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बहुचर्चित फर्जी शिक्षिका मामले में असली अनामिका ने पेश किए दस्तावेज
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09द्दस्रड्डश्च7- गोंडा में अनामिका शुक्ला अपने पति व बच्चे के साथ।
- फोटो : GONDA
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गोंडा। प्रदेश के नौ जिलों में अनामिका शुक्ला के नाम से कस्तूरबा बालिका आवासीय स्कूलों में विज्ञान शिक्षिका के पद पर महिलाएं कार्य कर रहीं थीं। शासन स्तर से हुई जांच में इनके करीब 12 लाख रुपये मानदेय लेने की बात भी सामने आई। अनामिका शुक्ला के अभिलेखों की पड़ताल करते हुए रविवार के अंक में अमर उजाला ने रिपोर्ट प्रकाशित की थी। मंगलवार को पढ़ाई के समय अनामिका की ओर से दिए पते की जानकारी देते हुए खबर छापी थी। इसके बाद असली अनामिका शुक्ला को पता चला कि यह मामला उनसे जुड़ा है। अनामिका ने अमर उजाला से कहा कि उन्हें नहीं पता था कि यह मामला उनसे जुड़ा है, खबर में लिखा पता देख कर वह चौंक गयीं। उन्होंने जिन जिलों में आवेदन ही नहीं किया था, वहां भी नियुक्ति हो गई।
अनामिका शुक्ला की ओर से पेश किए गये शैक्षिक अभिलेखों के साथ ही उन्होंने निवास प्रमाण पत्र भी दिया। अनामिका ने वर्ष 2017 में आवेदन के लिए निवास प्रमाण पत्र ऑनलाइन बनवाया था। जिसमें उन्होंने अपने पिता के नाम की जगह पर पति दुर्गेश का नाम दर्शाया है, जबकि अन्य जिलों में आवेदन के समय लगाए गये निवास प्रमाण पत्रों में पिता का ही नाम दर्ज है। बीएसए ने निदेशालय से आए अभिलेखों में निवास प्रमाण पत्र मिलाया तो यह हेराफेरी सामने आई। अनामिका ने कहा कि शादी के बाद उसने आवेदन किया था तो निवास में पति का ही नाम लिखवाया था।
अनामिका ने कहा कि एक तो वह इतना अखबार ही नहीं पढ़ती हैं, दूसरे अनामिका शुक्ला वही हो सकती हैं उन्हें एहसास ही नहीं था। फिर जिन जिलों की बात आ रही थी वहां उन्होंने आवेदन ही नहीं किया था। रविवार को जो खबर अमर उजाला में छपी उसमें पता नहीं चला लेकिन मंगलवार को उनके घर का पता लिखा था जहां पढ़ाई दौरान वह रहती थी। तब उन्हें झटका लगा, कई फोन भी आने लगे कि यह अनामिका वाला मामला आपका ही है अखबार में छपा है।
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अनामिका शुक्ला की मेरिट हाई थी और उन्होंने पांच जिलों में वर्ष 2017 में कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूल में विज्ञान शिक्षिका के लिए आवेदन किया था। उन्होंने सुल्तानपुर, जौनपुर, बस्ती, मिर्जापुर, लखनऊ जिलों में आवेदन किया था। काउंसिलिंग का समय आया तो वह उसमें शामिल नहीं हो सकीं। उस समय उन्होंने ऑपरेशन से बेटी ने जन्म दिया था और वर्ष 2019 में बेटे का जन्म हो गया। दो छोटे बच्चे होने के कारण नौकरी करने में समर्थ नहीं थी।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. इन्द्रजीत प्रजापति ने जब अनामिका शुक्ला से पूरा हाल जाना तो वह अवाक रह गये। अनामिका शुक्ला ने कभी कहीं मूल अभिलेख नहीं दिए और न ही काउंसिलिंग कराई। ऐसे में जिन नौ जिलों में नियुक्तियां कैसे हो गईं।
