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दांव पर साढ़े चार लाख बच्चों का भविष्य
अमर उजाला/गोंडा।
Updated Wed, 08 Jun 2016 12:04 AM IST
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जिले के परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा ग्रहण कर रहे साढ़े चार लाख बच्चों का भविष्य दांव पर है। दो माह अप्रैल व मई बिना किताब के गुजार चुके बच्चों को जुलाई में भी पुस्तकें मिलने की उम्मीद पर पानी फिरता नजर आ रहा है। कारण जिन फर्मों को किताबों की आपूर्ति करनी है, आज तक फाइनल नहीं हो पाया है।
फर्मों को कब ठेका मिलेगा, कब छपाई होगी और कब किताबें जिला मुख्यालय पहुंचेंगी और ये नौनिहालों तक कैसे पहुंचाई जाएंगी, इस पर पूरा विभाग मौन साधे है। इस अव्यवस्था का आलम यह है कि न सिर्फ गोंडा जिले के बल्कि प्रदेश के सभी जिलों के परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले करोड़ों बच्चों का भविष्य अंधकार में नजर आ रहा है।
सर्व शिक्षा अभियान के तहत परिषदीय विद्यालयों में कक्षा एक से आठ तक पढ़ने वाले बच्चों तथा सहायता प्राप्त, राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा आठ तक के बच्चों को निशुल्क किताबें उपलब्ध कराई जाती हैं। इस बार शिक्षा सत्र अप्रैल से शुरू हो गया, लेकिन बच्चों को किताबें नहीं मिलीं।
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अप्रैल व मई में बिना किताब के पढ़ाई होने के बाद विद्यालय बंद हो गए और जुलाई से पुन: स्कूूल खुल जाएंगे। लेकिन इस बार जुलाई में भी बच्चों को किताबें मिलना मुश्किल है। जिले में करीब साढ़े चार लाख बच्चे कक्षा एक से आठ तक पढ़ते हैं।
राज्य शैक्षिक अनुसंधान परिषद उत्तर प्रदेश से पूरे प्रदेश के लिए किताबों की आपूर्ति के लिए निविदाएं आमंत्रित होती हैं। बीते वर्ष सितंबर व अक्टूबर में यह प्रक्रिया शुरू हुई, जिससे अप्रैल में पुस्तकों की आपूर्ति हो सके। लेकिन किसी अड़चन के कारण यह निविदा निरस्त हो गई। अभी मई में एक बार फिर निविदा निकाली गई और अंतिम तिथि पांच मई बीत गई। इसमें कई फर्में शामिल हुईं, लेकिन आज तक इसका टेंडर फाइनल नहीं हो पाया।
यदि टेंडर फाइनल भी हो गया तो करोड़ों किताबों के छपने में समय लगेगा। खास बात यह है कि टेंडर फाइनल होने के बाद सभी जिलों से जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कक्षा वार बच्चों की संख्या, किस कक्षा में कितनी किताबें चलती हैं, उनकी संख्या आदि का विवरण उस फर्म को भेजेंगे, जिसको जिला अलाट हुआ हो। इसके बाद पुस्तकों के प्रकाशित होने के बाद फर्मों द्वारा जिला मुख्यालयों पर पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएंगी। इन किताबों का सत्यापन अधिकारियों द्वारा किया जाएगा, जिसमें करीब 15 दिन लगते हैं।
सत्यापन के बाद जिले स्तर पर स्कूलों तक किताब भेजवाने के लिए टेंडर आमंत्रित किया जाएगा। संबंधित फर्म बीआरसी से लेकर स्कूलों तक किताब भिजवाएगी। इस प्रक्रिया में ही करीब दो माह का समय लगेगा। यदि मौजूदा समय किताबों की आपूर्ति करने वाली फर्म का निर्धारण हो जाए।
इनसेट
कक्षावार बच्चों की संख्या
कक्षा बच्चों की संख्या किताबों की संख्या टाइटिल
1 51613 154839 03
2- 60709 242836 04
3- 63272 442904 07
4- 55778 446224 08
5- 47779 382232 08
6- 29257 409598 14
