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Gonda News: कोटेदार की कारगुजारी पता करने केरल जाएगी गाेंडा पुलिस
Sun, 26 Feb 2023 12:28 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Sun, 26 Feb 2023 12:28 AM IST
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मोतीगंज (गोंडा)। 16 साल पहले खुद के फर्जी अपहरण की साजिश रचकर रहस्यमय तरीके से लापता हुए कोटेदार के मामले में पुलिस तह तक जाने का रास्ता बना रही है। जिले की पुलिस केरल जाकर कोटेदार के बारे में पूरी जानकारी हासिल करेगी।
उधर, अपहरण के आरोप में जेल जा चुके लोग अब कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में हैं। तत्कालीन थानाध्यक्ष मोतीगंज, नगर व देहात कोतवाली पुलिस की भूमिका की भी जांची जाएगी। मुकदमे में कौन-कौन गवाह थे, कितने पैरोकार थे, पुलिस ने किसके बयान लिए थे, ये सभी बिंदु जांच के विषय हैं।
सीहांगाव का पूर्व कोटेदार निजामुद्दीन 2 अक्तूबर 2007 को रहस्यमय ढंग से लापता हो गया था। जिसमें कोटेदार निजामुद्दीन के पिता मो. उमर ने गांव के बृजराज मिश्र, अब्दुल हफीज, रमजान, रामसूरत, सईद, समेत छह लोगों के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने अब्दुल हफीज को जेल भेज दिया था। लेकिन 16 साल बाद कोटेदार केरल में मिल गया।
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कोटेदार ने पुलिस को बताया कि केरल के एक मदरसे में रह रहा था। गोंडा पुलिस केरल की पुलिस से संपर्क स्थापित कर कोटेदार के बारे में पता लगाना शुरू कर दी है। थानाध्यक्ष प्रबोध कुमार ने बताया कि पड़ताल की जा रही है। जरूरत पड़ने पर गोंडा पुलिस केरल जाने को भी तैयार है। कोटेदार केरल में कहां था और क्या कर रहा था। उसके किन-किन लोगों से संबंध हैं सहित तमाम बिंदुओं की पड़ताल पुलिस कर ही है।
चाय पीते समय उठा ले गई थी पुलिस
गांव के हफीज ने बताया कि वर्ष 2008 में वह गांव से मोतीगंज बाजार सब्जी लेने के लिए गया था। वहां बैठकर दुकान पर चाय पी रहा था। दुकान से तत्कालीन दरोगा सोहित यादव उसे उठा ले गया और रात भर हवालात में बंद रखा। सुबह चालान भरकर न्यायालय भेज दिया। वहां से जेल चला गया।
जेल में एक माह आठ दिन बंद रहा। बताया कि उसे फर्जी तरीके से पुलिस ने जेल भेजा था। मुकदमे में नामजद पूर्व प्रधान बृजराज मिश्र ने बताया कि थानाध्यक्ष से मिलकर उन्हें पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी है।
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उधर, अपहरण के आरोप में जेल जा चुके लोग अब कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में हैं। तत्कालीन थानाध्यक्ष मोतीगंज, नगर व देहात कोतवाली पुलिस की भूमिका की भी जांची जाएगी। मुकदमे में कौन-कौन गवाह थे, कितने पैरोकार थे, पुलिस ने किसके बयान लिए थे, ये सभी बिंदु जांच के विषय हैं।
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सीहांगाव का पूर्व कोटेदार निजामुद्दीन 2 अक्तूबर 2007 को रहस्यमय ढंग से लापता हो गया था। जिसमें कोटेदार निजामुद्दीन के पिता मो. उमर ने गांव के बृजराज मिश्र, अब्दुल हफीज, रमजान, रामसूरत, सईद, समेत छह लोगों के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने अब्दुल हफीज को जेल भेज दिया था। लेकिन 16 साल बाद कोटेदार केरल में मिल गया।
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कोटेदार ने पुलिस को बताया कि केरल के एक मदरसे में रह रहा था। गोंडा पुलिस केरल की पुलिस से संपर्क स्थापित कर कोटेदार के बारे में पता लगाना शुरू कर दी है। थानाध्यक्ष प्रबोध कुमार ने बताया कि पड़ताल की जा रही है। जरूरत पड़ने पर गोंडा पुलिस केरल जाने को भी तैयार है। कोटेदार केरल में कहां था और क्या कर रहा था। उसके किन-किन लोगों से संबंध हैं सहित तमाम बिंदुओं की पड़ताल पुलिस कर ही है।
चाय पीते समय उठा ले गई थी पुलिस
गांव के हफीज ने बताया कि वर्ष 2008 में वह गांव से मोतीगंज बाजार सब्जी लेने के लिए गया था। वहां बैठकर दुकान पर चाय पी रहा था। दुकान से तत्कालीन दरोगा सोहित यादव उसे उठा ले गया और रात भर हवालात में बंद रखा। सुबह चालान भरकर न्यायालय भेज दिया। वहां से जेल चला गया।
जेल में एक माह आठ दिन बंद रहा। बताया कि उसे फर्जी तरीके से पुलिस ने जेल भेजा था। मुकदमे में नामजद पूर्व प्रधान बृजराज मिश्र ने बताया कि थानाध्यक्ष से मिलकर उन्हें पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी है।