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घाघरा उफनाई, जल स्तर बढ़ने से दहशत में ग्रामीण
Updated Mon, 16 Jul 2018 01:16 AM IST
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घाघरा लाल निशान पार, 500 बीघा जमीन कटी
गोंडा। घाघरा के बढ़ते जलस्तर ने रविवार को खतरे के निशान को पार कर दिया। मैदानी इलाकों में घाघरा की कटान से पांच सौ बीघा फसलों से लहलहाती भूमि नदी की धारा में समाहित हो चुकी है।
एल्गिन चरसड़ी बांध व नदी की धारा के बीच बसे चरपुरवा का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। नदी की कटान की जद में आए इस पुरवा में लोगों के लिए संकट खड़ा हो गया है। चरपुरवा के 100 से अधिक परिवार के लोगों ने घाघरा के बढ़ते जल स्तर को देखकर डरवश अपने आशियाना छोड़कर तटबंध पर शरण ले ली है।
घाघरा नदी ने पिछले 24 घंटे में करीब 5 सौ बीघे से अधिक भूमि काटकर समाहित कर लिया और नदी की धारा गांव की ओर रुख करती जा रही है। पहाड़ी नालों के माध्यम से घाघरा में आने वाले बरसात के पानी ने अब मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।
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शनिवार को घाघरा का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 6 इंच नीचे था, जो रविवार को बढ़कर खतरे के निशान 106.07 के सापेक्ष 106.066 पर पहुंच गया। जिससे नदी खतरे के निशान को पार कर करीब 2 सेंटीमीटर ऊपर बहने लगी है।
रविवार को बांध पर बचाव कार्य तेजी से चल रहा था, आधे अधूरे नवनिर्मित बांध से अब घाघरा टकराने लगी है। ग्राम नकहरा के सामने बनाए गए अस्थाई रिंग बांध से भी पानी टकराना शुरू हो गया है।
ग्राम नकहरा, चरपुरवा, बेहटा, काशीपुर के सामने नदी की धारा में कृषि योग्य भूमि लगातार घाघरा की धारा में समाहित होती जा रही है। पिछले 24 घंटे में करीब 5 सौ बीघे से अधिक भूमि जिसमें धान व गन्ने की फसल लगी हुई थी वह कटकर घाघरा में समाहित हो चुकी है।
नदी व बांध के बीच में बसे गांव चरपुरवा का अस्तित्व समाप्त करने में घाघरा लग गई है। चरपुरवा के पास नदी का पानी तेजी से कटान कर रहा है। गांव के सामने कटान रोकने के लिए सिंचाई विभाग जद्दोजहद करने में लगा है।
बल्ली पाइलिंग व बोरियों में बालू भरकर कटान को रोकने की कवायद चल रही है। ग्रामीणों के मुताबिक चर पुरवा से तकरीबन 300 मीटर दूर रही घाघरा अब कटान करते हुए उनके गांव को समाप्त करने में लगी है। चरपुरवा में करीब 15 घर हैं जिनकी आबादी सौ के आसपास है।
इस गांव के लोग पिछले साल भी अपना आशियाना खो चुके हैं। 3 वर्ष पहले चरपुरवा में अपना घर बनाकर अपने आप को सुरक्षित मान रहे थे। मगर घाघरा ने यहां भी उन को अपना निशाना बनाया है। एक तरफ घाघरा अपने पूरे शबाब पर है तो दूसरी तरफ क्षेत्र को बाढ़ से बचाने के लिए बनाए गए बांध अभी भी आधे अधूरे हैं।
चरपुरवा गांव के 100 से अधिक परिवार के लोगों ने घाघरा के तेजी से बढ़ रहे जलस्तर के डर से अपने घर छोड़कर तटबंध पर शरण ले ली है। बांध पर मौजूद अवर अभियंता एमके सिंह ने बताया कि लगातार बांध पर रेन कट्स भरने तथा बांध को बोल्डर से पिचिंग का कार्य तेजी से चलाया जा रहा है। घाघरा का पानी भी बढ़ रहा है फिलहाल अभी किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं है।
-तटबंधीय क्षेत्र का भ्रमण करने और बाढ़ चौकियों की निगरानी के लिए तहसीलदार व नायब तहसीलदार को लगाया गया है जो लगातार क्षेत्र की निगरानी कर रहे हैं।
