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मां के जयकारे से गूंजे मंदिर
अमर उजाला ब्यूरो /गाजीपुर
Updated Fri, 31 Mar 2017 11:26 PM IST
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नवरात्र
- फोटो : नवरात्र
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हाथों में पूजा का थाल सजाए, चेहरे पर शांति और मन में भक्ति का भाव लिए जयकारा लगा रहे भक्तगणों को जब मां कामाख्या के दिव्य स्वरूप का दर्शन हुआ, तो उनकी खुशी देखते बन रही थी। ऐसा लग रहा था कि श्रद्धालुगण आंखें बंद कर मां के अद्भुत स्वरूप को अपने हृदय में समा लेना चाहते थे। यह नजारा नवरात्र के तीसरे दिन शुक्रवार को कामाख्या धाम के साथ ही अन्य देवी मंदिरों में भी देखने को मिला।
शुक्रवार की सुबह कामाख्या धाम में मां का अभिषेक करने के बाद फूल-माला और आभूषणों से ‘चंद्रघंटा स्वरूप’ का मोहक शृंगार किया गया। बिहार प्रांत सहित दूर-दराज से आए भक्तगण मां का दर्शन-पूजन कर पुष्प, नारियल, फल एवं चुनरी अर्पित किए और उनका आशीर्वाद लिया। वासंतिक नवरात्र के मद्देनजर जनपद के प्रमुख देवी मंदिरों में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा था।
इस बीच भक्तगणों ने जहां विधि-विधान से मां दुर्गा की पूजा-अर्चना कर मनवांछित फल की कामना की, वहीं पूरे दिन भजन-कीर्तन का दौर भी जारी रहा। देर शाम तक लोगों ने मंदिरों में मत्था टेका एवं मन्नतें मांगीं। एशिया के सबसे बड़े गांव गहमर में स्थित मां कामाख्या धाम शक्तिपीठों में से एक है। मंदिर में शुक्रवार को भोर से ही भक्तों का भारी हुजूम उमड़ पड़ा था। इस बीच नौ दिन तक व्रत रहने वाली महिलाओं और पुरुषों ने देवी जागरण से मां की महिमा का बखान किया। मंदिर परिसर में हवन-पूजन कराने का सिलसिला सुबह से देर शाम तक चलता रहा।
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शुक्रवार की सुबह कामाख्या धाम में मां का अभिषेक करने के बाद फूल-माला और आभूषणों से ‘चंद्रघंटा स्वरूप’ का मोहक शृंगार किया गया। बिहार प्रांत सहित दूर-दराज से आए भक्तगण मां का दर्शन-पूजन कर पुष्प, नारियल, फल एवं चुनरी अर्पित किए और उनका आशीर्वाद लिया। वासंतिक नवरात्र के मद्देनजर जनपद के प्रमुख देवी मंदिरों में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा था।
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इस बीच भक्तगणों ने जहां विधि-विधान से मां दुर्गा की पूजा-अर्चना कर मनवांछित फल की कामना की, वहीं पूरे दिन भजन-कीर्तन का दौर भी जारी रहा। देर शाम तक लोगों ने मंदिरों में मत्था टेका एवं मन्नतें मांगीं। एशिया के सबसे बड़े गांव गहमर में स्थित मां कामाख्या धाम शक्तिपीठों में से एक है। मंदिर में शुक्रवार को भोर से ही भक्तों का भारी हुजूम उमड़ पड़ा था। इस बीच नौ दिन तक व्रत रहने वाली महिलाओं और पुरुषों ने देवी जागरण से मां की महिमा का बखान किया। मंदिर परिसर में हवन-पूजन कराने का सिलसिला सुबह से देर शाम तक चलता रहा।
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