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30 साल पहले सरकारी बैंक से लिया 30 हजार का कर्ज, अब तीन करोड़ के कर्जदार बने किसान

Sun, 11 Oct 2020 10:36 AM IST
लखनऊ ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, गोंडा
अमर उजाला नेटवर्क, गोंडा Published by: लखनऊ ब्यूरो Updated Sun, 11 Oct 2020 10:36 AM IST
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Farmers who took loan of 30 thousand became loans of three crores
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
गोंडा। 30 साल पहले तक किसानों के हर दुख सुख में खड़े होने वाले सहकारी बैंक ही अब किसानों के भक्षक बन गए हैं। 30 हजार का कर्ज लेने वाले किसानों को तीन-तीन करोड़ का कर्जदार बनाकर उनकी जमीनों को नीलाम करने की कवायद शुरू हो गई है। भूमि विकास बैंक ने 672 किसानों को नोटिस जारी कर उनकी जमीनों को नीलाम करने की कार्रवाई भी शुरू कर दी है, जबकि जिला सहकारी बैंक ने सात सौ गुना से अधिक का कर्जदार बनाकर किसानों को उनकी जमीन से बेदखल करने की रणनीति तैयार की है।
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यह तब है जब जिले में जिला सहकारी बैंक का अस्तित्व ही 16 साल पहले मिट चुका है। रिजर्व बैंक के निर्देश पर जिला सहकारी बैंक का परिसमापन किया जा चुका है। इस परिसमापन में सैकड़ों किसानों का जमा 65 हजार रुपये भी डूब चुका है।
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करीब 30 साल पहले भूमि विकास बैंक व जिला सहकारी बैंक किसानों के हितैषी हुआ करते थे। किसान यहीं से कर्ज लेते थे और अपनी कमाई भी इसी बैंक में जमा करते थे। भूमि विकास बैंक अब न तो कर्ज देता है और न उसके पास पूंजी ही है। इसकी छह शाखाएं जिले में आज भी संचालित हैं लेकिन ये मृतप्राय हैं। हालांकि आज भी इस बैंक के अध्यक्ष चुने जाते हैं।
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जिले भर में भूमि विकास बैंक के 7752 किसान आज भी कर्जदार हैं। इनके ऊपर 36.52 करोड़ का कर्ज है। इसमें 924 किसानों की भूमि नीलामी की जानी है। 672 को नोटिस भी जारी किया गया है। 924 किसानों पर 21.17 करोड़ का कर्ज है और 672 किसानों से 15.11 करोड़ की वसूली के लिए उनकी जमीन नीलाम की जाएगी।

सात सौ गुना से अधिक का बना दिया कर्जदार
मनकापुर के अशरफ पुर गांव निवासी अशोक कुमार पांडेय पुत्र राम बहादुर पांडेय ने 30 साल पहले जिला सहकारी बैंक से 58 बीघे पर 28365 कर्ज लिया था। अब मूल्यांकन कर्ज 2 करोड़ 88 हजार रुपये बनाया गया है। किसी भी कर्ज का 10 प्रतिशत से अधिक ब्याज नहीं लिया जा सकता है लेकिन यहां तो एक हजार गुना अधिक का कर्जदार बनाकर कर्ज के एवज में किसान की पूरी जमीन नीलाम कर दी गई।

वहीं अशोक कुमार के छोटे भाई प्रमोद कुमार पांडेय का 61 बीघा खेत पर 30,500 रुपया कर्ज था, जिस पर अब 2 करोड़ 96 लाख 23 हजार रुपया बना कर सम्पूर्ण खेत को नीलाम कर दिया गया। यह सब वर्ष 1997-98 में ही नीलामी प्रक्रिया हुई है। उसके बाद लेखपाल/कानूनगो ने मिलकर उक्त दोनों खतौनी की डबल खतौनी बना कर 17 लोगों के नाम 117 बीघा खेत बैनामा करवा दिया।

2008 व 2012 में हुई थी कर्जमाफी फिर भी कर्जदार रह गए किसान
2008 में तत्कालीन सरकार ने किसानों की कर्जमाफी की थी। तत्कालीन केंद्र सरकार ने सभी किसानों के कर्ज माफ किए थे इसके बावजूद किसानों का कर्ज माफ नहीं हुआ। 2012 में प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने भूमि विकास के 40 हजार कर्जदार किसानों का 33.26 करोड़ रुपये माफ किया था। मौजूदा सरकार ने भी किसानों का एक-एक लाख रुपये तक माफ किया लेकिन इसका फायदा किसानों को नहीं मिला। इन बैंकों से कर्ज लेने वाले किसानों का कर्ज माफ क्यों नहीं हुआ इसका जवाब किसी के पास नहीं है।

16 साल पहले सहकारी बैंक का हो चुका है परिसमापन
गरीब किसानों का 65 करोड़ रुपये जब्त हो चुका है। जिले में सहकारिता का अवसान वर्ष 2002 में शुरू हो गया। बैंक के शर्तें न पूरा करने के कारण रिजर्व बैंक ने जिला सहकारी बैंक के परिसमापन की घोषणा की। परिसमापन का कार्य करीब दो साल चला। वर्ष 2004 में बैंक को पूरी तरह से परिसमाप्त करने की घोषणा की। इसके बाद जिला सहकारी बैंक का अस्तित्व मिट गया और सहकारी बैंक की संपत्तियां भी लगभग बिक चुकी हैं। इस बैंक में करीब 65 करोड़ रुपये जमा करने वाले सैकड़ों किसानों की पूंजी भी डूब गई।

बैनामे की भूमि छीनने की तैयारी
किसान श्रीराम वर्मा ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2011 में 7 बीघा खेत 6 लाख में खरीदा था जिसका दाखिल खारिज भी उनके नाम से है। पक्का मकान बनवाकर परिवार के साथ रहते हैं। खेत के चारों तरफ सागौन, यूकेलिप्टस व आम का पेड़ भी लगवा रखा है। किसान राम कृपाल मौर्य ने बताया कि 2 बीघा खेत बैनामा लिया था जिसमें पक्का मकान बनवाकर परिवार के साथ रह कर खेती बाड़ी करते हैं। किसान शिव नारायण चौहान ने भी 2 बीघा खेत 2 लाख में खरीदा था।

किसान नरसिंग मौर्य ने बताया कि वर्ष 2012 में 10 बीघा खेत 9 लाख में बैनामा लिया था। जिसमें मकान, इंजन बोरिंग, पेड़ पौधे लगाए हैं। खेत में गेहूं, धान, सब्जी पैदा करके परिवार के साथ जीवन यापन कर रहे हैं। इस भूमि के अलावा कोई अन्य भूमि नहीं है। इसी तरह 17 किसान कर्जदार किसानों से जमीन बैनामा लेकर खेती किसानी कर रहे हैं। कर्जदार किसान तो अब इस दुनिया में नहीं हैं पर बैनामा लेने वालों किसानों से उनकी जमीनें छीनी जा रही हैं।


कर्जदार किसानों को नोटिस जारी किया
भूमि विकास बैंक से कर्ज लेने वाले 7752 किसानों में से 924 किसानों की भूमि नीलाम की जाएगी। 672 को नोटिस भी जारी किया जा चुका है। कर्जमाफी में जो पात्र थे उनका ऋण माफ हुआ बाकी जो कर्जदार हैं उनसे धनराशि वसूल की जाएगी। - भूपेंद्र सिंह, क्षेत्रीय प्रबंधक भूमि विकास विकास बैंक
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