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यह है हाल : विश्वामित्र मेडिकल कॉलेज में अप्रशिक्षितकर्मी लगा रहे प्रसूताओं को टांके, दर्द से होती है परेशानी
Sun, 10 Nov 2024 06:16 PM IST
अमन विश्वकर्मा
पवन श्रीवास्तव, अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर।
पवन श्रीवास्तव, अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर।
Published by: अमन विश्वकर्मा
Updated Sun, 10 Nov 2024 06:16 PM IST
सार
Ghazipur News : मरीजों का आरोप है कि ये टांके दो-तीन दिन में टूट जाते हैं। इस कारण अस्पताल में रहना पड़ जाता है। इसके साथ ही घाव भी नहीं भर पा रहे हैं। दर्द होने के कारण असहनीय दर्द होता है।
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विश्वामित्र मेडिकल कॉलेज का ऑपरेशन थिएटर।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज की महिला अस्पताल में सर्जरी से प्रसव के बाद प्रसूताओं को लग रहे टांके उनके लिए घातक साबित हो रहे हैं। दो से तीन दिनों में टांके टूट जा रहे हैं।
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आरोप है कि टांकों की सिलाई अप्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी कर रहे हैं। धागे की गुणवत्ता भी खराब बताई जा रही है। टांके टूटने से प्रसूताओं को संक्रमण के साथ ही अन्य समस्याएं हो रही हैं। एक सप्ताह की जगह उन्हें पखवाड़े भर अस्पताल में भर्ती रहना पड़ता है। महिला अस्पताल में प्रतिदिन 6 से 8 सर्जरी से प्रसव भी कराया जाता है। ऐसे में सर्जरी के दौरान लगने वाला टांका के पकने और टूटने की भी शिकायत मिल रही है।
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केस 1 : नोनहरा निवासी एक तीमारदार ने बताया कि एक माह पूर्व गर्भवती पत्नी को प्रसव के लिए पत्नी को भर्ती कराया था। सर्जरी से प्रसव कराया गया। मुश्किल से तीन से चार दिन बाद ही टांके टूट गए। करीब 15 दिन तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा।
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केस 2 : गाजीपुर घाट निवासी तीमारदार ने बताया कि रिश्तेदार की एक महिला का प्रसव महिला अस्पताल में सर्जरी से हुआ, लेकिन टांका पकने से मवाद आने लगा। ऐसे में मरीज को तमाम परेशानी का सामना करना पड़ा। दवा के बाद उनका स्वास्थ्य बेहतर हो सका।
बोले अधिकारी
पूर्व में इस तरह की शिकायत आती थी। अब टांके टूटने शिकायत नहीं आ रही है। सर्जरी के बाद उच्च श्रेणी के धागे के टांके का प्रयोग किया जा रहा है। - प्रोफेसर आनंद मिश्रा, प्राचार्य, महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज, गाजीपुर।