फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gonda News ›   Dirty water is being collected in open lands and ponds

तो महामारी व बाढ़ की चपेट में होगा गोंडा शहर!

Wed, 08 Sep 2021 10:32 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 08 Sep 2021 10:32 PM IST
विज्ञापन
Dirty water is being collected in open lands and ponds
गोंडा मे कोविड अस्पातल के सामने भरा गंदा पानी। - फोटो : GONDA
गोंडा। लगातार विस्तारित होते नगर पालिका परिषद गोंडा क्षेत्र की आबादी लगातार बढ़ रही है। मंडल मुख्यालय बनने के बाद से शहरी आबादी भी दो गुना तक अधिक हो गई है। इसके चलते नगर पालिका क्षेत्र से सटी 34 ग्राम पंचायतें शहरी क्षेत्र में आ गई हैं।
विज्ञापन

इसके चलते अनियोजित तरह से बस रही शहरी आबादी के कारण प्रयोग में आ रहा गंदा व सीवर का पानी तेजी से खुली जमीनों व तालाबों में पैबस्त हो कर भूगर्भ जल को प्रदूषित कर जहरीला बना रहा है। इससे पूरे शहर पर महामारी का खतरा भी मंडराने लगा है। इसकी रोकथाम को प्रस्तावित सीवर लाइन बिछाने का कार्य सालों से कागजी दस्तावेजों में सिमटा पड़ा है।
विज्ञापन

जलनिकासी की सुविधा न होने से शहर में खाली जमीनों, तालाबों में गंदे व सीवर वाले पानी का जमाव इस कदर हो गया है कि वहां पर दुर्गंध व प्रदूषण फैलने लगा है। वर्ष 1997 में देवीपाटन मंडल बनाने के बाद गोंडा को मंडल मुख्यालय का दर्जा दिया गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

अमृत योजना के तहत अन्य जिलों में तो सीवर लाइन बिछाने का काम भी शुरू हो गया है लेकिन मंडल मुख्यालय पर जलनिकासी न होने से तीन लाख की आबादी अभी भी जूझ रही है।
नगर पालिका परिषद गोंडा क्षेत्र की आबादी करीब 1.60 लाख के करीब है। नगर क्षेत्र की जल निकासी के लिए बने लगभग सभी बड़े नालों पर कब्जा हो चुका है जबकि कई तालाबों का अस्तित्व ही अवैध कब्जे के चलते खत्म होने की कगार पर पहुंच गया।
जानकीनगर, गिर्दगोंडा ग्राम पंचायत सहित शहर का आधा पानी मंडेनाला से होकर निकलता था। मंडे नाला के पास नजूल जमीनों पर मकान बन गए। कब्जे होकर इन पर आज आलीशान भवन खड़े हो गए हैं।
इसी तरह बस स्टेशन, मालवीय नगर व राधाकुंड मोहल्ले का पानी सागर ताल से होकर विपता ताल में जाता था और यह पानी मेवतियान मोहल्ले से होकर टेढ़ी नदी में मिलता था, लेकिन अब ताल का भाग संकरा हो गया और नाला भी अपने वास्तविक रूप में नहीं है। मवैया ताल के 20 प्रतिशत भाग को छोड़कर पूरी जमीन बिक गई।
लाल बहादुर शास्त्री महाविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डा शैलेंद्र नाथ मिश्र ने कहा कि पानी निकास की कोई व्यवस्था नहीं है। जल जमाव होने के कारण जल प्रदूषण बढ़ रहा है। इसमें जलजनित कीटाणुओं का प्रकोप बढ़ रहा है।

जिले के वरिष्ठ व्यवसायी उमेश शाह ने कहा कि पानी निकास के लिए कुछ लोगों ने तो सोख्ता बनवाया है लेकिन यह अस्थाई समाधान है। आने वाले दस सालों में शहरी जीवन संकट में हो जाएगा। वरिष्ठ अधिवक्ता शांति प्रसाद शुक्ल ने कहा कि यदि जल निकासी के लिए सीवर लाइन नहीं बिछाया गया तो दस साल में बाढ़ व महामारी के लिए गोंडा का नाम सबसे ऊपर होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed