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20 साल की कानूनी लड़ाई के बाद मिली 42 शिक्षकों को नौकरी
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गोंडा। 20 साल बाद बीती 21 नवंबर फिर से प्राइमरी स्कूल में सहायक अध्यापक के पद पर कार्यभार ग्रहण करने का आदेश मिला तो शिक्षक खुशी से झूम उठे। जिस जगह कभी उन्हें उपस्थिति पंजिका पर हस्ताक्षर करने से रोक दिया गया था। आज फिर उन्हें काम करने का मौका मिलेगा। आदेश के बारे में बात करते हुए इन शिक्षकों की आंखों में आंसू आ गये। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मनिराम सिंह कहते हैं कि खंड शिक्षा अधिकारियों को शिक्षकों को ज्वाइन कराने का आदेश जारी कर दिया गया है।
सिविल लाइन की जामवंती मिश्रा कहती हैं कि 20 सालों हो गये नौकरी मिली और फिर वेतन नहीं मिला। हाईकोर्ट का आदेश न्यायहित में हैं। बहुत खुशी की बात है, अधिकारियों ने सही समय पर वेतन देने की पहल नहीं की। पटेल नगर के संजय सिंह खासे गदगद दिखे, बोले अब तो बच्चे नौकरी के लायक हो गये हैं और अब वेतन मिलने जा रहा है। शिक्षक बनने का सपना सच मायने में तो अब ही जाकर पूरा हुआ है।
20 सालों से तो सिर्फ स्कूल की दीवारों को निहारते थे। वहां के शिक्षक अपने साथ हस्ताक्षर ही नहीं बनवाते थे। परिवार चलाने के लिए खेती व ट्यूशन एक सहारा था। पंतनगर के आलोक द्विवेदी कहते हैं कि जिस तरह उन लोगों के साथ हुआ किसी के साथ नहीं हुआ। बीएड योग्यता वालों की नियुक्तियां होती रहीं, लेकिन हम 51 लोगों की ओर देखा तक नहीं गया। तीन साथी का तो निधन हो गया। अब जाकर वेतन देने की कार्रवाई हाईकोर्ट के आदेश शुरू हुई है, यह न्याय है।
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तीन की हो चुकी है मौत, दो दूसरी सर्विस में चले गये, चार रिटायर
51 बीएड योग्यताधारी शिक्षक नियुक्ति में शामिल तीन लोगों की मौत हो चुकी है। शिक्षक की सूची में शामिल शेष दत्त तिवारी कहते हैं कि जहां तक उन्हें याद है राधेश्याम सिंह, जय मंगल सिंह के साथ एक और कि मौत हो चुकी है। वेतन पाए बिना ही उनकी मौत हो चुकी है। नियमों के तहत उनके परिवारीजनों को मृतक आश्रित के तहत सेवा दी जानी चाहिए। इसके अलावा अरुणा द्विवेदी व तेजेंद्र द्विवेदी बाद में नियमित शिक्षक भर्ती में चले गये थे। इसके अलावा कमला प्रसाद श्रीवास्तव, स्नेहलता श्रीवास्तव, कमलेश मिश्र सेवानिवृत्त की आयु पूरी कर चुके हैं। इससे 51 में 42 लोगों ने ही फाइल जमा की है। बीएसए के आदेश होने पर स्कूलों के शिक्षक कार्यभार ग्रहण कराने को तैयार हुए हैं।
हाईकोर्ट के आदेश पर ही स्कूलों में दोहरे व्यवहार से दुखी
एक तो 20 सालों से बिना वेतन के ही संघर्ष कर रहे हैं, वहीं जब हाईकोर्ट से आदेश के बाद शिक्षक स्कूल पहुंचे तो शिक्षकों ने फिर अपने साथ हस्ताक्षर कराने से मना कर दिया। इससे कई शिक्षकों की आंखें भर आईं। निंरकार मिश्र कहते हैं मानो मानवता ही नहीं रह गई है। कई शिक्षकों के साथ बैठने को पुराने शिक्षक तैयार नहीं थे। फिर बीएसए ने शुक्रवार को कार्यभार ग्रहण के लिए निर्देश दिया। इससे20 साल बाद उन्हें वह खुशियां हासिल हुईं।
शिक्षकों को कार्यभार ग्रहण कराने को कहा गया
