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बैरोजों से छोड़े गये पानी से 50 गावों में बाढ़ की तबाही
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गोंडा में नबाबगंज के दत्तनगर गोकुला गांव को जाने वाले रास्ते पर भरा बाढ़ का पानी।
- फोटो : GONDA
गोंडा। तीन दिनों की बारिश के बाद बैराजों से सरयू में साढ़े छह लाख क्यूसेक पानी छोड़ दिया गया है। इससे सरयू का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया। तरबगंज व करनैलगंज क्षेत्र के करीब 50 गांवों में बाढ़ का कहर शुरू हो गया है।
लाखों हेक्टेयर फसल बाढ़ में डूब गई है और गांवों में भी बाढ़ की स्थिति हो गई है। जिलाधिकारी मार्कंडेय शाही ने दोनों तहसीलों के अधिकारियों को बाढ़ से बचाव के लिए निर्देश दिए हैं और रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने कहा कि नदी के जलस्तर पर पूरी नजर रखी जा रही है।
करनैलगंज में पहाड़ी नालों के पानी एवं आसपास के जिलों सहित उत्तराखंड में हुई भारी बारिश का असर सरयू नदी में दिखाई देने लगा है। एक बार फिर से सरयू का जलस्तर तेजी से बढ़कर खतरे के निशान से 40 सेंटीमीटर ऊपर हो गया है। डिस्चार्ज सात लाख के आसपास पहुंच गया है।
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वहीं नवाबगंज में सरयू नदी खतरे के निशान को पार करने को बेताब है। खतरे के निशान से महज 68 सेमी नीचे हैं। यहां पर बैराजों से छोड़े गये पानी का असर दिखने लगा है। दोनो तहसीलों के अधिकारियों ने सरयू नदी के तटवर्ती गावों में लोगों से बात किया और उन्हें सतर्क किया। करनैलगंज में बांध का निरीक्षण किया। नदी का जलस्तर बढ़ने से बांध पर भी खतरा बढ़ गया है।
नवाबगंज। लगातार बढ़ रहे जलस्तर से नदी के तटीय इलाकों में पानी फैलने से बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। बुधवार की सुबह सरयू नदी का जलस्तर 92.050 सेमी रहा जो कि खतरे के निशान से करीब 68 सेमीं नीचे था। बैराजों से छोड़े गये 634950 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज होने से नदी का जलस्तर 5 सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ रहा है।
अगर नदी का पानी बढ़ने का यही रफ्तार रहा तो 20 घंटे में सरयू खतरे के निशान से ऊपर बहने लगेगी। जिससे क्षेत्र के दत्तनगर, गोकुला, साखीपुर, तुलसीपुर माझा, मांझा राठ, जैतपुर, महेशपुर, वजीराबाद, दुर्गागंज माझा, दुल्लापुर गांव के कई दर्जन मजरे में बाढ़ का खतरा होगा।
एसडीएम तरबगंज कुलदीप सिंह ने बताया कि प्रशासन बाढ़ के खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। बाढ़ प्रभावित इलाकों के लोगों को एलर्ट कर दिया है। पर्याप्त मात्रा में नाव की व्यवस्था कर दी गई है। बाढ़ राहत चौकियों को सक्रिय कर तीन राहत शिविरों को भी सक्रिय कर दिया गया है। तहसील में कंट्रोल रूम को सक्रिय कर दिया गया है।
पहाड़ी नालों के पानी एवं आसपास के जिलों सहित उत्तराखंड में हुई भारी बारिश का असर सरयू नदी में दिखाई देने लगा है। एक बार फिर से घाघरा का जलस्तर तेजी से बढ़कर खतरे के निशान से 40 सेंटीमीटर ऊपर व डिस्चार्ज सात लाख के आसपास पहुंच गया है।
घाघरा में पानी के डिस्चार्ज ने दस वर्षों का रिकार्ड तोड़ दिया है। इस बार नदी का जलस्तर एक मीटर से भी ऊपर जाने को संभावना जताई जा रही है। हालांकि बढ़ते हुए जलस्तर से बांध पर अब तक कोई खतरा नही दिखाई दे रहा है, मगर पानी घटते समय घाघरा अपना रौद्र रूप देखकर तबाही मचा सकती है।
सरयू के कैचमेंट वाले इलाकों में हो रही बरसात के चलते सरयू से जुड़े गिरिजा, शारदा व सरयू बैराज उफान पर है। जिससे इन बैराजों से घाघरा में पानी छोड़े जाने का क्रम लगातार जारी है। घाघरा घाट एल्गिन ब्रिज स्थित केन्द्रीय जल आयोग संस्थान से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार बुधवार सुबह 6 बजे जहां सरयू खतरे के निशान से 25 सेंटीमीटर नीचे थी तो वहीं आठ बजते बजते जल स्तर बढ़कर खतरे के निशान से मात्र एक सेंटीमीटर नीचे रह गया। दस बजे के आंकड़े और चौंकाने वाले थे।
अभियंताओं की कई टीमें बांध की निगरानी में लगाई गयी हैं। बांध नदी के बीच में बसे नकहरा, मांझारायपुर, नैपुरा व परसावल जैसे गांवों के लोग एक बार फिर बांध पर पलायन को मजबूर है। अभी आने वाले कुछ दिन यह समस्या बनी रहेगी। बांध पर मौजूद बाढ़ खण्ड के सहायक अभियंता अमरेश सिंह बताते हैं कि नदी में जलस्तर बढ़ रहा है। जिससे बांध को किसी प्रकार का खतरा नहीं है। उधर एसडीएम हीरालाल का कहना है कि बांध की निगरानी कराने के साथ बांध के आसपास के गांवों में एलर्ट रखा गया है। राजस्व की टीम व बाढ़ चौकियों को एलर्ट कर दिया गया है।
