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170 गांवों में बाढ़ का कहर
अमर उजाला/बलरामपुर
Updated Thu, 28 Jul 2016 11:49 PM IST
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सड़क पर भरा पानी
- फोटो : अमर उजाला
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जिले में बाढ़ के हालात लगातार बदतर होते जा रहे हैं। अब तक 170 गांव बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं। राप्ती नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 40 सेमी ऊपर 105.220 मीटर पर पहुंच गया है। घरों में पानी भर जाने के कारण परिवार के लोग बैलगाड़ी पर शरण लिए हुए हैं। बाढ़ के चलते घरों के चूल्हे भी बुझ गए हैं।
सैकड़ों परिवारों को भूख का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, प्रशासनिक मदद महज कागजों तक ही दिखाई दे रही है। बाढ़ का पानी भर जाने से कई रास्तों पर आवागमन भी ठप हो गया है। सड़क मार्ग से तुलसीपुर तहसील क्षेत्र का संपर्क कट गया है।
नेशनल हाईवे पर आवागमन रोक दिया गया है। प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए नाव लगाई गई हैं। नेपाल तथा पहाड़ों पर हो रही लगातार बारिश के चलते राप्ती नदी व पहाड़ी नालों की बाढ़ से जिले के 170 गांव अब तक टापू बन चुके हैं। इनमें से करीब 30 गांव के लोग घर-बार छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं।
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जिले के चौका कला, टेंगनहिया मानकोट, सेमरहना, जबदा, जबदही, कोड़री, पतझी, चकवा, रजवापुर, सिघवापुर, भुसैलवा, वीरपुर देवलहा, तिवारीडीह, प्यारेडीह, लौकहवा, संगानगर, अल्लीपुर बुुजुर्ग, चंदापुर, पचौथा, बाघाजोत, परसौना, पाला, पाली, रुस्तमनगर, लखमा, चुचुहिया, बभनजोत व महुवाधनी सहित करीब 50 गांवों में बाढ़ के चलते हालात बद से बदतर हो गए हैं।
घरों में बाढ़ का पानी भर जाने से परिवार के लोग बैलगाड़ी पर रहने को विवश हैं। प्रशासनिक राहत व बचाव का असर बाढ़ प्रभावित गांवों में दूर-दूर तक नहीं दिख रहा है। ग्राम चकवा निवासी बरसाती यादव ने बताया कि उनके घर में बाढ़ का पानी भरा हुआ है। परिवार के लोग बैलगाड़ी पर शरण लिए हुए हैं। खाने-पीने का कोई इंतजाम नहीं है। यह हाल केवल चकवा का ही नहीं, बल्कि कई गांव में यही स्थिति है।
बाढ़ के चलते कई मार्गों पर आवागमन ठप है। बढ़नी जाने वाले नेशनल हाईवे बौद्घ परिपथ पर बेलहा डिप पानी में डूब गया है। इस मार्ग पर आवागमन ठप होने से तुलसीपुर तहसील क्षेत्र का मुख्यालय से सड़क संपर्क टूट गया है। कोड़री-मथुरा, कोड़री-ललिया, महराजगंज-ललिया तथा गौरा चौराहा-तुलसीपुर मार्ग भी बाढ़ के चलते बंद हो गया है। उतरौला तहसील क्षेत्र में भी कई मार्गों पर बाढ़ का पानी भर गया है। महेश भारी-भैसहवा मार्ग के डोलिया नाला डिप पर पानी का तेज बहाव होने से लोग यात्रा करने में कतरा रहे हैं।
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सैकड़ों परिवारों को भूख का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, प्रशासनिक मदद महज कागजों तक ही दिखाई दे रही है। बाढ़ का पानी भर जाने से कई रास्तों पर आवागमन भी ठप हो गया है। सड़क मार्ग से तुलसीपुर तहसील क्षेत्र का संपर्क कट गया है।
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नेशनल हाईवे पर आवागमन रोक दिया गया है। प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए नाव लगाई गई हैं। नेपाल तथा पहाड़ों पर हो रही लगातार बारिश के चलते राप्ती नदी व पहाड़ी नालों की बाढ़ से जिले के 170 गांव अब तक टापू बन चुके हैं। इनमें से करीब 30 गांव के लोग घर-बार छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं।
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जिले के चौका कला, टेंगनहिया मानकोट, सेमरहना, जबदा, जबदही, कोड़री, पतझी, चकवा, रजवापुर, सिघवापुर, भुसैलवा, वीरपुर देवलहा, तिवारीडीह, प्यारेडीह, लौकहवा, संगानगर, अल्लीपुर बुुजुर्ग, चंदापुर, पचौथा, बाघाजोत, परसौना, पाला, पाली, रुस्तमनगर, लखमा, चुचुहिया, बभनजोत व महुवाधनी सहित करीब 50 गांवों में बाढ़ के चलते हालात बद से बदतर हो गए हैं।
घरों में बाढ़ का पानी भर जाने से परिवार के लोग बैलगाड़ी पर रहने को विवश हैं। प्रशासनिक राहत व बचाव का असर बाढ़ प्रभावित गांवों में दूर-दूर तक नहीं दिख रहा है। ग्राम चकवा निवासी बरसाती यादव ने बताया कि उनके घर में बाढ़ का पानी भरा हुआ है। परिवार के लोग बैलगाड़ी पर शरण लिए हुए हैं। खाने-पीने का कोई इंतजाम नहीं है। यह हाल केवल चकवा का ही नहीं, बल्कि कई गांव में यही स्थिति है।
बाढ़ के चलते कई मार्गों पर आवागमन ठप है। बढ़नी जाने वाले नेशनल हाईवे बौद्घ परिपथ पर बेलहा डिप पानी में डूब गया है। इस मार्ग पर आवागमन ठप होने से तुलसीपुर तहसील क्षेत्र का मुख्यालय से सड़क संपर्क टूट गया है। कोड़री-मथुरा, कोड़री-ललिया, महराजगंज-ललिया तथा गौरा चौराहा-तुलसीपुर मार्ग भी बाढ़ के चलते बंद हो गया है। उतरौला तहसील क्षेत्र में भी कई मार्गों पर बाढ़ का पानी भर गया है। महेश भारी-भैसहवा मार्ग के डोलिया नाला डिप पर पानी का तेज बहाव होने से लोग यात्रा करने में कतरा रहे हैं।