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संयुक्त किसान मोर्चा ने किया धरना प्रदर्शन
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क्रांतिकारी उधम सिंह की शहादत दिवस पर सरकार के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा ने रविवार को सरजू पांडे पार्क में धरना प्रदर्शन किया।
धरना को संबोधित करते हुए आजाद यादव ने कहा कि सरकार के आश्वासन पर भरोसा कर संयुक्त किसान मोर्चा ने दिल्ली बॉर्डर से अपना मोर्चा उठाने का एलान किया । उसके बाद से सरकार अपने वादों से लगातार मुकर ही नहीं रही है, बल्कि आंदोलन में शामिल किसानों के खिलाफ शत्रुओं जैसा व्यवहार कर रही है। इसलिए पूरे देश के किसान सड़क पर उतरने को बाध्य है। वहीं मुहम्मद नसिरूद्दीन ने कहा कि मानसून सत्र से पहले सरकार ने एमएसपी पर किसान विरोधी और अर्थहीन कमेटी की घोषणा की। सरकार द्वारा गठित इस कमेटी से किसानों के साथ एकबार फिर धोखा हुआ है। सरकार ने कमेटी में संयुक्त किसान मोर्चा के केवल तीन सदस्यों को रखे जाने का प्रावधान बनाकर एक बार फिर आंदोलन कर रहे किसानों के साथ विश्वासघात किया है। उन्होंने कहा कि कमेटी में शामिल किसान नेताओं के नाम पर किसान विरोधी कानूनों के पक्ष में खुलकर बोलने वालों और किसान आंदोलन के खिलाफ जहर उगलने का काम करने वालों को शामिल किया गया है । किसान आंदोलन में चढ़ बढ़ कर हिस्सा लेने वाले कृषि प्रधान राज्यों पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान के किसी किसान प्रतिनिधि को नहीं शामिल किया गया है। तथा कमेटी के एजेंडे में एमएसपी पर कानून बनाने तक का जिक्र नहीं है। उन्होंने किसान विरोधी कमेटी को भंग कर एक जनपक्षीय, और किसान पक्षधर कमेटी गठित करने की मांग उठाई। इस दौरान प्रमोद कुशवाहा, घूरा, यादव, अशोक मिश्रा, रामदरश यादव, सीताराम यादव, रामाश्रय यादव, लल्लन यादव रहे । वही संचालन में भाकपा (माले) जिला सचिव रामप्यारे राम और योगेन्द्र भारती ने की।
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धरना को संबोधित करते हुए आजाद यादव ने कहा कि सरकार के आश्वासन पर भरोसा कर संयुक्त किसान मोर्चा ने दिल्ली बॉर्डर से अपना मोर्चा उठाने का एलान किया । उसके बाद से सरकार अपने वादों से लगातार मुकर ही नहीं रही है, बल्कि आंदोलन में शामिल किसानों के खिलाफ शत्रुओं जैसा व्यवहार कर रही है। इसलिए पूरे देश के किसान सड़क पर उतरने को बाध्य है। वहीं मुहम्मद नसिरूद्दीन ने कहा कि मानसून सत्र से पहले सरकार ने एमएसपी पर किसान विरोधी और अर्थहीन कमेटी की घोषणा की। सरकार द्वारा गठित इस कमेटी से किसानों के साथ एकबार फिर धोखा हुआ है। सरकार ने कमेटी में संयुक्त किसान मोर्चा के केवल तीन सदस्यों को रखे जाने का प्रावधान बनाकर एक बार फिर आंदोलन कर रहे किसानों के साथ विश्वासघात किया है। उन्होंने कहा कि कमेटी में शामिल किसान नेताओं के नाम पर किसान विरोधी कानूनों के पक्ष में खुलकर बोलने वालों और किसान आंदोलन के खिलाफ जहर उगलने का काम करने वालों को शामिल किया गया है । किसान आंदोलन में चढ़ बढ़ कर हिस्सा लेने वाले कृषि प्रधान राज्यों पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान के किसी किसान प्रतिनिधि को नहीं शामिल किया गया है। तथा कमेटी के एजेंडे में एमएसपी पर कानून बनाने तक का जिक्र नहीं है। उन्होंने किसान विरोधी कमेटी को भंग कर एक जनपक्षीय, और किसान पक्षधर कमेटी गठित करने की मांग उठाई। इस दौरान प्रमोद कुशवाहा, घूरा, यादव, अशोक मिश्रा, रामदरश यादव, सीताराम यादव, रामाश्रय यादव, लल्लन यादव रहे । वही संचालन में भाकपा (माले) जिला सचिव रामप्यारे राम और योगेन्द्र भारती ने की।