गुलाम सरवर, एसडीएम करनैलगंज
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गोंडा। घाघरा के बढ़ते जलस्तर ने रविवार को खतरे के निशान को पार कर दिया। मैदानी इलाकों में घाघरा की कटान से पांच सौ बीघा फसलों से लहलहाती भूमि नदी की धारा में समाहित हो चुकी है।
एल्गिन चरसड़ी बांध व नदी की धारा के बीच बसे चरपुरवा का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। नदी की कटान की जद में आए इस पुरवा में लोगों के लिए संकट खड़ा हो गया है। चरपुरवा के 100 से अधिक परिवार के लोगों ने घाघरा के बढ़ते जल स्तर को देखकर डरवश अपने आशियाना छोड़कर तटबंध पर शरण ले ली है।
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घाघरा नदी ने पिछले 24 घंटे में करीब 5 सौ बीघे से अधिक भूमि काटकर समाहित कर लिया और नदी की धारा गांव की ओर रुख करती जा रही है। पहाड़ी नालों के माध्यम से घाघरा में आने वाले बरसात के पानी ने अब मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।
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शनिवार को घाघरा का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 6 इंच नीचे था, जो रविवार को बढ़कर खतरे के निशान 106.07 के सापेक्ष 106.066 पर पहुंच गया। जिससे नदी खतरे के निशान को पार कर करीब 2 सेंटीमीटर ऊपर बहने लगी है।
रविवार को बांध पर बचाव कार्य तेजी से चल रहा था, आधे अधूरे नवनिर्मित बांध से अब घाघरा टकराने लगी है। ग्राम नकहरा के सामने बनाए गए अस्थाई रिंग बांध से भी पानी टकराना शुरू हो गया है।
ग्राम नकहरा, चरपुरवा, बेहटा, काशीपुर के सामने नदी की धारा में कृषि योग्य भूमि लगातार घाघरा की धारा में समाहित होती जा रही है। पिछले 24 घंटे में करीब 5 सौ बीघे से अधिक भूमि जिसमें धान व गन्ने की फसल लगी हुई थी वह कटकर घाघरा में समाहित हो चुकी है।
नदी व बांध के बीच में बसे गांव चरपुरवा का अस्तित्व समाप्त करने में घाघरा लग गई है। चरपुरवा के पास नदी का पानी तेजी से कटान कर रहा है। गांव के सामने कटान रोकने के लिए सिंचाई विभाग जद्दोजहद करने में लगा है।
बल्ली पाइलिंग व बोरियों में बालू भरकर कटान को रोकने की कवायद चल रही है। ग्रामीणों के मुताबिक चर पुरवा से तकरीबन 300 मीटर दूर रही घाघरा अब कटान करते हुए उनके गांव को समाप्त करने में लगी है। चरपुरवा में करीब 15 घर हैं जिनकी आबादी सौ के आसपास है।
इस गांव के लोग पिछले साल भी अपना आशियाना खो चुके हैं। 3 वर्ष पहले चरपुरवा में अपना घर बनाकर अपने आप को सुरक्षित मान रहे थे। मगर घाघरा ने यहां भी उन को अपना निशाना बनाया है। एक तरफ घाघरा अपने पूरे शबाब पर है तो दूसरी तरफ क्षेत्र को बाढ़ से बचाने के लिए बनाए गए बांध अभी भी आधे अधूरे हैं।
चरपुरवा गांव के 100 से अधिक परिवार के लोगों ने घाघरा के तेजी से बढ़ रहे जलस्तर के डर से अपने घर छोड़कर तटबंध पर शरण ले ली है। बांध पर मौजूद अवर अभियंता एमके सिंह ने बताया कि लगातार बांध पर रेन कट्स भरने तथा बांध को बोल्डर से पिचिंग का कार्य तेजी से चलाया जा रहा है। घाघरा का पानी भी बढ़ रहा है फिलहाल अभी किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं है।
-तटबंधीय क्षेत्र का भ्रमण करने और बाढ़ चौकियों की निगरानी के लिए तहसीलदार व नायब तहसीलदार को लगाया गया है जो लगातार क्षेत्र की निगरानी कर रहे हैं।
गुलाम सरवर, एसडीएम करनैलगंज