प्रदेश में अनामिका शुक्ला के मामले की पड़ताल के दौरान अमर उजाला को पिता का नाम पता चला और टीसी से पते की जानकारी हुई। इसके बाद वहां लोगों ने उनके रेलवे में नौकरी करने की जानकारी दी। रेलवे में पता किया गया तो पता चला कि पिता सुभाष चंद्र शुक्ल 29 नवम्बर 2015 में रिटायर हो गये हैं। उनसे अमर उजाला ने बात की तो वह अखबार ही पढ़ रहे थे। इसके बाद उन्होंने बेटी को उसके पति के साथ सभी अभिलेख लेकर भेजा।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को जानकारी देते हुए अनामिका भावुक भी हो गईं। उन्होंने कहा कि दो बच्चों को वह पाल रही हैं और पांच जिलों में आवेदन किया, लेकिन पारिवारिक व व्यक्तिगत समस्या के चलते वह नौकरी नहीं कर पाईं। इसके बाद इतनी चर्चा उन्हीं के नाम की पूरे प्रदेश में हो गई। आज सारी खबर पढ़कर बहुत ही मन दुखी हुआ। असली अनामिका शुक्ला ने प्रदेश सरकार पर पूरा भरोसा जताया। अमर उजाला का आभार जताया कि अगर पते के साथ खबर नहीं आती तो कभी जान ही पाती कि यह अनामिका शुक्ला कोई और नहीं वही हैं। उन्होंने कहा कि अखबार ने सही तथ्य निकाल कर हमें राह दिखाई। इसके साथ ही प्रदेश सरकार पर भरोसा जताया कि जिस तरह फर्जी करने वाले पकड़े जा रहे हैं, वह सराहनीय है। सरकार गंभीर है, और फर्जीवाड़ा करने वाले बचेंगे नहीं।
मंगलवार को गोंडा बीएसए कार्यालय में अपनी पत्रावली व प्रत्यावेदन देने के बाद अनामिका शुक्ला ने पूरे मामले के खुलासे के लिए मुख्यमंत्री व डीआईजी को प्रार्थना पत्र दिया है। अनामिका ने बताया कि सीएम व डीआईजी को रजिस्टर्ड डाक से पत्र भेजा गया है कि जिससे उनके नाम व फर्जी अभिलेख पर नौकरी करने वालों व जालसाजों को सजा मिल सके।
अनामिका शुक्ला प्रकरण में मंगलवार को अनामिका शुक्ला ने मेरे दफ्तर आकर अपना पक्ष रखा और पूरी पत्रावली व प्रत्यावेदन दिया है। पूरी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है।
- डॉ. इंद्रजीत प्रजापति, बीएसए गोंडा
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अनामिका शुक्ला की ओर से पेश किए गये शैक्षिक अभिलेखों के साथ ही उन्होंने निवास प्रमाण पत्र भी दिया। अनामिका ने वर्ष 2017 में आवेदन के लिए निवास प्रमाण पत्र ऑनलाइन बनवाया था। जिसमें उन्होंने अपने पिता के नाम की जगह पर पति दुर्गेश का नाम दर्शाया है, जबकि अन्य जिलों में आवेदन के समय लगाए गये निवास प्रमाण पत्रों में पिता का ही नाम दर्ज है। बीएसए ने निदेशालय से आए अभिलेखों में निवास प्रमाण पत्र मिलाया तो यह हेराफेरी सामने आई। अनामिका ने कहा कि शादी के बाद उसने आवेदन किया था तो निवास में पति का ही नाम लिखवाया था।
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अनामिका ने कहा कि एक तो वह इतना अखबार ही नहीं पढ़ती हैं, दूसरे अनामिका शुक्ला वही हो सकती हैं उन्हें एहसास ही नहीं था। फिर जिन जिलों की बात आ रही थी वहां उन्होंने आवेदन ही नहीं किया था। रविवार को जो खबर अमर उजाला में छपी उसमें पता नहीं चला लेकिन मंगलवार को उनके घर का पता लिखा था जहां पढ़ाई दौरान वह रहती थी। तब उन्हें झटका लगा, कई फोन भी आने लगे कि यह अनामिका वाला मामला आपका ही है अखबार में छपा है।