हाईकोर्ट के आदेश पर वर्ष 1999 में नियुक्त किए गए शिक्षकों से फाइल जमा कराई गई है। खंड शिक्षा अधिकारियों को हाईकोर्ट के आदेश पर वेतन दिए जाने के आदेश की जानकारी दी गई है और कार्यभार ग्रहण कराने को कहा गया है। सभी से कार्यभार ग्रहण की रिपोर्ट मांगी गई है। -मनिराम सिंह, बीएसए
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सिविल लाइन की जामवंती मिश्रा कहती हैं कि 20 सालों हो गये नौकरी मिली और फिर वेतन नहीं मिला। हाईकोर्ट का आदेश न्यायहित में हैं। बहुत खुशी की बात है, अधिकारियों ने सही समय पर वेतन देने की पहल नहीं की। पटेल नगर के संजय सिंह खासे गदगद दिखे, बोले अब तो बच्चे नौकरी के लायक हो गये हैं और अब वेतन मिलने जा रहा है। शिक्षक बनने का सपना सच मायने में तो अब ही जाकर पूरा हुआ है।
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20 सालों से तो सिर्फ स्कूल की दीवारों को निहारते थे। वहां के शिक्षक अपने साथ हस्ताक्षर ही नहीं बनवाते थे। परिवार चलाने के लिए खेती व ट्यूशन एक सहारा था। पंतनगर के आलोक द्विवेदी कहते हैं कि जिस तरह उन लोगों के साथ हुआ किसी के साथ नहीं हुआ। बीएड योग्यता वालों की नियुक्तियां होती रहीं, लेकिन हम 51 लोगों की ओर देखा तक नहीं गया। तीन साथी का तो निधन हो गया। अब जाकर वेतन देने की कार्रवाई हाईकोर्ट के आदेश शुरू हुई है, यह न्याय है।
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तीन की हो चुकी है मौत, दो दूसरी सर्विस में चले गये, चार रिटायर
51 बीएड योग्यताधारी शिक्षक नियुक्ति में शामिल तीन लोगों की मौत हो चुकी है। शिक्षक की सूची में शामिल शेष दत्त तिवारी कहते हैं कि जहां तक उन्हें याद है राधेश्याम सिंह, जय मंगल सिंह के साथ एक और कि मौत हो चुकी है। वेतन पाए बिना ही उनकी मौत हो चुकी है। नियमों के तहत उनके परिवारीजनों को मृतक आश्रित के तहत सेवा दी जानी चाहिए। इसके अलावा अरुणा द्विवेदी व तेजेंद्र द्विवेदी बाद में नियमित शिक्षक भर्ती में चले गये थे। इसके अलावा कमला प्रसाद श्रीवास्तव, स्नेहलता श्रीवास्तव, कमलेश मिश्र सेवानिवृत्त की आयु पूरी कर चुके हैं। इससे 51 में 42 लोगों ने ही फाइल जमा की है। बीएसए के आदेश होने पर स्कूलों के शिक्षक कार्यभार ग्रहण कराने को तैयार हुए हैं।
हाईकोर्ट के आदेश पर ही स्कूलों में दोहरे व्यवहार से दुखी
एक तो 20 सालों से बिना वेतन के ही संघर्ष कर रहे हैं, वहीं जब हाईकोर्ट से आदेश के बाद शिक्षक स्कूल पहुंचे तो शिक्षकों ने फिर अपने साथ हस्ताक्षर कराने से मना कर दिया। इससे कई शिक्षकों की आंखें भर आईं। निंरकार मिश्र कहते हैं मानो मानवता ही नहीं रह गई है। कई शिक्षकों के साथ बैठने को पुराने शिक्षक तैयार नहीं थे। फिर बीएसए ने शुक्रवार को कार्यभार ग्रहण के लिए निर्देश दिया। इससे20 साल बाद उन्हें वह खुशियां हासिल हुईं।
शिक्षकों को कार्यभार ग्रहण कराने को कहा गया
हाईकोर्ट के आदेश पर वर्ष 1999 में नियुक्त किए गए शिक्षकों से फाइल जमा कराई गई है। खंड शिक्षा अधिकारियों को हाईकोर्ट के आदेश पर वेतन दिए जाने के आदेश की जानकारी दी गई है और कार्यभार ग्रहण कराने को कहा गया है। सभी से कार्यभार ग्रहण की रिपोर्ट मांगी गई है। -मनिराम सिंह, बीएसए