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कोहरे और गलन ने किया परेशान
अमर उजाला ब्यूरो /गाजीपुर
Updated Sat, 31 Dec 2016 11:42 PM IST
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घना कोहरा के बीच अंधऊ बाईपास रोड पर लाइट जलाकर गुजरते बाइक सवार।
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पिछले कई दिनों से ठंड लोगों को अपनी ताकत के एहसास करा रही है। शनिवार को तो सर्दी अपनी उपस्थिति का जबरदस्त एहसास करायसा। सुबह कोहरा के बीच एक तरफ जहां पैदल आवागमन करने वाले ठिठुरते हुए नजर आए, वहीं वाहन लाइटों के सहारे रेंगते रहे। ठंड से राहत के लिए लोग अलाव का सहारा लिया। गलन की मार झेलते हुए पूरे दिन लोग धूप निकलने की आस लगाते रहे।
कड़ाके की ठंड का आलम यह है कि लोग आवश्यक कार्य से ही लोग बाहर निकले। खास कार्य न होने पर लोग घर में ही रहना मुनासिब समझा। सुबह घने कोहरे से जिला ढका रहा। इस दौरान पैदल आवागमन करने वाले लोग एक तरफ जहां ठिठुरते हुए नजर आए, वहीं हेड लाइट और इंडीकेटर जलाकर दोपहिया और चार पहिया वाहन रेंगते रहे। गलन का प्रभाव इतना जबरदस्त रहा कि घरों के बाहर की कौन कहे, कमर की खिड़की-दरवाजे बंद रखने रखना मुनासिब समझा। इससे राहत के लिए लोगों ने अलाव के साथ ही हीटर का सहारा लिया। मार्गों पर आवागमन करने वालों की नजर ही जल रहे अलाव पर पड़ रही थी, राहत के लिए वह रुककर अलाव तापने लग रहे थे।
लोग पूरे दिन धूप की आस लगाते रहे, लेकिन धूप नहीं निकली। जैसे-जैसे शाम ढलती गई, वैसे-वैसे ठंड में भी इजाफा होता गया। ठंड की वजह से रात नौ बजे तक गुलजार रहने वाली सड़कों पर आठ बजे ही सन्नाटा पसर गया। साधन संपन्न लोग तो विभिन्न उपायों से काफी हद तक ठंड से राहत पा ले रहे हैं, लेकिन कड़ाके की ठंड की मार सबसे ज्यादा गरीबों पर पड़ रही है, वह इससे बचाव के लिए तरह-तरह के जुगत भिड़ा रहे हैं।
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कड़ाके की ठंड का आलम यह है कि लोग आवश्यक कार्य से ही लोग बाहर निकले। खास कार्य न होने पर लोग घर में ही रहना मुनासिब समझा। सुबह घने कोहरे से जिला ढका रहा। इस दौरान पैदल आवागमन करने वाले लोग एक तरफ जहां ठिठुरते हुए नजर आए, वहीं हेड लाइट और इंडीकेटर जलाकर दोपहिया और चार पहिया वाहन रेंगते रहे। गलन का प्रभाव इतना जबरदस्त रहा कि घरों के बाहर की कौन कहे, कमर की खिड़की-दरवाजे बंद रखने रखना मुनासिब समझा। इससे राहत के लिए लोगों ने अलाव के साथ ही हीटर का सहारा लिया। मार्गों पर आवागमन करने वालों की नजर ही जल रहे अलाव पर पड़ रही थी, राहत के लिए वह रुककर अलाव तापने लग रहे थे।
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लोग पूरे दिन धूप की आस लगाते रहे, लेकिन धूप नहीं निकली। जैसे-जैसे शाम ढलती गई, वैसे-वैसे ठंड में भी इजाफा होता गया। ठंड की वजह से रात नौ बजे तक गुलजार रहने वाली सड़कों पर आठ बजे ही सन्नाटा पसर गया। साधन संपन्न लोग तो विभिन्न उपायों से काफी हद तक ठंड से राहत पा ले रहे हैं, लेकिन कड़ाके की ठंड की मार सबसे ज्यादा गरीबों पर पड़ रही है, वह इससे बचाव के लिए तरह-तरह के जुगत भिड़ा रहे हैं।
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