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लाखों हेक्टेयर फसल बाढ़ में डूब गई है और गांवों में भी बाढ़ की स्थिति हो गई है। जिलाधिकारी मार्कंडेय शाही ने दोनों तहसीलों के अधिकारियों को बाढ़ से बचाव के लिए निर्देश दिए हैं और रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने कहा कि नदी के जलस्तर पर पूरी नजर रखी जा रही है।
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करनैलगंज में पहाड़ी नालों के पानी एवं आसपास के जिलों सहित उत्तराखंड में हुई भारी बारिश का असर सरयू नदी में दिखाई देने लगा है। एक बार फिर से सरयू का जलस्तर तेजी से बढ़कर खतरे के निशान से 40 सेंटीमीटर ऊपर हो गया है। डिस्चार्ज सात लाख के आसपास पहुंच गया है।
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वहीं नवाबगंज में सरयू नदी खतरे के निशान को पार करने को बेताब है। खतरे के निशान से महज 68 सेमी नीचे हैं। यहां पर बैराजों से छोड़े गये पानी का असर दिखने लगा है। दोनो तहसीलों के अधिकारियों ने सरयू नदी के तटवर्ती गावों में लोगों से बात किया और उन्हें सतर्क किया। करनैलगंज में बांध का निरीक्षण किया। नदी का जलस्तर बढ़ने से बांध पर भी खतरा बढ़ गया है।
नवाबगंज। लगातार बढ़ रहे जलस्तर से नदी के तटीय इलाकों में पानी फैलने से बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। बुधवार की सुबह सरयू नदी का जलस्तर 92.050 सेमी रहा जो कि खतरे के निशान से करीब 68 सेमीं नीचे था। बैराजों से छोड़े गये 634950 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज होने से नदी का जलस्तर 5 सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ रहा है।
अगर नदी का पानी बढ़ने का यही रफ्तार रहा तो 20 घंटे में सरयू खतरे के निशान से ऊपर बहने लगेगी। जिससे क्षेत्र के दत्तनगर, गोकुला, साखीपुर, तुलसीपुर माझा, मांझा राठ, जैतपुर, महेशपुर, वजीराबाद, दुर्गागंज माझा, दुल्लापुर गांव के कई दर्जन मजरे में बाढ़ का खतरा होगा।
एसडीएम तरबगंज कुलदीप सिंह ने बताया कि प्रशासन बाढ़ के खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। बाढ़ प्रभावित इलाकों के लोगों को एलर्ट कर दिया है। पर्याप्त मात्रा में नाव की व्यवस्था कर दी गई है। बाढ़ राहत चौकियों को सक्रिय कर तीन राहत शिविरों को भी सक्रिय कर दिया गया है। तहसील में कंट्रोल रूम को सक्रिय कर दिया गया है।
पहाड़ी नालों के पानी एवं आसपास के जिलों सहित उत्तराखंड में हुई भारी बारिश का असर सरयू नदी में दिखाई देने लगा है। एक बार फिर से घाघरा का जलस्तर तेजी से बढ़कर खतरे के निशान से 40 सेंटीमीटर ऊपर व डिस्चार्ज सात लाख के आसपास पहुंच गया है।
घाघरा में पानी के डिस्चार्ज ने दस वर्षों का रिकार्ड तोड़ दिया है। इस बार नदी का जलस्तर एक मीटर से भी ऊपर जाने को संभावना जताई जा रही है। हालांकि बढ़ते हुए जलस्तर से बांध पर अब तक कोई खतरा नही दिखाई दे रहा है, मगर पानी घटते समय घाघरा अपना रौद्र रूप देखकर तबाही मचा सकती है।
सरयू के कैचमेंट वाले इलाकों में हो रही बरसात के चलते सरयू से जुड़े गिरिजा, शारदा व सरयू बैराज उफान पर है। जिससे इन बैराजों से घाघरा में पानी छोड़े जाने का क्रम लगातार जारी है। घाघरा घाट एल्गिन ब्रिज स्थित केन्द्रीय जल आयोग संस्थान से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार बुधवार सुबह 6 बजे जहां सरयू खतरे के निशान से 25 सेंटीमीटर नीचे थी तो वहीं आठ बजते बजते जल स्तर बढ़कर खतरे के निशान से मात्र एक सेंटीमीटर नीचे रह गया। दस बजे के आंकड़े और चौंकाने वाले थे।
अभियंताओं की कई टीमें बांध की निगरानी में लगाई गयी हैं। बांध नदी के बीच में बसे नकहरा, मांझारायपुर, नैपुरा व परसावल जैसे गांवों के लोग एक बार फिर बांध पर पलायन को मजबूर है। अभी आने वाले कुछ दिन यह समस्या बनी रहेगी। बांध पर मौजूद बाढ़ खण्ड के सहायक अभियंता अमरेश सिंह बताते हैं कि नदी में जलस्तर बढ़ रहा है। जिससे बांध को किसी प्रकार का खतरा नहीं है। उधर एसडीएम हीरालाल का कहना है कि बांध की निगरानी कराने के साथ बांध के आसपास के गांवों में एलर्ट रखा गया है। राजस्व की टीम व बाढ़ चौकियों को एलर्ट कर दिया गया है।