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14 हजार बच्चों को मिलने लगा मिड डे मील
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14 हजार बच्चों को मिलने लगा मिड-डे-मील
रगड़गंज (गोंडा)। अमर उजाला में खबर छपने के बाद बेलसर के 185 आंगनबाड़ी केंद्रों पर हॉट कुक्ड योजना के तहत तीन से छह वर्ष के बच्चों को मिड-डे-मील मिलने लगा। सीडीपीओ बेलसर ने सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से बच्चों को भोजन उपलब्ध करा कर मोबाइल ऐप में फोटो अपलोड करने के निर्देश दिये है।
अमर उजाला ने एक अगस्त के अंक में ‘आंगनबाड़ी केंद्रों से रोजाना भूखे लौट रहे 14000 बच्चे’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। खबर छपने के बाद बेलसर के 165 आंगनबाड़ी व 20 मिनी आंगनबाड़ी केंद्रों पर भोजन दिया जाने लगा। सीडीपीओ बेलसर वंदना ने बताया कि मार्च माह में हॉट कुक्ड योजना के तहत खाते में पैसा आया था। फिर चुनाव आचार संहिता लागू हो गई और उसके बाद प्राइमरी स्कूलों में ग्रीष्मावकाश हो गया जिससे आंगनबाड़ी के बच्चों को भोजन नहीं मिल पाया। जुलाई में सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व प्राइमरी के शिक्षकों से बात करके भोजन बनवाने के निर्देश दिए गए थे। आंगनबाडी कार्यकर्ताओं को मोबाइल एप का प्रशिक्षण दिया जा चुका है जिस पर बच्चो का खाना खाते हुए फोटो अपलोड करने के निर्देश दिए गए है, लापरवाही करने पर जिम्मेदारी तय की जायेगी। इस निर्देश के बाद प्राइमरी स्कूलों में आंगनबाड़ी के बच्चों के लिए लिए भोजन बनने लगा और प्राइमरी के बच्चों के साथ आंगनबाड़ी के बच्चों को भी भोजन दिया जाने लगा।
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रगड़गंज (गोंडा)। अमर उजाला में खबर छपने के बाद बेलसर के 185 आंगनबाड़ी केंद्रों पर हॉट कुक्ड योजना के तहत तीन से छह वर्ष के बच्चों को मिड-डे-मील मिलने लगा। सीडीपीओ बेलसर ने सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से बच्चों को भोजन उपलब्ध करा कर मोबाइल ऐप में फोटो अपलोड करने के निर्देश दिये है।
अमर उजाला ने एक अगस्त के अंक में ‘आंगनबाड़ी केंद्रों से रोजाना भूखे लौट रहे 14000 बच्चे’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। खबर छपने के बाद बेलसर के 165 आंगनबाड़ी व 20 मिनी आंगनबाड़ी केंद्रों पर भोजन दिया जाने लगा। सीडीपीओ बेलसर वंदना ने बताया कि मार्च माह में हॉट कुक्ड योजना के तहत खाते में पैसा आया था। फिर चुनाव आचार संहिता लागू हो गई और उसके बाद प्राइमरी स्कूलों में ग्रीष्मावकाश हो गया जिससे आंगनबाड़ी के बच्चों को भोजन नहीं मिल पाया। जुलाई में सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व प्राइमरी के शिक्षकों से बात करके भोजन बनवाने के निर्देश दिए गए थे। आंगनबाडी कार्यकर्ताओं को मोबाइल एप का प्रशिक्षण दिया जा चुका है जिस पर बच्चो का खाना खाते हुए फोटो अपलोड करने के निर्देश दिए गए है, लापरवाही करने पर जिम्मेदारी तय की जायेगी। इस निर्देश के बाद प्राइमरी स्कूलों में आंगनबाड़ी के बच्चों के लिए लिए भोजन बनने लगा और प्राइमरी के बच्चों के साथ आंगनबाड़ी के बच्चों को भी भोजन दिया जाने लगा।
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