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ट्रांसफार्मर ऑयल की हो रही कालाबाजारी
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 01 Sep 2015 12:13 AM IST
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बिजली के ट्रांसफार्मरों के फुंकने का सबसे बड़ा कारण उसमें भरे तेल की होने वाली चोरी है, जिसकी आड़ में 60 लाख रुपये के तेल की मंडल के चार जिलों में कालाबाजारी हो रही है।
बीते दिनों फुंके ट्रांसफार्मरों की जांच में यह बात उभरकर सामने आई कि बीते एक महीने के भीतर वर्कशॉप डिवीजन की ओर से रिपेयर होने वाले ट्रांसफार्मरों में 8709 लीटर तेल भरकर वितरण खंड के लोगों को दिया गया, लेकिन जब विभाग में यही ट्रांसफार्मर फुंककर आए तो इसमें से महज 321 लीटर तेल ही बरामद हुआ।
ट्रांसफार्मर ऑयल की कीमत खुले बाजार में थोक के तौर पर 90 रुपये प्रति लीटर है, जबकि फुटकर में 95 से 100 रुपये। लेकिन जब चोरी छिपे इस तेल की बिक्री व खरीददारी की जाती है, तो इसके दाम एक तिहाई तक घट जाते हैं। इसके बाद इसके खरीददार इसे 25 से 30 रुपये में खरीदकर इसका उपयोग अपने मिलावट के धंधे में करते हैं।
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देवीपाटन मंडल में एक महीने के भीतर विभिन्न क्षमता के 725 ट्रांसफार्मरों की मरम्मत होती है। इसमें सर्वाधिक 240 ट्रांसफार्मरों का औसत गोंडा जिले का है, जबकि बलरामपुर 180, बहराइच 225 व श्रावस्ती के रिपेयर्ड ट्रांसफार्मरों का औसत 60 से 80 का है।
इतनी बड़ी संख्या में ट्रांसफार्मरों की मरम्मत करने के बाद इनमें करीब 70 हजार लीटर तेल भरा जाता है। लेकिन जब यही ट्रांसफार्मर रिपेयरिंग के लिए विभाग के पास पहुंचते हैं तो उसमें 5 से 7 हजार लीटर भी तेल विभाग को नहीं मिल पाता।
ट्रांसफार्मर मरम्मत के देवीपाटन व फैजाबाद मंडल स्थित वर्कशॉपों से इस बात की तमाम शिकायतें उन्हें मिली थीं। जिसकी जांच में ट्रांसफार्मर के तेल की कालाबाजारी की बात सामने आई है। इसका परीक्षण वह खुद अपने स्तर से करवा रहे हैं। दोषी पाए जाने पर किसी को बख्शा नहीं जाएगा। -अनिल मिश्र, अधीक्षण अभियंता, वर्कशाप
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बीते दिनों फुंके ट्रांसफार्मरों की जांच में यह बात उभरकर सामने आई कि बीते एक महीने के भीतर वर्कशॉप डिवीजन की ओर से रिपेयर होने वाले ट्रांसफार्मरों में 8709 लीटर तेल भरकर वितरण खंड के लोगों को दिया गया, लेकिन जब विभाग में यही ट्रांसफार्मर फुंककर आए तो इसमें से महज 321 लीटर तेल ही बरामद हुआ।
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ट्रांसफार्मर ऑयल की कीमत खुले बाजार में थोक के तौर पर 90 रुपये प्रति लीटर है, जबकि फुटकर में 95 से 100 रुपये। लेकिन जब चोरी छिपे इस तेल की बिक्री व खरीददारी की जाती है, तो इसके दाम एक तिहाई तक घट जाते हैं। इसके बाद इसके खरीददार इसे 25 से 30 रुपये में खरीदकर इसका उपयोग अपने मिलावट के धंधे में करते हैं।
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देवीपाटन मंडल में एक महीने के भीतर विभिन्न क्षमता के 725 ट्रांसफार्मरों की मरम्मत होती है। इसमें सर्वाधिक 240 ट्रांसफार्मरों का औसत गोंडा जिले का है, जबकि बलरामपुर 180, बहराइच 225 व श्रावस्ती के रिपेयर्ड ट्रांसफार्मरों का औसत 60 से 80 का है।
इतनी बड़ी संख्या में ट्रांसफार्मरों की मरम्मत करने के बाद इनमें करीब 70 हजार लीटर तेल भरा जाता है। लेकिन जब यही ट्रांसफार्मर रिपेयरिंग के लिए विभाग के पास पहुंचते हैं तो उसमें 5 से 7 हजार लीटर भी तेल विभाग को नहीं मिल पाता।
ट्रांसफार्मर मरम्मत के देवीपाटन व फैजाबाद मंडल स्थित वर्कशॉपों से इस बात की तमाम शिकायतें उन्हें मिली थीं। जिसकी जांच में ट्रांसफार्मर के तेल की कालाबाजारी की बात सामने आई है। इसका परीक्षण वह खुद अपने स्तर से करवा रहे हैं। दोषी पाए जाने पर किसी को बख्शा नहीं जाएगा। -अनिल मिश्र, अधीक्षण अभियंता, वर्कशाप