ओवरलोडिंग खत्म करने को बनेंगे 10 नए फीडर
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इस पूरी योजना के लिए पावर कॉरपोरेशन ने साढ़े 8 करोड़ रुपये का इस्टीमेट तैयार किया है, जिसका काम बिजनेस प्लान/व्यापार विकास निधि में कराया जाना है। वहीं, 33 केवी बिजलीघर आवास विकास से बड़गांव तक 33 केवी की अंडरग्राउंड व उपरगामी बिजली की नई लाइन बिछाई जाएगी।
33 केवी विद्युत उपकेंद्र करनैलगंज का लोड कम करने के लिए 11 केवी का एक नया फीडर इस बिजलीघर से निकाला जाएगा। जबकि 33 केवी नवाबगंज फीडर से निकले ईस्ट फीडर का लोड कम करने के लिए इसी के समानान्तर एक दूसरा फीडर तैयार किया जाएगा।
वहीं 33 केवी डुमरियाडीह बिजलीघर से निकले 11 केवी बालेश्वरगंज फीडर की अधिभारिता कम करने के लिए एक नया फीडर इसी लाइन के समांतर तैयार किया जाएगा। जबकि मनकापुर से निकले रेहरा, मसकनवा व मोतीगंज फीडरों के ही पैरलल 3 नए 11 केवी के फीडरों का निर्माण किया जाएगा।
इसी के साथ 33 केवी मसकनवा बिजलीघर से निकले गौराचौकी व बगदर फीडर की अधिभारिता भी दो नए 11 केवी फीडरों को बनाकर कम की जाएगी। साथ ही 33 केवी घारीघाट बिजलीघर से निकले चंद्रदीप व कूकनगर की अधिभारिता समाप्त करने के लिए एक-एक नए फीडर का निर्माण होगा।
बिजनेस प्लान/व्यापार विकास निधि योजना में पावर कॉरपोरेशन ने जिले के तीन बिजलीघरों डुमरियाडीह, मसकनवा व नवाबगंज बिजलीघरों की क्षमता बढ़ाने के लिए यहां नए पावर ट्रांसफार्मर लगाए जाने का भी प्रस्ताव तैयार किया है।
जिसके तहत डुमरियाडीह बिजलीघर में पहले से लगे 5 एमवीए पावर ट्रांसफार्मर के साथ ही एक दूसरा 5 एमवीए का पावर ट्रांसफार्मर यहां लगाया जाएगा। जबकि मसकनवा बिजलीघर की क्षमता भी 5 एमवीए का एक दूसरा ट्रांसफार्मर लगाकर 15 एमवीए कर दी जाएगी। इसी के साथ नवाबगंज बिजलीघर में पहले से लगे 5-5 एमवीए के दो पावर ट्रांसफार्मरों के स्थान पर यहां 10-10 एमवीए के दो पावर ट्रांसफार्मर लगाए जाएंगे।
बिजनेस प्लान/व्यापार विकास निधि योजना के तहत जिले में तकरीबन साढे़ 8 करोड़ रुपये की लागत से होने वाले इस काम के लिए मध्यांचल विद्युत वितरण निगम की एमडी सिल्वा जे कुमारी ने इसका इस्टीमेट मुख्य अभियंता से तलब किया है। साथ ही इस संबंध में अधिकारियों को निर्देश भी दिया है कि वह जल्दी से जल्दी इसका काम यहां कराना सुनिश्चित करें।
अधिशाषी अभियंता विद्युत तीरथराम श्रीवास्तव ने कहा कि कॉरपोरेशन से प्राप्त निर्देशों के अनुक्रम में पूरा इस्टीमेट उन्होंने तैयार कर उच्चाधिकारियों को भेज दिया है। उनका मानना है कि अगर यह काम जिले में दो से तीन महीने के भीतर हो जाता है तो यह जनपदवासियों के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी।
इससे ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ताओं को बिजली की ज्यादातर दुश्वारियों से छुटकारा मिल जाएगा और जो बिजली के तार ओवरलोड होने पर टूट जाते हैं, वह भी नहीं टूटेंगे।