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Ghazipur News: तुम मिले जो हमें जिंदगी मिल गई...
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गाजीपुर। दीपोत्सव के अवसर पर राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय में हिंदी विभाग की ओर से शब्दोत्सव मनाने के लिए कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। कवि सम्मेलन दो चरणों में हुआ। पहले चरण में महाविद्यालय की छात्राओं ने स्वरचित अपनी कविताओं का पाठ किया, जिसमें किरन यादव, करिश्मा पांडेय, साधना यादव एवं ज्योति शर्मा ने अपनी भाव प्रधान कविताओं से खूब वाहवाही लूटी। दूसरे चरण में आमंत्रित कवियों ने अपनी कविताओं का पाठ किया।
कार्यक्रम की शुरूआत प्राचार्य प्रो. सविता भारद्वाज ने वाग्देवी सरस्वती का पुष्पार्चन एवं दीप प्रज्ज्वलन कर की। कार्यक्रम के प्रारम्भ में कवि दिलीप दीपक ने ''दे दे मां ज्ञान शारदे मुझको'' सरस्वती वंदना सुनाकर श्रोताओं का मन मोह लिया। कवि निर्भय निनाद ने प्रेम शृंगार और प्रेरणा के गीत सुनाए। आशीष द्विवेदी ने अपनी प्रसिद्ध रचना ''तुम मिले जो हमें जिंदगी मिल गई, एक दिया जो जल रोशनी मिल गई'' से सम्मेलन में तालियां बटोरीं। कवि रमाकांत राही ने ''लड़कियां कभी धूप तो कभी छांव बन जाती हैं, इनसे ही जीवन है यही संसार चलाती हैं'' से कविता से समां बांधा। दिलीप ने श्रम गीत को प्रतिष्ठित करते हुए किसान जीवन के प्रेम को कविता में पिरोकर गाया कि ''आवा न धनिया कटिया करा दे''। कवयित्री रश्मी शाक्य ने अपना घर द्वार स्वर्ग का घटा छोड़कर, जब भागीरथ ने मुझको पुकारा यहां/ मैं चली आई शिव की जटा छोड़कर प्रस्तुत किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ. शिवकुमार, डॉ. विकास सिंह, डॉ. सारिका सिंह, डॉ. संतन कुमार राम, डॉ. राजेश यादव, डॉ. संगीता मौर्य आदि प्राध्यापक, शोधार्थी एवं हिंदी एमए एवं स्नातक की छात्राएं उपस्थित थीं।
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कार्यक्रम की शुरूआत प्राचार्य प्रो. सविता भारद्वाज ने वाग्देवी सरस्वती का पुष्पार्चन एवं दीप प्रज्ज्वलन कर की। कार्यक्रम के प्रारम्भ में कवि दिलीप दीपक ने ''दे दे मां ज्ञान शारदे मुझको'' सरस्वती वंदना सुनाकर श्रोताओं का मन मोह लिया। कवि निर्भय निनाद ने प्रेम शृंगार और प्रेरणा के गीत सुनाए। आशीष द्विवेदी ने अपनी प्रसिद्ध रचना ''तुम मिले जो हमें जिंदगी मिल गई, एक दिया जो जल रोशनी मिल गई'' से सम्मेलन में तालियां बटोरीं। कवि रमाकांत राही ने ''लड़कियां कभी धूप तो कभी छांव बन जाती हैं, इनसे ही जीवन है यही संसार चलाती हैं'' से कविता से समां बांधा। दिलीप ने श्रम गीत को प्रतिष्ठित करते हुए किसान जीवन के प्रेम को कविता में पिरोकर गाया कि ''आवा न धनिया कटिया करा दे''। कवयित्री रश्मी शाक्य ने अपना घर द्वार स्वर्ग का घटा छोड़कर, जब भागीरथ ने मुझको पुकारा यहां/ मैं चली आई शिव की जटा छोड़कर प्रस्तुत किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ. शिवकुमार, डॉ. विकास सिंह, डॉ. सारिका सिंह, डॉ. संतन कुमार राम, डॉ. राजेश यादव, डॉ. संगीता मौर्य आदि प्राध्यापक, शोधार्थी एवं हिंदी एमए एवं स्नातक की छात्राएं उपस्थित थीं।
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