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Gonda News: इस्राइल व दुबई में फंसे गोंडा के युवाओं के परिजन बेचैन
Mon, 02 Mar 2026 11:03 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Mon, 02 Mar 2026 11:03 PM IST
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इस्राइल व दुबई में फंसे गोंडा के युवा। स्रोत : परिजन
मसकनवा/नवाबगंज/तरबगंज (गोंडा)। ईरान पर हमले और पश्चिम एशिया में बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच जिले के तरबगंज, नवाबगंज व छपिया क्षेत्र के 100 से अधिक युवा इस्राइल और दुबई में रोजी-रोटी की जंग लड़ रहे हैं। वहां सायरन बजते हैं, मोबाइल पर अलर्ट आता है और कुछ ही मिनटों में बंकर पनाहगाह बन जाता है। इधर गांवों में टीवी स्क्रीन पर हर ब्रेकिंग न्यूज के साथ परिजनों की धड़कन तेज हो जाती है। संवाद न्यूज एजेंसी ने इस्राइल और दुबई में फंसे गोंडा के कुछ युवाओं और उनके परिजनों से बातचीत की। पेश है रिपोर्ट-
सायरन बजते ही दौड़ते हैं बंकर की तरफ
तरबगंज के सेझिया गांव के मजरा टेपरा निवासी रमेश साहनी, रंजीत व मजरा पंडित पुरवा के प्रहलाद चौहान इस समय इस्राइल में काम कर रहे हैं। प्रह्लाद इस्राइल के नेतानिया शहर में टाइल्स लगाने का काम करते हैं। उन्होंने फोन पर बताया कि मिसाइल अटैक से पहले मोबाइल पर मेसेज आता है। फिर पांच मिनट बाद सायरन बजता है। फिर दौड़कर करीब 100 मीटर दूर बने बंकर में जाकर छिपना होता है। कुछ देर बाद बाहर आकर फिर काम पर लग जाते हैं। रंजीत की पत्नी राजकुमारी ने बताया कि पति पांच महीने पहले ही गए हैं। रोज बात होती है, वह कहते हैं घबराना मत। वहीं, रमेश साहनी की पत्नी रंभा देवी चार बेटियों के साथ गांव में हैं। रमेश डेढ़ साल से इस्राइल की नजारत सिटी में हैं। उन्होंने परिजनों से फोन पर बताया कि सुरक्षा इंतजाम पुख्ता हैं। ज्यादा हमले तेलअवीव-हाइफा के पास होते हैं।
दिन सामान्य, रात में धमाकों की गूंज
छपिया के सैजलपुर निवासी दिनेश वर्मा दुबई में क्लीनिंग कंपनी संचालित करते हैं। वह दुबई में बरदुबई क्षेत्र में रहते हैं। उन्होंने बताया कि दिन में हालात सामान्य दिखते हैं, लेकिन रात होते ही धमाकों की खबरें और अफवाहें बेचैन कर देती हैं। उनके फ्लैट में गोंडा के करीब 20 लोग रहते हैं। आसपास के फ्लैटों में गोंडा के ही 40 से अधिक लोग और हैं। भारतीय दूतावास से उड़ानों को लेकर स्पष्ट निर्देश न मिलने से अनिश्चितता बनी हुई है। दिनेश के बताया कि सीधे दुबई से कोई फ्लाइट नहीं है। ओमान के रास्ते भारत लौटा जा सकता है, लेकिन टिकट करीब 1.60 लाख रुपये तक पहुंच गया है। इतनी महंगी फ्लाइट आम लोगों की पहुंच से बाहर है। उन्होंने बताया कि परिवार वाले लगातार वीडियो कॉल पर हाल लेते हैं और टीवी पर खबरें देखते रहते हैं।
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गांवों में बेचैनी, दुआओं का सहारा
नवाबगंज क्षेत्र के बैरी शाल पुरवा निवासी सुरेंद्र दो वर्ष पहले इस्राइल गए थे। बहन रंजू देवी ने वीडियो कॉल पर बात कराई तो सुरेंद्र बोले कि डर तो लगता है, पर काम जारी है। बैरी शाल पुरवा के रामबख्श भी वहीं फंसे हैं। कोल्हमपुर बाजार के हरिश्चंद्र के बेटे राजेश इस्राइल के खदेड़ा शहर में टायर फैक्टरी में कार्यरत हैं। उन्होंने परिजनों को भरोसा दिलाया कि वे भारतीय दूतावास के संपर्क में हैं। बल्लीपुर निवासी मीरा देवी ने बताया कि उनके पति रामनरेश पति इस्राइल में भवन निर्माण में लगे हैं। न्यूज चैनल पर युद्ध की खबरें देख मन घबरा जाता है। किसुनदासपुर निवासी अंकित सिंह के बड़े भाई अमित सिंह दुबई के अलनहदा में इंजीनियर हैं और परिवार सहित वहीं रहते हैं। वह भारतीय दूतावास से संपर्क बनाए हुए हैं। वहीं, गांवों में इन युवाओं की मां, पत्नी व अन्य परिजन हर ब्रेकिंग न्यूज पर नजर गड़ाए हैं।
