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वज्रपात: कहीं मां की कोख उजड़ी, तो कहीं सूनी हो गई मांग

Wed, 16 Sep 2020 11:45 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 16 Sep 2020 11:45 PM IST
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Thunderclap: Somewhere the mother's womb is dismembered, then there is a demand for somewhere
वज्रपात: कहीं मां की कोख उजड़ी, तो कहीं सूनी हो गई मांग
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गाजीपुर। मंगलवार को गरज और चमक के साथ बिजली गिरने से एक ही दिन पांच लोगों की मौत हो गई। जनपद के कोने-कोने में दूसरे दिन भी मातम पसरा रहा। बिजली गिरने से किसी मां की कोख उजड़ गई, तो किसी की मांग सूनी हो गई। मेहनत-मजदूरी के बल पर आंखों में पला सपना एक ही झटके में समाप्त हो गया। हालांकि जिला प्रशासन की ओर से मृतकों के परिजनों को आर्थिक मदद का आश्वासन दिया गया, लेकिन अपनों के बिछड़ने का दर्द परिजनों से सहन नहीं हो पा रहा है।
सादात। थाना क्षेत्र के मौधिया गांव निवासी आजाद राजभर ट्राली चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। बूढ़े मां-बाप का एकमात्र सहारा आजाद की मौत ने मानो उनकी कमर ही तोड़कर दी हो। रोनेे-बिलखने से पूरा गांव तो मातम के सन्नाटे में कैद था, लेकिन उन बूढ़े मां-बाप को अपने पुत्र के जाने का ऐसा सदमा लग गया था कि सीने के दर्द की पीड़ा आंखों से साफ निकलती दिख रही थी। उन्हें क्या पता था कि जो बच्चा बुढ़ापे की लाठी बनेगा, आज उसे ही कंधों पर उठाकर श्मशान तक लेकर जाना पड़ रहा है। मृतक के माता- पिता की दर्द भरी उन बूढ़ी को देख पत्थर दिल इंसान भी बिलख पड़ता था। बार-बार ईश्वर को इस जख्म के लिए कोसता और कहता कि आखिर इन बूढ़े मां-बाप का क्या दोष था, जो असमय ही जवान बेटे को छीन लिया।
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देवकली। सैदपुर तहसील के चितौरा अंतर्गत खांवपुर गांव निवासी भैरो सिंह यादव खेती-बारी के साथ गाय और भैंस का पालन करके परिवार का भरण-पोषण करते थे। दो पुत्र और पांच पुत्रियों के सिर से बिजली ने पिता का साया छीन लिया। पत्नी मंसू का एक दर्द कि असमय ही पति का साथ छुट गया तो दूसरी चिंता की अभी तीन पुत्रियों की शादी करनी है। कैसे परिवार का पालन पोषण होगा और कैसे बेटियों के हाथ पीले होंगे। दोनों दर्द की पीड़ा की बेदना से पत्नी रोते-रोते बेहोश हो जा रही थी। वहीं पुत्र देवेंद्र और सत्येंद्र के आंखों में आगे बढ़ने का सपना पिता के साया उठते ही टूट गया। बड़े पुत्र को चिंता की आर्थिक संकट ऐसी करि अब आगे कैसे सारे काम निपटेंगे। पिता का शव देखकर आंखों से आंसू गिर रहा था तो कभी काफी ओठ से बार-बािर दर्द छलक के मुंह पर आ जा रहा था।
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दुबिहां। करीमुद्दीनपुर थाना क्षेत्र के गोविंदपुर गांव के रहने वाले मंजीत राजभर की मौत से परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट गया। बिजली गिरने ने घर के एकलौते कमाऊ और होनहार युवक को अपने आगोस में लेकर हमेशा के लिए परिवार पर गहरा जख्म दे दिया। अपने चार भाइयों में मंजीत दूसरे नंबर पर था। घर की आर्थिक स्थिति बहुत खराब होने के चलते हाईस्कूल पास होने के बाद ही यह गुजरात के बलसाड़ जिले मेें स्वदेशी कपड़ा मिल में काम करने लगा, जिससे घर के खर्चे चलने लगे। छप्पर में जीवन यापन कर रहे परिवार के लिए एक छोटा सा कमरा भी तैयार कराकर दिया था। लाकडाऊन के चलते कंपनी से बीते अप्रैल महीने मेें घर आ गया और अपने पिता और बड़े भाई के साथ खेती में हाथ बंटाने लगा। शादी के लिए रिस्तेदार भी आ रहे थे, लेकिन वह पिता को घर बन जाने पर ही शादी करने को कह रहा था। मां मांती देवी का रो रोकर बुरा हाल हो गया था, वह बेसुध होकर पडी हुई है। बार-बार अपने कमाऊ पुत के लिए एकाएक चिल्ला कर रोने लगती है। करुण-क्रंदन से पूरे गांव में सियापा छाया हुआ है।
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