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Gonda News: पीएफ जालसाजी में तत्कालीन ईओ, लिपिक व बैंक कैशियर पर एफआईआर

Mon, 02 Mar 2026 11:01 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा Updated Mon, 02 Mar 2026 11:01 PM IST
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FIR against the then EO, clerk and bank cashier in PF fraud case
गोंडा ​स्थित नगर पालिका परिषद कार्यालय। - संवाद 
गोंडा। नगर पालिका परिषद गोंडा से सेवानिवृत्त कर्मी आयशा बेगम के कर्मचारी भविष्य निधि खाते से 1.50 लाख रुपये की जालसाजी के आरोप में कोतवाली नगर में सोमवार को प्राथमिकी दर्ज की गई है। कोर्ट के आदेश पर वर्ष 2017 में तैनात अधिशासी अधिकारी प्रतिभा सिंह (वर्तमान में कौशाम्बी के नगर पालिका परिषद मंझनपुर में तैनात), नगर पालिका के तत्कालीन लिपिक मुशफिक निवासी जलकल कॉलोनी गोंडा और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के तत्कालीन कैशियर को नामजद किया गया है।
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बड़ा इमामबाड़ा मोहल्ला निवासी आयशा बेगम ने मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में दिए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया था कि वर्ष 2017 में उनके पीएफ खाते से 2, 15 और 16 मार्च को अलग-अलग किस्तों में कुल 1.5 लाख रुपये निकाल लिए गए। उन्होंने कहा कि वह इन तिथियों में बैंक नहीं गई थीं और न ही निकासी प्रपत्रों पर उनके हस्ताक्षर हैं। आरोप है कि फर्जी हस्ताक्षर कर धनराशि निकाली गई।
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आयशा बेगम के अनुसार हाल में खाते का विवरण देखने पर उन्हें इस निकासी की जानकारी हुई। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया। न्यायालय ने प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया।
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इस मामले में ईओ प्रतिभा सिंह का कहना है कि कुछ महीनों के लिए उनके पास गोंडा का प्रभार था। जांच होने दीजिए, सब सामने आ जाएगा।
पहले भी सामने आ चुके हैं करोड़ों के घोटाले
नगर पालिका परिषद में कर्मचारी भविष्य निधि खाते में अनियमितता के मामले पूर्व में भी उजागर हो चुके हैं। आरोप रहे हैं कि कर्मचारियों के वेतन से पीएफ की कटौती तो की गई, लेकिन संबंधित खातों में जमा नहीं की गई। धनराशि कथित रूप से अन्य खातों में ट्रांसफर कर दी गई। करीब 3.5 करोड़ रुपये के घोटाले की आशंका जताई गई थी। इस मामले में तत्कालीन ईओ विकास सेन की तहरीर पर कोतवाली नगर में प्राथमिकी दर्ज हुई थी। चार लोग जेल भी जा चुके हैं।

कर्मचारियों की मेहनत की कमाई पर संकट
लगातार सामने आ रहे पीएफ मामलों से कर्मचारियों की वर्षों की जमा पूंजी की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सेवानिवृत्ति के बाद भी अपनी ही धनराशि के लिए अदालत का सहारा लेना कर्मचारियों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। अब दर्ज एफआईआर के बाद निगाहें जांच की दिशा और कथित रूप से निकाली गई रकम की रिकवरी पर टिकी हैं। पूर्व सभासद शेष चौरसिया का कहना है कि पीएफ घोटाले की गहनता से जांच होनी ही चाहिए।
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