फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gonda News ›   10,000 fine for delay in issuing death certificate

Gonda News: मृत्यु प्रमाणपत्र देने में देरी पर 10 हजार रुपये जुर्माना

Sun, 06 Sep 2026 11:34 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा Updated Sun, 06 Sep 2026 11:34 PM IST
विज्ञापन
10,000 fine for delay in issuing death certificate
गोंडा। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने नगर पालिका परिषद द्वारा एक महिला का मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने में चार वर्ष की देरी पर 10 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। पीठ ने संबंधित अधिकारियों की इस लापरवाही को मनमाना करार दिया। अदालत ने याचिकाकर्ता को सात दिन के अंदर मृत्यु प्रमाणपत्र की प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराने का आदेश दिया है। जुर्माने की राशि जांच के बाद उस जिम्मेदार व्यक्ति से वसूली जाएगी, जिसके कारण यह देरी हुई।
विज्ञापन

न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की पीठ ने दो सितंबर को यह आदेश दिया। मामला शहर निवासी फिरदौस ताहिरा की याचिका से जुड़ा है। उन्होंने अदालत को बताया कि उनकी मां हाजरा बेगम की 27 अगस्त 2022 को एक अस्पताल में हृदय गति रुकने से मौत हो गई थी। अंतिम संस्कार के बाद उन्होंने 31 अगस्त 2022 को नगर पालिका में आवेदन कर मृत्यु प्रमाणपत्र की प्रमाणित प्रति मांगी थी। कई बार प्रतिवेदन देने के बाद भी उन्हें मृत्यु प्रमाणपत्र नहीं मिल सका।
विज्ञापन

इसी बीच मृतका के कथित देवर रिजवान अहमद ने नगर पालिका में आपत्ति दाखिल कर दी। उसने स्वयं को अलाउद्दीन का पुत्र बताते हुए दावा किया कि हाजरा बेगम अलाउद्दीन की नहीं, बल्कि अब्दुल खालिक की पत्नी थीं। इसके बाद नगर पालिका ने पति की पहचान के विवाद को अपने स्तर पर तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी और इसी आधार पर मृत्यु प्रमाणपत्र जारी नहीं किया।
विज्ञापन
विज्ञापन

नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी संतराम ने अदालत में दाखिल शपथपत्र में बताया कि 12 मार्च 2024 को अपर जिला रजिस्ट्रार/मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कोतवाली नगर के प्रभारी निरीक्षक को मृतका के पति का सही नाम पता करने के लिए पत्र भेजा था। पति के नाम को लेकर विवाद के कारण नगर पालिका समय से मृत्यु प्रमाणपत्र जारी नहीं कर सकी।

अदालत ने जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम की धाराओं का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि रजिस्ट्रार को यह अधिकार नहीं है कि वह जानकारी सही या गलत होने के आधार पर प्रमाणपत्र रोक दे। नियम के तहत पंजीकरण होने पर सात दिन के भीतर सूचना देने वाले को निशुल्क प्रमाणपत्र उपलब्ध कराना होता है। पति की पहचान का विवाद तय करने का अधिकार रजिस्ट्रार को नहीं है। अदालत ने अधिकारियों द्वारा शुरू की गई जांच को भी अधिनियम के दायरे से बाहर माना। अदालत ने आदेश की प्रति तत्काल अनुपालन के लिए प्रमुख सचिव गृह को भेजने का निर्देश दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed