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किसानों के साथ हुआ भद्दा मजाक, किसी का 35 तो किसी का 100 रुपए हुआ माफ

Thu, 14 Sep 2017 12:04 AM IST
Updated Thu, 14 Sep 2017 12:04 AM IST
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किसानों के साथ हुआ भद्दा मजाक, किसी का 35 तो किसी का 100 रुपए हुआ माफ
किसी का 36 पैसे तो किसी का 100 रुपये हुआ माफ
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बोले अन्नदाता, हमारे साथ मजाक किया सरकार ने
अमर उजाला ब्यूरो
गोंडा। जिले के एक सभागार में आयोजित ऋण समारोह में कहीं खुशी तो कहीं कम का नजारा दिखा। वर्षों से कर्ज के बोझ से दबे लोगों को जब ऋण मुक्ति का प्रमाणपत्र मिला तो उनके चेहरे खिल गए, लेकिन इस भीड़ में कुछ किसान ऐसे थे जिनके साथ सरकार ने माफी के नाम पर मजाक किया। किसी का सिर्फ 36 पैसे माफ किया तो किसी का सौ रुपया।

ऋण मोचन समारोह में जब किसानों के हाथ प्रमाणपत्र मिला तो कुछ किसानों को गहरा आघात लगा। वजीरगंज के रसूलपुर निवासी किसान शंकर की आंखें छलक आईं। उसने बताया कि उसका 54 हजार कर्ज था, लेकिन पढ़े लिखे लोग बता रहे हैं कि उसके प्रमाणपत्र में सिर्फ 653 रुपया सिर्फ माफ हुआ है। उसने कई लोगों को प्रमाणपत्र दिखाया, लेकिन सबने जो लिखा था वही बताया तो वह दुखी हो गया। इसी तरह खम्हिरया बुजुर्ग निवासी शिवपूजन का सिर्फ 232 माफ हुआ है जो प्रमाणपत्र लेने नहीं आया। यही नहीं महेश नामक एक किसान का सिर्फ 100 रुपये तथा तरबगंज के किसान अशोक मौर्या का सिर्फ 36 पैसा बकाया माफ हुआ है।
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बाक्स
किसानों से जबरन लगवाये नारे
मंच पर एक लाख कर्ज माफी वाले करीब दो दर्जन किसानों को बुलाकर प्रमाणपत्र दिया और उनसे केंद्र सरकार एवं प्रदेश सरकार के जयकारे लगवाए गए। साथ ही आह्वान किया गया कि जिस तरह से सरकार ने अपना वायदा पूरा किया है, चुनाव में गोंडा के किसान भी अहसान का बदला उतारें।
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इनसेट
उम्मीद पर गिरा पानी तो नहीं आए
ऋण मोचन समारोह में गांव गिराव से आए किसानों को जब प्रमाणपत्र वितरण शुरू हुआ तो तमाम किसान जिनका बकाया काफी था लेकिन कर्ज माफ नाममात्र हुए, वे खोजे नहीं मिले। प्रमाणपत्र देने के लिए कर्मचारी किसानों को खोजते रहे लेकिन वे नजर नहीं आए।

इनसेट
बूढ़ी आंखों में भी साकार होता दिखा कर्ज से मुक्ति का सपना
ऋण मोचन समारोह में कुछ किसान ऐसे भी आए थे जिनके पोपले गालो एवं बूढ़ी हो चुकी आंखों में कर्ज से मुक्ति पाने का सपना साकार होता दिखा। पूरे भाषण के दौरान ऐसे किसान नेताओं की बातों को टकटकी लगाए सुनते रहे। बीच-बीच में वह ऊंघते तो कभी अचानक जागकर भाषण जल्दी खत्म करने की प्रार्थना करते भी दिखे। गांव गिरांव से लंबी यात्रा कर आए तमाम किसान राह की थकावट के चलते ऊँघते हुए भी नजर आए। बुदबुदाते हुए यह किसान यही प्रार्थना कर रहे थे कि हे भगवान उनका पूरा कर्ज माफ हो जाए।
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