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कागजों में सिमट कर रह गयी कृषि रक्षा इकाइयां
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गोंडा। किसानों के फसलों को कीटों व अन्य रोगों से बचाने के लिए कीटनाशक दवाओं व सस्ते कृषि यंत्रों को मुहैया कराए जाने के लिए ब्लॉकों पर बनी कृषि रक्षा इकाइयां सिर्फ कागजों में सिमट कर रह गई हैं।
सरकार द्वारा अन्नदाताओं की सुविधाओं के उद्देश्य से संचालित किए जाने वाले कृषि रक्षा इकाई केंद्र विभागीय उदासीनता की भेंट चढ़ गए है। इन केंद्रों का हाल यह है कि न तो इनमें कीटनाशक दवाएं उपलब्ध हैं और न ही कोई कर्मचारी तैनात है। ऐसे में बेबस किसान निजी दुकानों से उपयोगी चीजें लेने को मजबूर हैं।
कृषि अधिकारी भले ही कृषि रक्षा इकाइयों के संचालित होने की बात कर रहे हों लेकिन अन्नदाताओं को इन केंद्रों पर निराशा ही मिलती है। उमरी बेगमगंज निवासी किसान उदयभान ने बताया कि उन्हें इन इकाइयों पर कभी सस्ते दरों पर रसायन नहीं मिले। वो बाजार से खरीदकर ही फसलों में छिड़काव करते हैं।
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ग्राम पंचायत बरोली के किसान आशिक अली का कहना है कि कृषि रक्षा इकाइयों का संचालन सिर्फ सरकारी लेखा-जोखा तक ही सीमित रह गया। यहां आने वाले किसानों को मायूस होकर ही लौटना पड़ता है, न तो इसके दरवाजे खुलते हैं, न ही कीटनाशक दवाएं मिलती हैं।
हमने आलू की बीज भी बाजार से खरीदकर बोया है। किसान वारिस अली का कहना है कि केंद्रों पर न ही बीज मिलता न रसायन। इसके चलते किसानों की फसलें रोगग्रस्त होकर बर्बाद हो रही हैं।
पिछले साल बीज मिला था, लेकिन उसकी सब्सिडी नहीं आयी। चांदपुर के शुक्लागंज निवासी किसान सुरेंद्र ने बताया कि कृषि रक्षा इकाइयों पर पिछले कई वर्षों से रसायन नहीं मिल रहा है। उन्हें पिछले साल भी केंद्र पर रसायन व बीज नहीं मिला था।
जिला कृषि अधिकारी जगदीश यादव ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के अभियान में फसलों को कीट रोगों से बचाने की सबसे अहम जरूरत है। इसके लिए विभाग द्वारा कृषि रक्षा रसायन व यंत्र अनुदान पर उपलब्ध कराया जा रहा है। योजनाओं के लाभ के लिए कृषि विभाग की वेबसाइट पर पंजीकरण कराएं। ब्लॉकों में स्थित कृषि रक्षा इकाइयों पर तैनात अधिकारी किसानों की समस्याओं का समाधान कर रहे हैं।
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सरकार द्वारा अन्नदाताओं की सुविधाओं के उद्देश्य से संचालित किए जाने वाले कृषि रक्षा इकाई केंद्र विभागीय उदासीनता की भेंट चढ़ गए है। इन केंद्रों का हाल यह है कि न तो इनमें कीटनाशक दवाएं उपलब्ध हैं और न ही कोई कर्मचारी तैनात है। ऐसे में बेबस किसान निजी दुकानों से उपयोगी चीजें लेने को मजबूर हैं।
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कृषि अधिकारी भले ही कृषि रक्षा इकाइयों के संचालित होने की बात कर रहे हों लेकिन अन्नदाताओं को इन केंद्रों पर निराशा ही मिलती है। उमरी बेगमगंज निवासी किसान उदयभान ने बताया कि उन्हें इन इकाइयों पर कभी सस्ते दरों पर रसायन नहीं मिले। वो बाजार से खरीदकर ही फसलों में छिड़काव करते हैं।
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ग्राम पंचायत बरोली के किसान आशिक अली का कहना है कि कृषि रक्षा इकाइयों का संचालन सिर्फ सरकारी लेखा-जोखा तक ही सीमित रह गया। यहां आने वाले किसानों को मायूस होकर ही लौटना पड़ता है, न तो इसके दरवाजे खुलते हैं, न ही कीटनाशक दवाएं मिलती हैं।
हमने आलू की बीज भी बाजार से खरीदकर बोया है। किसान वारिस अली का कहना है कि केंद्रों पर न ही बीज मिलता न रसायन। इसके चलते किसानों की फसलें रोगग्रस्त होकर बर्बाद हो रही हैं।
पिछले साल बीज मिला था, लेकिन उसकी सब्सिडी नहीं आयी। चांदपुर के शुक्लागंज निवासी किसान सुरेंद्र ने बताया कि कृषि रक्षा इकाइयों पर पिछले कई वर्षों से रसायन नहीं मिल रहा है। उन्हें पिछले साल भी केंद्र पर रसायन व बीज नहीं मिला था।
जिला कृषि अधिकारी जगदीश यादव ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के अभियान में फसलों को कीट रोगों से बचाने की सबसे अहम जरूरत है। इसके लिए विभाग द्वारा कृषि रक्षा रसायन व यंत्र अनुदान पर उपलब्ध कराया जा रहा है। योजनाओं के लाभ के लिए कृषि विभाग की वेबसाइट पर पंजीकरण कराएं। ब्लॉकों में स्थित कृषि रक्षा इकाइयों पर तैनात अधिकारी किसानों की समस्याओं का समाधान कर रहे हैं।