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5 करोड़ के टेंडर पर गड़ी नेताओं-माफियाओं की नजर
Updated Sat, 09 Sep 2017 09:47 PM IST
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5 करोड़ के टेंडर पर गड़ी नेता-माफिया की नजर
गोंडा। ठेके-पट्टे में दबंगई खत्म करने के लिए लागू हुई ई-टेंडरिंग व्यवस्था के बाद भी पिछले डेढ़ महीने से जिले में संविदा बिजली कर्मियों का टेंडर नहीं हो पा रहा है। जुलाई से सितंबर में अब तक तीन बार इसके टेंडर के लिए तीन अलग-अलग तिथियां निर्धारित की गईं। जिसमें से 31 जुलाई को तो टेंडर भी पड़ गया। लेकिन बाद में पड़े टेंडर कैंसिल करके नए सिरे से फिर से तारीख लगा दी गई। लेकिन तब से दो बार टेंडर की तिथि निर्धारित होने के बावजूद इसके टेंडर इसलिए नहीं पड़ सके, क्योंकि टेंडर पडने के दौरान किसी प्रकार की अराजकता से निपटने के लिए पावर कॉर्पोरेशन को पुलिस महकमे से फोर्स ही नहीं मिली थी। ऐसे में चौथी बार 12 सितम्बर को एक बार फिर से 450 संविदाकर्मियों की आपूर्ति के लिए टेंडर डाले जाने हैं। जिसके लिए पावर कारपोरेशन ने पुलिस महकमे से दो प्लाटून पीएसी की मांग की है। पावर कारपोरेशन अधिकारियों का मानना है कि टेंडर के दौरान रसूखदार और दबंग लोग विभागीय व्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं। क्योंकि मामला लाख, दो लाख के टेंडर का नहीं बल्कि पूरे पांच करोड़ रुपये का है।
यह है पूरा मामला
जिले भर में बिजली की लाइनों पर जो संविदाकर्मी काम कर रहे हैं। उनकी आपूर्ति का काम पावर कारपोरेशन हर साल सेवा प्रदाता फर्मों से लेता है। जिसके लिए हर साल टेंडर डाले जाते हैं। पावर कॉर्पोरेशन में यह व्यवस्था पिछले 10 वर्षों से चली आ रही है। वर्ष 2008 में पहली बार 48 संविदा बिजलीकर्मियों के टेंडर पड़े थे। जिसके बाद साल दर साल संविदा बिजलीकर्मियों की संख्या बढ़ती चली गई और आज स्थिति यह है कि पूरे जिले में 450 के करीब संविदा बिजलीकर्मी 25 बिजलीघरों पर काम कर रहे हैं। जिन्हें हर महीने ठेकेदार के मार्फत पावर कारपोरेशन तकरीबन 42 लाख रुपये का भुगतान मानदेय के तौर पर करता है। इस लिहाज से साल भर में इसके टेंडर की कीमत 5 करोड़ का आंकड़ा पार कर जाती है।
बैठे बिठाए मोटे मुनाफे के लिए होती दबगंई
हर्रा लगे न फिटकरी और रंग आए चोखा। पावर कॉर्पोरेशन से हर साल निकलने वाले टेंडर की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। जिसमें एक बार पूंजी लगाने के बाद हर महीने एक मोटा मुनाफा घर बैठे मिलने लगता है। यही वजह है कि इसका टेंडर हथियाने के लिए दबंग, माफियाओं के साथ ही राजनेता तक अपनी नीयत खोने लगे हैं। जुलाई महीने की 31 तारीख को इसके टेंडर पूरी तरह पड़ चुके थे, लेकिन एकदम से रात को खबर आती है कि टेंडर स्थगित कर दिए गए हैं और नए सिरे से टेंडर 21 अगस्त को डाले जाएंगे। लेकिन 21 अगस्त को फिर से टेंडर की डेट कैंसिल हो जाती और नई तारीख 6 सितम्बर को लग जाती है। कुछ ऐसा ही वाक्या 6 सितम्बर को भी होता और तारीख बढ़ाकर 12 सितम्बर कर दी जाती है।
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दो महीनों से संविदा कर्मियों का नहीं कोई माई-बाप
पावर कॉर्पोरेशन के 25 बिजलीघरों पर पिछले दो महीनों से 450 संविदा बिजलीकर्मी एक अनाथ की तरह काम कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में खुदा न खास्ता अगर इनके साथ कोई हादसा होता है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। यह खुद पावर कॉर्पोरेशन के लोग भी नहीं जानते। क्योंकि काम के दौरान होने वाले हर प्रकार के हादसे की जिम्मेदारी ठेकेदार की होती है। जिसका ठेका जुलाई महीने में ही खत्म हो चुका है। जिसके बाद से यह संविदा बिजलीकर्मी बगैर किसी फर्म की आपूर्ति के ही लाइनों पर काम कर रहे हैं। क्योंकि बिजली आज की तारीख में लोगों की सबसे बड़ी जरूरत बन चुकी है। बावजूद इसके संविदा बिजलीकर्मियों के होने वाले टेंडर को लेकर पावर कारपोरेशन तनिक भी संजीदा नहीं है।
संविदा बिजलीकर्मियों की आपूर्ति के लिए 12 सितम्बर को सुबह 10 से 12 के बीच ई-टेंडरिंग के जरिए टेंडर डाले जाएंगे। चूंकि टेंडर पडने के बाद एफडीआर वगैरह की हार्ड कॉपी जमा की जाती है, इसलिए प्रशासन से फोर्स की डिमांड की गई है, ताकि विभागीय व्यवस्था में किसी तरह का कोई खलल न हो।
