टैक्स रिटर्न दाखिल न करने पर 919 व्यापारी फंसे
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ऐसे कारोबारी जिनका सालाना टर्न ओवर पांच लाख रुपये तक है, उन्हें शासन ने टैक्स के दायरे में रखा है। ऐसे कारोबारियों के लिए वाणिज्य कर विभाग से पंजीयन लेना अनिवार्य है। पंजीकृत व्यापारियों को शासन की ओर से कई तरह की सुविधाएं भी दी जाती हैं। पंजीयन कराने की प्रक्रिया भी काफी सरल है।
ऑनलाइन पंजीयन कराए जाने के साथ ही व्यापारियों के दरवाजे पर खुद विभाग जाकर पंजीयन कर रहा है। पंजीयन कराने वाले नये व्यापारियों को मासिक, त्रैमासिक व छमाही रिटर्न दाखिल करना होता है। वाणिज्य कर विभाग की जांच में खुलासा हुआ कि मंडल के 20,133 व्यापारियों में से 3,455 व्यापारियों ने रिटर्न ही दाखिल नहीं किया। इसमें से 919 ऐसे व्यापारी है, जिन्होंने कोई रिटर्न दाखिल नहीं किया।
जिले में टैक्स रिटर्न दाखिल न करने वाले व्यापारियों की तादाद 26.6 फीसदी है। जबकि यह प्रदेश में सामान्य रूप से रिटर्न न दाखिल करने वाले कारोबारियों का 16.80 फीसदी है। वाणिज्य कर विभाग के जॉइंट कमिश्नर कार्यपालक दिनेश कुमार ने बताया कि गोंडा जिले में रिटर्न दाखिल करने वाले करीब 53 फीसदी हैं।
जॉइंट कमिश्नर कार्यपालक वाणिज्य कर गोंडा संभाग दिनेश कुमारने कहा कि सभी व्यापारियों को निर्देशित किया जा चुका है कि वे अपने कारोबार के बाबत समय से मासिक, त्रैमासिक व छमाही टैक्स रिटर्न दाखिल करें। जो डिफाल्टर व्यापारी मिले हैं, उन पर जुर्माना, पंजीयन निरस्तीकरण के अलावा अस्थायी कर निर्धारण की कार्रवाई करके कर की मांग सृजित की जाएगी। संभाग के गोंडा जिले में अकेले 53 फीसदी रिटर्न न दाखिल करने वाले व्यापारी है।
इनसेट
वाणिज्य कर गोंडा संभाग में व्यापारियों की स्थिति
जिला पंजीकृ त व्यापारी एक्टिव व्यापारी डिफाल्टर
गोंडा 14054 9270 4784
बलरामपुर 4742 2687 2055
बहराइज 11286 7130 4156
श्रावस्ती 1600 1046 554
कुल - 31682 20133 11549
नोट - डिफाल्टर व्यापारियों में 919 ऐसे हैं कोई रिटर्न दाखिल नही किया। जबकि अन्य पंजीकृत व्यापारी ऐसे लोग हैं, जिन्होंने छमाही या सालाना दाखिल किया है।
इनसेट
डिफाल्टर कारोबारियों पर ये हो सकती है कार्रवाई
* रिटर्न न दाखिल करने वाले व्यापारी से दो हजार रुपये का जुर्माना ।
* पंजीकृत व्यापारियों का पंजीयन लाइसेंस निरस्त करना।
* टैक्स न देने वाले व्यापारी पर अस्थायी कर निर्धारण कर टैक्स की मांग करना ।
* निर्धारित कर की राजस्व के रूप में वसूली।