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Gonda News: प्रसव में निजी से पीछे सरकारी अस्पताल
Fri, 29 Aug 2025 11:18 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Fri, 29 Aug 2025 11:18 PM IST
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गोंडा। सरकारी अस्पताल में प्रसव पर 1400 रुपये की प्रोत्साहन राशि, प्रसूता को मुफ्त भोजन, घर तक पहुंचाने की निशुल्क सुविधा के बाद भी स्वास्थ्य सेवाओं की हालत सुधर नहीं रही है। विभागीय आंकड़ों पर नजर डालें तो अप्रैल 2025 से जुलाई 2025 तक सरकारी अस्पतालों की अपेक्षा निजी अस्पतालों में 3,125 प्रसव अधिक हुए हैं।
जिले में जिला महिला अस्पताल, 16 सीएचसी, 21 पीएचसी, 96 स्वास्थ्य उप केंद्र (एएनएम सेंटर) व 98 निजी अस्पताल/नर्सिंगहोम में प्रसव की सुविधा है। इनमें से सरकारी अस्पतालों में मुफ्त स्वास्थ्य सेवाओं व विभिन्न योजनाओं के तहत प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इसके बावजूद सरकारी अस्पतालों से अधिक निजी अस्पतालों में प्रसव हुए हैं। इसमें कई मरीज अपनी मर्जी से नहीं बल्कि डॉक्टरों व आशा बहुओं के गठजोड़ से चल रहे खेल की वजह से महंगा उपचार कराने पर मजबूर हुए हैं। बीते दिनों जुड़वा बच्चों की मौत के मामले में भी आशा कार्यकर्ता ही सरकारी अस्पताल से निजी अस्पताल ले गई थी। इसकी शिकायत डीएम व सीएमओ से हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2025 से जुलाई 2025 तक जिले में कुल 25,117 प्रसव हुए हैं। 11,023 प्रसव सरकारी अस्पतालों व 14,148 निजी अस्पतालों में हुए हैं।
डॉक्टर व आशा कार्यकर्ताओं के गठजोड़ के पहले आ चुके हैं मामले
14 जुलाई को जानकीनगर निवासी शिवम सोनी ने अफसरों से शिकायत की। इसमें उन्होंने बताया कि पत्नी सोनम को जिला महिला अस्पताल ले जाने पर आशा कार्यकर्ता के माध्यम से एक निजी अस्पताल ले जाया गया। जहां पर सरकारी अस्पताल के चिकित्सक ने प्रसव कराया। जुड़वा बच्चे पैदा हुए लेकिन कुछ समय में दोनों की मौत हो गई। खूब हंगामा हुआ। मामले में शिकायत की गई। इसमें कहा गया कि जिला महिला अस्पताल में पूरे दिन आशा कार्यकर्ता व डॉक्टरों के एजेंटों का जमावड़ा लगा रहता है। ये सरकारी अस्पताल में असुविधाओं का डर दिखाकर निजी अस्पताल ले जाते हैं। मरीज को विश्वास दिलाया जाता है कि सरकारी डॉक्टर ही निजी अस्पताल में अच्छे से प्रसव करा देंगे, सरकारी अस्पताल में रिस्क होता है।
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संस्थागत प्रसव बढ़ाने का लक्ष्य
विभिन्न सरकारी योजनाओं का लक्ष्य संस्थागत प्रसव बढ़ाना है। सरकारी अस्पताल में हो या पंजीकृत निजी नर्सिंगहोम, दोनों जगह प्रसव सुरक्षित होते हैं। यदि कोई जबरन या प्रलोभन देकर निजी नर्सिंगहोम में ले जा रहा है तो ये गलत है। शिकायत मिलने पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. रश्मि वर्मा, सीएमओ
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जिले में जिला महिला अस्पताल, 16 सीएचसी, 21 पीएचसी, 96 स्वास्थ्य उप केंद्र (एएनएम सेंटर) व 98 निजी अस्पताल/नर्सिंगहोम में प्रसव की सुविधा है। इनमें से सरकारी अस्पतालों में मुफ्त स्वास्थ्य सेवाओं व विभिन्न योजनाओं के तहत प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इसके बावजूद सरकारी अस्पतालों से अधिक निजी अस्पतालों में प्रसव हुए हैं। इसमें कई मरीज अपनी मर्जी से नहीं बल्कि डॉक्टरों व आशा बहुओं के गठजोड़ से चल रहे खेल की वजह से महंगा उपचार कराने पर मजबूर हुए हैं। बीते दिनों जुड़वा बच्चों की मौत के मामले में भी आशा कार्यकर्ता ही सरकारी अस्पताल से निजी अस्पताल ले गई थी। इसकी शिकायत डीएम व सीएमओ से हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2025 से जुलाई 2025 तक जिले में कुल 25,117 प्रसव हुए हैं। 11,023 प्रसव सरकारी अस्पतालों व 14,148 निजी अस्पतालों में हुए हैं।
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डॉक्टर व आशा कार्यकर्ताओं के गठजोड़ के पहले आ चुके हैं मामले
14 जुलाई को जानकीनगर निवासी शिवम सोनी ने अफसरों से शिकायत की। इसमें उन्होंने बताया कि पत्नी सोनम को जिला महिला अस्पताल ले जाने पर आशा कार्यकर्ता के माध्यम से एक निजी अस्पताल ले जाया गया। जहां पर सरकारी अस्पताल के चिकित्सक ने प्रसव कराया। जुड़वा बच्चे पैदा हुए लेकिन कुछ समय में दोनों की मौत हो गई। खूब हंगामा हुआ। मामले में शिकायत की गई। इसमें कहा गया कि जिला महिला अस्पताल में पूरे दिन आशा कार्यकर्ता व डॉक्टरों के एजेंटों का जमावड़ा लगा रहता है। ये सरकारी अस्पताल में असुविधाओं का डर दिखाकर निजी अस्पताल ले जाते हैं। मरीज को विश्वास दिलाया जाता है कि सरकारी डॉक्टर ही निजी अस्पताल में अच्छे से प्रसव करा देंगे, सरकारी अस्पताल में रिस्क होता है।
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संस्थागत प्रसव बढ़ाने का लक्ष्य
विभिन्न सरकारी योजनाओं का लक्ष्य संस्थागत प्रसव बढ़ाना है। सरकारी अस्पताल में हो या पंजीकृत निजी नर्सिंगहोम, दोनों जगह प्रसव सुरक्षित होते हैं। यदि कोई जबरन या प्रलोभन देकर निजी नर्सिंगहोम में ले जा रहा है तो ये गलत है। शिकायत मिलने पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. रश्मि वर्मा, सीएमओ