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अनामिका शुक्ला की मेरिट हाई थी और उन्होंने पांच जिलों में वर्ष 2017 में कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूल में विज्ञान शिक्षिका के लिए आवेदन किया था। उन्होंने सुल्तानपुर, जौनपुर, बस्ती, मिर्जापुर, लखनऊ जिलों में आवेदन किया था। काउंसिलिंग का समय आया तो वह उसमें शामिल नहीं हो सकीं। उस समय उन्होंने ऑपरेशन से बेटी ने जन्म दिया था और वर्ष 2019 में बेटे का जन्म हो गया। दो छोटे बच्चे होने के कारण नौकरी करने में समर्थ नहीं थी।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. इन्द्रजीत प्रजापति ने जब अनामिका शुक्ला से पूरा हाल जाना तो वह अवाक रह गये। अनामिका शुक्ला ने कभी कहीं मूल अभिलेख नहीं दिए और न ही काउंसिलिंग कराई। ऐसे में जिन नौ जिलों में नियुक्तियां कैसे हो गईं।
प्रदेश में अनामिका शुक्ला के मामले की पड़ताल के दौरान अमर उजाला को पिता का नाम पता चला और टीसी से पते की जानकारी हुई। इसके बाद वहां लोगों ने उनके रेलवे में नौकरी करने की जानकारी दी। रेलवे में पता किया गया तो पता चला कि पिता सुभाष चंद्र शुक्ल 29 नवम्बर 2015 में रिटायर हो गये हैं। उनसे अमर उजाला ने बात की तो वह अखबार ही पढ़ रहे थे। इसके बाद उन्होंने बेटी को उसके पति के साथ सभी अभिलेख लेकर भेजा।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को जानकारी देते हुए अनामिका भावुक भी हो गईं। उन्होंने कहा कि दो बच्चों को वह पाल रही हैं और पांच जिलों में आवेदन किया, लेकिन पारिवारिक व व्यक्तिगत समस्या के चलते वह नौकरी नहीं कर पाईं। इसके बाद इतनी चर्चा उन्हीं के नाम की पूरे प्रदेश में हो गई। आज सारी खबर पढ़कर बहुत ही मन दुखी हुआ। असली अनामिका शुक्ला ने प्रदेश सरकार पर पूरा भरोसा जताया। अमर उजाला का आभार जताया कि अगर पते के साथ खबर नहीं आती तो कभी जान ही पाती कि यह अनामिका शुक्ला कोई और नहीं वही हैं। उन्होंने कहा कि अखबार ने सही तथ्य निकाल कर हमें राह दिखाई। इसके साथ ही प्रदेश सरकार पर भरोसा जताया कि जिस तरह फर्जी करने वाले पकड़े जा रहे हैं, वह सराहनीय है। सरकार गंभीर है, और फर्जीवाड़ा करने वाले बचेंगे नहीं।
मंगलवार को गोंडा बीएसए कार्यालय में अपनी पत्रावली व प्रत्यावेदन देने के बाद अनामिका शुक्ला ने पूरे मामले के खुलासे के लिए मुख्यमंत्री व डीआईजी को प्रार्थना पत्र दिया है। अनामिका ने बताया कि सीएम व डीआईजी को रजिस्टर्ड डाक से पत्र भेजा गया है कि जिससे उनके नाम व फर्जी अभिलेख पर नौकरी करने वालों व जालसाजों को सजा मिल सके।
अनामिका शुक्ला प्रकरण में मंगलवार को अनामिका शुक्ला ने मेरे दफ्तर आकर अपना पक्ष रखा और पूरी पत्रावली व प्रत्यावेदन दिया है। पूरी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है।
- डॉ. इंद्रजीत प्रजापति, बीएसए गोंडा