल्ट की दवा दूसरे मेडिकल से खरीद ली जाए तो डॉक्टर उसे मरीज को देने से साफ मना कर देते हैं। इससे मजबूरीवश अस्पताल के मेडिकल स्टोर से महंगी दवा लेकर ही मरीज को खिलाना मजबूरी बनता है।
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बोले तीमारदार, इलाज ने बढ़ाया बोझ
जिला अस्पताल के सामने मेडिकल स्टोर पर दवा लेने आए अजय ने बताया कि हमारे परिवार में दो लोगों की डॉक्टर की सुझाव से नियमित दवा चल रही है। हृदयरोग की दवा पहले आठ सौ रुपये हर सप्ताह में लगता था,लेकिन अब दवाओं का खर्च नौ सौ रुपये हो गया है। ऐसे में घर का बजट बिगड़ जा रहा है। अधिवक्ता राहुल द्विवेदी ने बताया कि उनकी घर में तीन लोगों की नियमित दवाएं चलती हैं अब दवाओं के महंगाई से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शिवम तिवारी ने कहा कि दवाओं के महंगाई से आम लोगों की कमर टूट गई है। घर में आए दिन दवाओं की जरूरत पड़ती रहती है। प्रिंट रेट पर सारी दवाइयां मिलती हैं जिससे आर्थिक बोझ तले दबना पड़ रहा है।
प्राइवेट की जगह प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र पर लें दवा
एसीएमओ डॉ. जयगोविंद का कहना है कि महंगी दवा खरीदने से बचने के लिए जेनेरिक दवाओं का प्रयोग करना बेहतर विकल्प है। यह दवाएं प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र पर काफी कम दामों में मिल सकती हैं। प्राइवेट अस्पताल में ब्रांड वाली कंपनियों की दवाएं दी जाती हैं, अगर वही सॉल्ट औषधि केंद्र की सस्ती दर की दवा में मिल रहा हो तो महंगी दवा क्यों खरीदी जाए।
ऐसे हुआ दाम में इजाफा
दवा मार्च की दर अप्रैल में दर
पेंटाप (गैस की दवा)- 80 120
सिफोडाक्सिम (एंटीबायोटिक) 130 149
आयरन 130 158
पेट दर्द की दवा 74 85
हृदयरोग संबंधी दवा 799 880
(दवाओं की खुदरा कीमत कीमत प्रति पत्ता प्रति रुपया की दर से)
अप्रैल महीने से कई दवाओं के दाम बढ़े हैं, मेडिकल स्टारों का निरीक्षण कर बिक रही दवाओं के बारे में जानकारी ली जा रही है। जिन मेडिकल स्टोरों पर पुराना स्टाक है वहां पुुराने रेट में दवाएं मिल रही हैं, बाकी स्थानों में नए रेट से दवाएं दी जा रही हैं। रजिया बानो, औषधि निरीक्षक