7- 32114 417482 13
8- 33342 433446 13
योग- 383120 2929561 70
नोट: यह केवल परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या है। मदरसों, माध्यमिक में कक्षा एक से आठ तक के बच्चों की संख्या करीब 70 हजार है।
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फर्मों को कब ठेका मिलेगा, कब छपाई होगी और कब किताबें जिला मुख्यालय पहुंचेंगी और ये नौनिहालों तक कैसे पहुंचाई जाएंगी, इस पर पूरा विभाग मौन साधे है। इस अव्यवस्था का आलम यह है कि न सिर्फ गोंडा जिले के बल्कि प्रदेश के सभी जिलों के परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले करोड़ों बच्चों का भविष्य अंधकार में नजर आ रहा है।
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सर्व शिक्षा अभियान के तहत परिषदीय विद्यालयों में कक्षा एक से आठ तक पढ़ने वाले बच्चों तथा सहायता प्राप्त, राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा आठ तक के बच्चों को निशुल्क किताबें उपलब्ध कराई जाती हैं। इस बार शिक्षा सत्र अप्रैल से शुरू हो गया, लेकिन बच्चों को किताबें नहीं मिलीं।
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अप्रैल व मई में बिना किताब के पढ़ाई होने के बाद विद्यालय बंद हो गए और जुलाई से पुन: स्कूूल खुल जाएंगे। लेकिन इस बार जुलाई में भी बच्चों को किताबें मिलना मुश्किल है। जिले में करीब साढ़े चार लाख बच्चे कक्षा एक से आठ तक पढ़ते हैं।
राज्य शैक्षिक अनुसंधान परिषद उत्तर प्रदेश से पूरे प्रदेश के लिए किताबों की आपूर्ति के लिए निविदाएं आमंत्रित होती हैं। बीते वर्ष सितंबर व अक्टूबर में यह प्रक्रिया शुरू हुई, जिससे अप्रैल में पुस्तकों की आपूर्ति हो सके। लेकिन किसी अड़चन के कारण यह निविदा निरस्त हो गई। अभी मई में एक बार फिर निविदा निकाली गई और अंतिम तिथि पांच मई बीत गई। इसमें कई फर्में शामिल हुईं, लेकिन आज तक इसका टेंडर फाइनल नहीं हो पाया।
यदि टेंडर फाइनल भी हो गया तो करोड़ों किताबों के छपने में समय लगेगा। खास बात यह है कि टेंडर फाइनल होने के बाद सभी जिलों से जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कक्षा वार बच्चों की संख्या, किस कक्षा में कितनी किताबें चलती हैं, उनकी संख्या आदि का विवरण उस फर्म को भेजेंगे, जिसको जिला अलाट हुआ हो। इसके बाद पुस्तकों के प्रकाशित होने के बाद फर्मों द्वारा जिला मुख्यालयों पर पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएंगी। इन किताबों का सत्यापन अधिकारियों द्वारा किया जाएगा, जिसमें करीब 15 दिन लगते हैं।
सत्यापन के बाद जिले स्तर पर स्कूलों तक किताब भेजवाने के लिए टेंडर आमंत्रित किया जाएगा। संबंधित फर्म बीआरसी से लेकर स्कूलों तक किताब भिजवाएगी। इस प्रक्रिया में ही करीब दो माह का समय लगेगा। यदि मौजूदा समय किताबों की आपूर्ति करने वाली फर्म का निर्धारण हो जाए।
इनसेट
कक्षावार बच्चों की संख्या
कक्षा बच्चों की संख्या किताबों की संख्या टाइटिल
1 51613 154839 03
2- 60709 242836 04
3- 63272 442904 07
4- 55778 446224 08
5- 47779 382232 08
6- 29257 409598 14
7- 32114 417482 13
8- 33342 433446 13
योग- 383120 2929561 70
नोट: यह केवल परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या है। मदरसों, माध्यमिक में कक्षा एक से आठ तक के बच्चों की संख्या करीब 70 हजार है।