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मॉडल बाल वाटिका बनेंगे जिले के 16 आंगनबाड़ी केंद्र
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गोंडा। प्री-प्राइमरी से जनपद में संचालित को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों में अब कई सुविधाएं मिलेंगी। इसके लिए केंद्रों की रिपोर्ट तैयार हो रही है। 16 ब्लॉकों में एक-एक आंगनबाड़ी केंद्रों को मॉडल बाल वाटिका के रूप में विकसित करने की तैयारी हो रही है। जिले के तीन हजार आंगनबाड़ी केंद्रों में नए सत्र से प्री-एजूकेशन देने की तैयारी पिछले साल से ही हो रही है। इसके लिए कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण हो चुका है।
जिले के सभी विकास खंडों में चिह्नित एक-एक आंगनबाड़ी केंद्र को मॉडल बाल वाटिका के तौर पर विकसित किया जाएगा। इन केंद्रों को हर तरह की सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। इन्हें संचालित योजनाओं से शत प्रतिशत लाभान्वित किया जाएगा। कायाकल्प भी इसी तर्ज पर होगा। आंगनबाड़ी केंद्र को मॉडल बाल वाटिका के रूप में विकसित करने के लिए सत्यापन कर रिपोर्ट मांगी गई है। प्री-प्राइमरी से जनपद में संचालित को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए बजट के प्रस्तावित करने के सापेक्ष सत्यापन किया गया है। उन विद्यालयों को चुना जाना हैं, जिनके परिसर में ही आंगनबाड़ी केंद्र भी संचालित हैं। प्रत्येक ब्लॉक के लिए एक विद्यालय चिह्नित करने के लिए जिसको कि मॉडल बाल वाटिका के रूप में विकसित किया जाए।
बेसिक स्कूलों में प्रवेश के लिए तैयार होंगे अब बच्चे
बेसिक स्कूलों में प्रवेश के लिए अभी तक आंगनबाड़ी केंद्रों को सीधे नहीं जोड़ा गया था। अब प्री- एजूकेशन शुरू होने से आंगनबाड़ी केंद्रों से ही बच्चे प्राइमरी स्कूलों में प्रवेश के लिए तैयार रहेंगे। हर साल केंद्रों के माध्यम से 30 से 40 हजार बच्चों का प्रवेश आसानी से हो सकेगा। इसके अलावा अन्य कक्षाओं के शिक्षक गांवों में जागरूकता अभियान व नामांकन अभियान चलाएंगे। बेसिक शिक्षा में हर साल 10 फीसदी अधिक प्रवेश का लक्ष्य तय होता है। प्री-एजूकेशन की पहल होने से प्रवेश के लिए तय लक्ष्य आसानी से हासिल हो सकेगा।
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बेसिक स्कूलों से जोड़कर आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों को कक्षा एक में प्रवेश के स्तर तक की शिक्षा देने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ताओं को प्रशिक्षित किया गया है। रामप्रताप सिंह, बीएसए
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जिले के सभी विकास खंडों में चिह्नित एक-एक आंगनबाड़ी केंद्र को मॉडल बाल वाटिका के तौर पर विकसित किया जाएगा। इन केंद्रों को हर तरह की सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। इन्हें संचालित योजनाओं से शत प्रतिशत लाभान्वित किया जाएगा। कायाकल्प भी इसी तर्ज पर होगा। आंगनबाड़ी केंद्र को मॉडल बाल वाटिका के रूप में विकसित करने के लिए सत्यापन कर रिपोर्ट मांगी गई है। प्री-प्राइमरी से जनपद में संचालित को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए बजट के प्रस्तावित करने के सापेक्ष सत्यापन किया गया है। उन विद्यालयों को चुना जाना हैं, जिनके परिसर में ही आंगनबाड़ी केंद्र भी संचालित हैं। प्रत्येक ब्लॉक के लिए एक विद्यालय चिह्नित करने के लिए जिसको कि मॉडल बाल वाटिका के रूप में विकसित किया जाए।
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बेसिक स्कूलों में प्रवेश के लिए तैयार होंगे अब बच्चे
बेसिक स्कूलों में प्रवेश के लिए अभी तक आंगनबाड़ी केंद्रों को सीधे नहीं जोड़ा गया था। अब प्री- एजूकेशन शुरू होने से आंगनबाड़ी केंद्रों से ही बच्चे प्राइमरी स्कूलों में प्रवेश के लिए तैयार रहेंगे। हर साल केंद्रों के माध्यम से 30 से 40 हजार बच्चों का प्रवेश आसानी से हो सकेगा। इसके अलावा अन्य कक्षाओं के शिक्षक गांवों में जागरूकता अभियान व नामांकन अभियान चलाएंगे। बेसिक शिक्षा में हर साल 10 फीसदी अधिक प्रवेश का लक्ष्य तय होता है। प्री-एजूकेशन की पहल होने से प्रवेश के लिए तय लक्ष्य आसानी से हासिल हो सकेगा।
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बेसिक स्कूलों से जोड़कर आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों को कक्षा एक में प्रवेश के स्तर तक की शिक्षा देने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ताओं को प्रशिक्षित किया गया है। रामप्रताप सिंह, बीएसए