-आरके श्रीवास्तव, प्रभारी मुख्य अभियंता
गोंडा। ठेके-पट्टे में दबंगई खत्म करने के लिए लागू हुई ई-टेंडरिंग व्यवस्था के बाद भी पिछले डेढ़ महीने से जिले में संविदा बिजली कर्मियों का टेंडर नहीं हो पा रहा है। जुलाई से सितंबर में अब तक तीन बार इसके टेंडर के लिए तीन अलग-अलग तिथियां निर्धारित की गईं। जिसमें से 31 जुलाई को तो टेंडर भी पड़ गया। लेकिन बाद में पड़े टेंडर कैंसिल करके नए सिरे से फिर से तारीख लगा दी गई। लेकिन तब से दो बार टेंडर की तिथि निर्धारित होने के बावजूद इसके टेंडर इसलिए नहीं पड़ सके, क्योंकि टेंडर पडने के दौरान किसी प्रकार की अराजकता से निपटने के लिए पावर कॉर्पोरेशन को पुलिस महकमे से फोर्स ही नहीं मिली थी। ऐसे में चौथी बार 12 सितम्बर को एक बार फिर से 450 संविदाकर्मियों की आपूर्ति के लिए टेंडर डाले जाने हैं। जिसके लिए पावर कारपोरेशन ने पुलिस महकमे से दो प्लाटून पीएसी की मांग की है। पावर कारपोरेशन अधिकारियों का मानना है कि टेंडर के दौरान रसूखदार और दबंग लोग विभागीय व्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं। क्योंकि मामला लाख, दो लाख के टेंडर का नहीं बल्कि पूरे पांच करोड़ रुपये का है।
यह है पूरा मामला
जिले भर में बिजली की लाइनों पर जो संविदाकर्मी काम कर रहे हैं। उनकी आपूर्ति का काम पावर कारपोरेशन हर साल सेवा प्रदाता फर्मों से लेता है। जिसके लिए हर साल टेंडर डाले जाते हैं। पावर कॉर्पोरेशन में यह व्यवस्था पिछले 10 वर्षों से चली आ रही है। वर्ष 2008 में पहली बार 48 संविदा बिजलीकर्मियों के टेंडर पड़े थे। जिसके बाद साल दर साल संविदा बिजलीकर्मियों की संख्या बढ़ती चली गई और आज स्थिति यह है कि पूरे जिले में 450 के करीब संविदा बिजलीकर्मी 25 बिजलीघरों पर काम कर रहे हैं। जिन्हें हर महीने ठेकेदार के मार्फत पावर कारपोरेशन तकरीबन 42 लाख रुपये का भुगतान मानदेय के तौर पर करता है। इस लिहाज से साल भर में इसके टेंडर की कीमत 5 करोड़ का आंकड़ा पार कर जाती है।
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बैठे बिठाए मोटे मुनाफे के लिए होती दबगंई
हर्रा लगे न फिटकरी और रंग आए चोखा। पावर कॉर्पोरेशन से हर साल निकलने वाले टेंडर की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। जिसमें एक बार पूंजी लगाने के बाद हर महीने एक मोटा मुनाफा घर बैठे मिलने लगता है। यही वजह है कि इसका टेंडर हथियाने के लिए दबंग, माफियाओं के साथ ही राजनेता तक अपनी नीयत खोने लगे हैं। जुलाई महीने की 31 तारीख को इसके टेंडर पूरी तरह पड़ चुके थे, लेकिन एकदम से रात को खबर आती है कि टेंडर स्थगित कर दिए गए हैं और नए सिरे से टेंडर 21 अगस्त को डाले जाएंगे। लेकिन 21 अगस्त को फिर से टेंडर की डेट कैंसिल हो जाती और नई तारीख 6 सितम्बर को लग जाती है। कुछ ऐसा ही वाक्या 6 सितम्बर को भी होता और तारीख बढ़ाकर 12 सितम्बर कर दी जाती है।
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दो महीनों से संविदा कर्मियों का नहीं कोई माई-बाप
पावर कॉर्पोरेशन के 25 बिजलीघरों पर पिछले दो महीनों से 450 संविदा बिजलीकर्मी एक अनाथ की तरह काम कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में खुदा न खास्ता अगर इनके साथ कोई हादसा होता है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। यह खुद पावर कॉर्पोरेशन के लोग भी नहीं जानते। क्योंकि काम के दौरान होने वाले हर प्रकार के हादसे की जिम्मेदारी ठेकेदार की होती है। जिसका ठेका जुलाई महीने में ही खत्म हो चुका है। जिसके बाद से यह संविदा बिजलीकर्मी बगैर किसी फर्म की आपूर्ति के ही लाइनों पर काम कर रहे हैं। क्योंकि बिजली आज की तारीख में लोगों की सबसे बड़ी जरूरत बन चुकी है। बावजूद इसके संविदा बिजलीकर्मियों के होने वाले टेंडर को लेकर पावर कारपोरेशन तनिक भी संजीदा नहीं है।
संविदा बिजलीकर्मियों की आपूर्ति के लिए 12 सितम्बर को सुबह 10 से 12 के बीच ई-टेंडरिंग के जरिए टेंडर डाले जाएंगे। चूंकि टेंडर पडने के बाद एफडीआर वगैरह की हार्ड कॉपी जमा की जाती है, इसलिए प्रशासन से फोर्स की डिमांड की गई है, ताकि विभागीय व्यवस्था में किसी तरह का कोई खलल न हो।
-आरके श्रीवास्तव, प्रभारी मुख्य अभियंता