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सायरन बजते ही दौड़ते हैं बंकर की तरफ
तरबगंज के सेझिया गांव के मजरा टेपरा निवासी रमेश साहनी, रंजीत व मजरा पंडित पुरवा के प्रहलाद चौहान इस समय इस्राइल में काम कर रहे हैं। प्रह्लाद इस्राइल के नेतानिया शहर में टाइल्स लगाने का काम करते हैं। उन्होंने फोन पर बताया कि मिसाइल अटैक से पहले मोबाइल पर मेसेज आता है। फिर पांच मिनट बाद सायरन बजता है। फिर दौड़कर करीब 100 मीटर दूर बने बंकर में जाकर छिपना होता है। कुछ देर बाद बाहर आकर फिर काम पर लग जाते हैं। रंजीत की पत्नी राजकुमारी ने बताया कि पति पांच महीने पहले ही गए हैं। रोज बात होती है, वह कहते हैं घबराना मत। वहीं, रमेश साहनी की पत्नी रंभा देवी चार बेटियों के साथ गांव में हैं। रमेश डेढ़ साल से इस्राइल की नजारत सिटी में हैं। उन्होंने परिजनों से फोन पर बताया कि सुरक्षा इंतजाम पुख्ता हैं। ज्यादा हमले तेलअवीव-हाइफा के पास होते हैं।
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दिन सामान्य, रात में धमाकों की गूंज
छपिया के सैजलपुर निवासी दिनेश वर्मा दुबई में क्लीनिंग कंपनी संचालित करते हैं। वह दुबई में बरदुबई क्षेत्र में रहते हैं। उन्होंने बताया कि दिन में हालात सामान्य दिखते हैं, लेकिन रात होते ही धमाकों की खबरें और अफवाहें बेचैन कर देती हैं। उनके फ्लैट में गोंडा के करीब 20 लोग रहते हैं। आसपास के फ्लैटों में गोंडा के ही 40 से अधिक लोग और हैं। भारतीय दूतावास से उड़ानों को लेकर स्पष्ट निर्देश न मिलने से अनिश्चितता बनी हुई है। दिनेश के बताया कि सीधे दुबई से कोई फ्लाइट नहीं है। ओमान के रास्ते भारत लौटा जा सकता है, लेकिन टिकट करीब 1.60 लाख रुपये तक पहुंच गया है। इतनी महंगी फ्लाइट आम लोगों की पहुंच से बाहर है। उन्होंने बताया कि परिवार वाले लगातार वीडियो कॉल पर हाल लेते हैं और टीवी पर खबरें देखते रहते हैं।
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गांवों में बेचैनी, दुआओं का सहारा
नवाबगंज क्षेत्र के बैरी शाल पुरवा निवासी सुरेंद्र दो वर्ष पहले इस्राइल गए थे। बहन रंजू देवी ने वीडियो कॉल पर बात कराई तो सुरेंद्र बोले कि डर तो लगता है, पर काम जारी है। बैरी शाल पुरवा के रामबख्श भी वहीं फंसे हैं। कोल्हमपुर बाजार के हरिश्चंद्र के बेटे राजेश इस्राइल के खदेड़ा शहर में टायर फैक्टरी में कार्यरत हैं। उन्होंने परिजनों को भरोसा दिलाया कि वे भारतीय दूतावास के संपर्क में हैं। बल्लीपुर निवासी मीरा देवी ने बताया कि उनके पति रामनरेश पति इस्राइल में भवन निर्माण में लगे हैं। न्यूज चैनल पर युद्ध की खबरें देख मन घबरा जाता है। किसुनदासपुर निवासी अंकित सिंह के बड़े भाई अमित सिंह दुबई के अलनहदा में इंजीनियर हैं और परिवार सहित वहीं रहते हैं। वह भारतीय दूतावास से संपर्क बनाए हुए हैं। वहीं, गांवों में इन युवाओं की मां, पत्नी व अन्य परिजन हर ब्रेकिंग न्यूज पर नजर गड़ाए हैं।

इस्राइल व दुबई में फंसे गोंडा के युवा। स्रोत : परिजन

इस्राइल व दुबई में फंसे गोंडा के युवा। स्रोत : परिजन

इस्राइल व दुबई में फंसे गोंडा के युवा। स्रोत : परिजन

इस्राइल व दुबई में फंसे गोंडा के युवा। स्रोत : परिजन