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मिल के गंदे पानी से फसलें बर्बाद
अमर उजाला/गोंडा
Updated Sat, 29 Apr 2017 10:36 PM IST
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चीनी मिल से निकला गंदा पानी
- फोटो : अमर उजाला
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जिले की चीनी मिलों से निकलने वाला गंदा पानी लोगों, मवेशियों व फसलों के लिए जहर बना हुआ है। अपनी तिजोरी भरने के चक्कर में चीनी मिल मालिकों ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आदेशों को ठेंगा दिखा दिया है। चीनी मिलों से निकलने वाले अपशिष्ट व गंदे पानी से न सिर्फ किसानों की फसलें तबाह हो रही हैं, बल्कि इंसान व जीव जंतुओं के पीने का पानी जहरीला होता जा रहा है। यही वजह है कि हाल में ही नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने जिले के बलरामपुर चीनी मिल्स ग्रुप की दो मिलों पर 15 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
जिले में बीसीएम ग्रुप की मनकापुर दतौली चीनी मिल व बभनान चीनी मिल से निकलने वाला गंदा पानी आसपास के तालाबों व गड्ढों में एकत्र हो रहा है। इससे किसानों की फसलें
तो सूख ही रही हैं, तमाम मवेशियों व जीव-जंतुओं की मौत भी हो जाती है। आसपास के किसानों की ओर से आवाज उठाई जाती है, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं होती है। जबकि मिल के अधिकारियों की ओर से चीनी मिल के पानी को जहरीला मानने से इन्कार किया जाता है।
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बभनान चीनी मिल क्षेत्र के ग्राम महरा गौरा निवासी किसान कल्लू की दो बीघा गन्ने की फसल सूख गई। उसने गांव के फौजदार का खेत बटाई पर लिया था, जिसमें गन्ने की बोआई की थी। उसने गन्ने की फसल की पास के उस तालाब के पानी से सिंचाई कर दी, जिसमें चीनी मिल का गंदा पानी इकट्ठा हो रहा है। इससे फसल लहलहाने के बजाय सूख कर बर्बाद हो गई। किसान के अनुसार उसकी हजारों रुपये की पूंजी बर्बाद हो गई।
पिछले साल मई में मनकापुर चीनी मिल से निकलने वाले गंदे पानी व उससे निकलने वाली जहरीली गैस से कई मवेशी, पक्षी और जीव-जंतुओं की मौत हो गई थी। मनकापुर चीनी मिल के करीब रहने वाले दतौली बनकटी गांव के किसान बृजराज के एक दर्जन सूकरों की मौत हो गई थी। जबकि इसी इलाके में राष्ट्रीय पक्षी मोर, कबूतर व सांप मर गए थे। इस मामले की मनकापुर के तत्कालीन एसडीएम वीके सिंह ने जांच भी की थी।
बभनान चीनी मिल क्षेत्र के ग्राम महरा गौरा निवासी विजय कुमार मिश्रा का कहना है कि चीनी मिल के गंदे पानी से उनका तीन बीघा गेहूं सूख गया था। बताया कि गांव के चार अन्य किसानों की भी करीब आठ बीघा गेहूं की फसल चीनी मिल के पानी से सूख गई थी। किसानों ने चीनी मिल अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन कोई देखने व मुआवजा देने के लिए नहीं आया। किसानों का आरोप है कि पिछले साल भी किसानों के गेहूं की फसल खराब हो गई थी काफी हल्ला होने पर मिल की ओर से कुछ किसानों को थोड़े-बहुत पैसे देकर चुप करा दिया गया था।
प्रशासनिक अधिकारी बभनान चीनी मिल बेचन सिंह ने कहा कि बभनान चीनी मिल में अपशिष्ट निस्तारण का प्लांट लगा है। कुछ किसानों की ओर से तालाब के पानी की सिंचाई के बाद फसल सूखने की बात कही जा रही है, लेकिन चीनी मिल का कोई लेना-देना नहीं है। एनजीटी ने उन्हें भूजल निकालने के लिए लाइसेंस न लेने पर जुर्माना किया है, लेकिन उसके लिए मिल ने पहले आवेदन किया था। लाइसेंस मिलने में देरी हुई, इससे जुर्माना हो गया।
