{"_id":"579cdb414f1c1bab0b21e1a9","slug":"child-steeped-in-flood-waters","type":"story","status":"publish","title_hn":"बाढ़ के पानी में बच्ची डूबी ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बाढ़ के पानी में बच्ची डूबी
अमर उजाला/बलरामपुर
Updated Sat, 30 Jul 2016 10:22 PM IST
विज्ञापन
सड़क पर डेरा डाले ग्रामीण
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिले में बाढ़ के हालात बदतर होते जा रहे हैं। बाढ़ प्रभावित लोग भूख व प्यास से परेशान हैं। प्रशासनिक राहत कुछ लोगों तक ही पहुंच पा रही है। इससे लोगों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। बाढ़ प्रभावित गांव के लोग मरीजों को चारपाई पर लादकर अस्पताल पहुंचा रहे हैं। वहीं, शनिवार को एक मासूम की बाढ़ के पानी में डूबकर मौत हो गई।
राप्ती नदी के जलस्तर में शनिवार को मामूली कमी दर्ज की गई। नदी अभी भी खतरे के निशान से 55 सेमी ऊपर 105.170 मीटर पर बह रही है। बाढ़ से जिले के 250 गांव बुरी तरह प्रभावित हैं। प्रशासन भी 229 गांव बाढ़ से प्रभावित होने का दावा कर रहा है।
बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए एनडीआरएफ की 35 सदस्यीय टीम प्रभावित क्षेत्रों में उतारी गई है। 67 गांवों के लोगों के घरों में अभी भी पानी भरा हुआ है। तुलसीपुर तहसील का सड़क मार्ग से संपर्क कटा हुआ है। पुलिस सभी रास्तों पर 24 घंटे निगरानी कर रही है।
विज्ञापन
उधर, देहात थाना क्षेत्र के दुर्गापुर गांव में शनिवार को घर के सामने खेल रही संतोष कुमार की बेटी रित्ति (3) अचानक बाढ़ के पानी में डूब गई। परिवारीजनों तथा ग्रामीणों ने शव को पानी से बाहर निकाला। शुक्रवार को बाढ़ के पानी में बहे मदरहवा निवासी युवक राजकरन तथा बिजलीपुर की तीन वर्षीय मासूम आराध्या उर्फ गुड़िया का शनिवार को भी कोई पता नहीं चल सका है।
बाढ़ का सबसे ज्यादा असर उतरौला तहसील क्षेत्र में हैं। यहां पर प्रशासनिक मदद न मिलने के चलते मोहनजोत, बिरदा बनिया भारी व मिलौली बाघाजोत आदि गांवों के बाढ़ पीड़ितों ने प्रशासन पर मदद न पहुंचाने का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया।
डीएम बलरामपुर प्रीति शुक्ला का कहना है कि बाढ़ से जिले के 67 गांवों में पानी भरा है। 162 गांव बाढ़ के पानी से घिरकर टापू बन गए हैं। बाढ़ से करीब चार लाख आबादी प्रभावित है। राहत व बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ तथा सुरक्षा बलों के साथ-साथ राजस्व अधिकारी व कर्मी लगाए गए हैं। शनिवार को 40 हजार लंच पैकेट वितरित किए गए। छह स्थानों पर कैंप लगाकर बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के मरीजों का इलाज किया जा रहा है।
विज्ञापन
राप्ती नदी के जलस्तर में शनिवार को मामूली कमी दर्ज की गई। नदी अभी भी खतरे के निशान से 55 सेमी ऊपर 105.170 मीटर पर बह रही है। बाढ़ से जिले के 250 गांव बुरी तरह प्रभावित हैं। प्रशासन भी 229 गांव बाढ़ से प्रभावित होने का दावा कर रहा है।
विज्ञापन
बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए एनडीआरएफ की 35 सदस्यीय टीम प्रभावित क्षेत्रों में उतारी गई है। 67 गांवों के लोगों के घरों में अभी भी पानी भरा हुआ है। तुलसीपुर तहसील का सड़क मार्ग से संपर्क कटा हुआ है। पुलिस सभी रास्तों पर 24 घंटे निगरानी कर रही है।
विज्ञापन
उधर, देहात थाना क्षेत्र के दुर्गापुर गांव में शनिवार को घर के सामने खेल रही संतोष कुमार की बेटी रित्ति (3) अचानक बाढ़ के पानी में डूब गई। परिवारीजनों तथा ग्रामीणों ने शव को पानी से बाहर निकाला। शुक्रवार को बाढ़ के पानी में बहे मदरहवा निवासी युवक राजकरन तथा बिजलीपुर की तीन वर्षीय मासूम आराध्या उर्फ गुड़िया का शनिवार को भी कोई पता नहीं चल सका है।
बाढ़ का सबसे ज्यादा असर उतरौला तहसील क्षेत्र में हैं। यहां पर प्रशासनिक मदद न मिलने के चलते मोहनजोत, बिरदा बनिया भारी व मिलौली बाघाजोत आदि गांवों के बाढ़ पीड़ितों ने प्रशासन पर मदद न पहुंचाने का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया।
डीएम बलरामपुर प्रीति शुक्ला का कहना है कि बाढ़ से जिले के 67 गांवों में पानी भरा है। 162 गांव बाढ़ के पानी से घिरकर टापू बन गए हैं। बाढ़ से करीब चार लाख आबादी प्रभावित है। राहत व बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ तथा सुरक्षा बलों के साथ-साथ राजस्व अधिकारी व कर्मी लगाए गए हैं। शनिवार को 40 हजार लंच पैकेट वितरित किए गए। छह स्थानों पर कैंप लगाकर बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के मरीजों का इलाज किया जा रहा है।