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गेहूं के बाद आम भी गया
ब्यूरो अमर उजाला, गाजीपुर
Updated Mon, 13 Apr 2015 11:11 PM IST
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बेेमौसम बारिश और बदली ने फलों के राजा आम को भी बर्बाद कर दिया। आम के बौर में चूर्णी फफूंदी रोग लगने से जिले में 65 से 70 फीसदी आम की फसल नष्ट हो गई जबकि जिले में पैदा होने वाला बनारसी लंगड़ा आम बाहरी जिलों में भी धूम मचाता रहा है।
जिले के करंडा, सैदपुर, जखनिया, मुहम्मदाबाद, भांवरकोल, सदर आदि क्षेत्रों में आम के अच्छे खासे बगीचे हैं। जिले की मिट्टी में आम की विभिन्न प्रजातियाें के पेड़ मौजूद हैं। लेकिन खासकर यहां का बनारसी लंगड़ा जहां बाहरी जिलों में धूम मचाता रहा है, वहीं दशहरी, चौसा, गौरजीत, आम्रपाली की भी जबर्दस्त डिमांड रहती है। इस बार शुरूआती समय में आम की फसल बेहद अच्छी थी।
बौर लगने से आम की डालियां लचक गईं थीं। बौर में सरसों भी खूब लगे लेकिन इसी बीच बेमौसम बारिश और कई दिनों तक बदली छाने के कारण आम की फसल में चूर्णी फफूंदी रोग का प्रकोप हो गया। इसकी वजह से आम के बौर काले पड़ गए और हवा तथा बारिश से ये झड़ने शुरू हो गए।
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इसके चलते जिले में करीब 65 से 70 फीसदी आम की फसल अब तक नष्ट हो चुकी है। यह तथ्य कृषि विज्ञान केंद्र गाजीपुर के फसल सुरक्षा वैज्ञानिकों के विभिन्न क्षेत्रों में किए गए अध्ययन से सामने आए हैं। कृषि विज्ञान केंद्र के फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डा. आरपी सिंह के मुताबिक यदि आम की फसल चौपट नहीं हुई होती तो आम की बंपर पैदावार होने से कोई रोक नहीं सकता था। इतने बड़े पैमाने पर आम की फसल नष्ट होने के कारण फलों का राजा आम अब आम आदमी की पहुंच से दूर हो सकता है। उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि आम की शेष फसल को बचाने के लिए वह किसी भी प्रकार की कोताही न करें। बताया कि प्लौनाथिक्स की एक मिलीलीटर मात्रा तीन लीटर पानी में घोलकर आम की फसल पर छिड़काव करें।
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जिले के करंडा, सैदपुर, जखनिया, मुहम्मदाबाद, भांवरकोल, सदर आदि क्षेत्रों में आम के अच्छे खासे बगीचे हैं। जिले की मिट्टी में आम की विभिन्न प्रजातियाें के पेड़ मौजूद हैं। लेकिन खासकर यहां का बनारसी लंगड़ा जहां बाहरी जिलों में धूम मचाता रहा है, वहीं दशहरी, चौसा, गौरजीत, आम्रपाली की भी जबर्दस्त डिमांड रहती है। इस बार शुरूआती समय में आम की फसल बेहद अच्छी थी।
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बौर लगने से आम की डालियां लचक गईं थीं। बौर में सरसों भी खूब लगे लेकिन इसी बीच बेमौसम बारिश और कई दिनों तक बदली छाने के कारण आम की फसल में चूर्णी फफूंदी रोग का प्रकोप हो गया। इसकी वजह से आम के बौर काले पड़ गए और हवा तथा बारिश से ये झड़ने शुरू हो गए।
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इसके चलते जिले में करीब 65 से 70 फीसदी आम की फसल अब तक नष्ट हो चुकी है। यह तथ्य कृषि विज्ञान केंद्र गाजीपुर के फसल सुरक्षा वैज्ञानिकों के विभिन्न क्षेत्रों में किए गए अध्ययन से सामने आए हैं। कृषि विज्ञान केंद्र के फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डा. आरपी सिंह के मुताबिक यदि आम की फसल चौपट नहीं हुई होती तो आम की बंपर पैदावार होने से कोई रोक नहीं सकता था। इतने बड़े पैमाने पर आम की फसल नष्ट होने के कारण फलों का राजा आम अब आम आदमी की पहुंच से दूर हो सकता है। उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि आम की शेष फसल को बचाने के लिए वह किसी भी प्रकार की कोताही न करें। बताया कि प्लौनाथिक्स की एक मिलीलीटर मात्रा तीन लीटर पानी में घोलकर आम की फसल पर छिड़काव करें।