चीफ मैनेजर मनकापुर चीनी मिल वीके सिंह ने कहा कि चीनी मिल से निकलने वाले पानी व अवशिष्ट के समाधान के लिए चीनी मिल में बड़ा प्लांट लगाया जा चुका है। एनजीटी की ओर से की गई कार्रवाई पुराने मामले में की गई है।
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जिले में बीसीएम ग्रुप की मनकापुर दतौली चीनी मिल व बभनान चीनी मिल से निकलने वाला गंदा पानी आसपास के तालाबों व गड्ढों में एकत्र हो रहा है। इससे किसानों की फसलें
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तो सूख ही रही हैं, तमाम मवेशियों व जीव-जंतुओं की मौत भी हो जाती है। आसपास के किसानों की ओर से आवाज उठाई जाती है, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं होती है। जबकि मिल के अधिकारियों की ओर से चीनी मिल के पानी को जहरीला मानने से इन्कार किया जाता है।
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बभनान चीनी मिल क्षेत्र के ग्राम महरा गौरा निवासी किसान कल्लू की दो बीघा गन्ने की फसल सूख गई। उसने गांव के फौजदार का खेत बटाई पर लिया था, जिसमें गन्ने की बोआई की थी। उसने गन्ने की फसल की पास के उस तालाब के पानी से सिंचाई कर दी, जिसमें चीनी मिल का गंदा पानी इकट्ठा हो रहा है। इससे फसल लहलहाने के बजाय सूख कर बर्बाद हो गई। किसान के अनुसार उसकी हजारों रुपये की पूंजी बर्बाद हो गई।
पिछले साल मई में मनकापुर चीनी मिल से निकलने वाले गंदे पानी व उससे निकलने वाली जहरीली गैस से कई मवेशी, पक्षी और जीव-जंतुओं की मौत हो गई थी। मनकापुर चीनी मिल के करीब रहने वाले दतौली बनकटी गांव के किसान बृजराज के एक दर्जन सूकरों की मौत हो गई थी। जबकि इसी इलाके में राष्ट्रीय पक्षी मोर, कबूतर व सांप मर गए थे। इस मामले की मनकापुर के तत्कालीन एसडीएम वीके सिंह ने जांच भी की थी।
बभनान चीनी मिल क्षेत्र के ग्राम महरा गौरा निवासी विजय कुमार मिश्रा का कहना है कि चीनी मिल के गंदे पानी से उनका तीन बीघा गेहूं सूख गया था। बताया कि गांव के चार अन्य किसानों की भी करीब आठ बीघा गेहूं की फसल चीनी मिल के पानी से सूख गई थी। किसानों ने चीनी मिल अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन कोई देखने व मुआवजा देने के लिए नहीं आया। किसानों का आरोप है कि पिछले साल भी किसानों के गेहूं की फसल खराब हो गई थी काफी हल्ला होने पर मिल की ओर से कुछ किसानों को थोड़े-बहुत पैसे देकर चुप करा दिया गया था।
प्रशासनिक अधिकारी बभनान चीनी मिल बेचन सिंह ने कहा कि बभनान चीनी मिल में अपशिष्ट निस्तारण का प्लांट लगा है। कुछ किसानों की ओर से तालाब के पानी की सिंचाई के बाद फसल सूखने की बात कही जा रही है, लेकिन चीनी मिल का कोई लेना-देना नहीं है। एनजीटी ने उन्हें भूजल निकालने के लिए लाइसेंस न लेने पर जुर्माना किया है, लेकिन उसके लिए मिल ने पहले आवेदन किया था। लाइसेंस मिलने में देरी हुई, इससे जुर्माना हो गया।
चीफ मैनेजर मनकापुर चीनी मिल वीके सिंह ने कहा कि चीनी मिल से निकलने वाले पानी व अवशिष्ट के समाधान के लिए चीनी मिल में बड़ा प्लांट लगाया जा चुका है। एनजीटी की ओर से की गई कार्रवाई पुराने मामले में की गई है।