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धौरहरा प्राइमरी स्कूल विद्यांजलि योजना से बाहर
अमर उजाला/गोंडा
Updated Mon, 13 Jun 2016 11:09 PM IST
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स्कूल
- फोटो : अमर उजाला
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केंद्र सरकार की तरफ से सरकारी स्कूलों में सामुदायिक सहभागिता को लेकर पूरे देश में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चलाई जा रही विद्यांजलि योजना में जिले में विद्यालयों के चयन को लेकर बड़ी लापरवाही सामने आई है। विद्यालयों के चयन की जिम्मेदारी संभाल रहे जिला समन्वयक की लापरवाही से गूगल के नक्शे पर अपनी जगह बनाने वाला प्राथमिक विद्यालय धौरहरा इस योजना में अपनी जगह नहीं बना सका है। डीसी प्रशिक्षण की इस लापरवाही ने चयनित किए गए विद्यालयों पर सवालिया निशान लगा दिया है।
केंद्र सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने विद्यांजलि योजना के अंतर्गत परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ व्यक्तित्व विकास के तरीके सिखाने की योजना बनाई है। इस योजना के अंतर्गत जिले के पांच सरकारी विद्यालयों का चयन पायलट प्रोजेक्ट के रूप में किए जाने के निर्देश दिए गए थे।
योजना की गाइड लाइन के मुताबिक विद्यालय में शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अनुरूप शिक्षक और बच्चों का अनुपात, प्रधानाध्यापक, कम से कम एक महिला शिक्षिका, विद्यालय की सुरक्षा के लिए चारदीवारी, क्रियाशाील शौचालय व इंटरनेट कनेक्शन की सुविधा होने के मानक तय किए गए हैं।
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जिले से ऐसे पांच विद्यालयों के चयन की जिम्मेदारी सर्व शिक्षा अभियान के जिला समन्वयक प्रशिक्षण चंद्रभान पांडेय को सौंपी गई थी। लेकिन उन्होंने मौके पर जाकर विद्यालयों की वास्तविक हालत की जानकारी करने की जहमत नहीं उठाई और कार्यालय में बैठकर पांच पूर्व माध्यमिक स्कूलों का चयन कर लिया। इसमें एक भी प्राथमिक विद्यालय को शामिल नहीं किया गया। जिला समन्वयक की इस लापरवाही से गूगल के नक्शे पर अपनी चमक बिखेरने वाला प्राथमिक विद्यालय धौरहरा इस योजना में चयनित होने से वंचित रह गया।
प्राथमिक विद्यालय धौरहरा के प्रधानाध्यापक रविप्रताप सिंह ने इस चयन पर सवाल उठाया है। रविप्रताप का दावा है कि इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए चयनित किए गए पूर्व माध्यमिक विद्यालय दलीपपुरवा, महेवा गोपाल, कर्नलगंज, दर्जीकुआं, मुंडेरवा माफी व पूर्व माध्यमिक विद्यालय बेलसर में यदि दलीपपुरवा को छोड़ दिया जाए तो वर्तमान समय में कोई भी विद्यालय इस योजना के मानकों को पूरा नहीं करते हैं।
इस संबंध में जिला समन्वयक प्रशिक्षण चंद्रभान पांडेय का कहना है कि उन्होंने विभागीय अधिकारियों की राय लेने के बाद ही पांचों स्कूलों का चयन किया है। चयन में लापरवाही की बात को खारिज किया है।
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केंद्र सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने विद्यांजलि योजना के अंतर्गत परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ व्यक्तित्व विकास के तरीके सिखाने की योजना बनाई है। इस योजना के अंतर्गत जिले के पांच सरकारी विद्यालयों का चयन पायलट प्रोजेक्ट के रूप में किए जाने के निर्देश दिए गए थे।
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योजना की गाइड लाइन के मुताबिक विद्यालय में शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अनुरूप शिक्षक और बच्चों का अनुपात, प्रधानाध्यापक, कम से कम एक महिला शिक्षिका, विद्यालय की सुरक्षा के लिए चारदीवारी, क्रियाशाील शौचालय व इंटरनेट कनेक्शन की सुविधा होने के मानक तय किए गए हैं।
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जिले से ऐसे पांच विद्यालयों के चयन की जिम्मेदारी सर्व शिक्षा अभियान के जिला समन्वयक प्रशिक्षण चंद्रभान पांडेय को सौंपी गई थी। लेकिन उन्होंने मौके पर जाकर विद्यालयों की वास्तविक हालत की जानकारी करने की जहमत नहीं उठाई और कार्यालय में बैठकर पांच पूर्व माध्यमिक स्कूलों का चयन कर लिया। इसमें एक भी प्राथमिक विद्यालय को शामिल नहीं किया गया। जिला समन्वयक की इस लापरवाही से गूगल के नक्शे पर अपनी चमक बिखेरने वाला प्राथमिक विद्यालय धौरहरा इस योजना में चयनित होने से वंचित रह गया।
प्राथमिक विद्यालय धौरहरा के प्रधानाध्यापक रविप्रताप सिंह ने इस चयन पर सवाल उठाया है। रविप्रताप का दावा है कि इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए चयनित किए गए पूर्व माध्यमिक विद्यालय दलीपपुरवा, महेवा गोपाल, कर्नलगंज, दर्जीकुआं, मुंडेरवा माफी व पूर्व माध्यमिक विद्यालय बेलसर में यदि दलीपपुरवा को छोड़ दिया जाए तो वर्तमान समय में कोई भी विद्यालय इस योजना के मानकों को पूरा नहीं करते हैं।
इस संबंध में जिला समन्वयक प्रशिक्षण चंद्रभान पांडेय का कहना है कि उन्होंने विभागीय अधिकारियों की राय लेने के बाद ही पांचों स्कूलों का चयन किया है। चयन में लापरवाही की बात को खारिज किया है।