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उसरी कांड के गवाह से हुई जिरह: बृजेश सिंह कोर्ट में रहे मौजूद, त्रिभुवन वीडियो कांफ्रेंसिंग से जुड़े

Wed, 07 Sep 2022 11:57 AM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गाजीपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गाजीपुर Published by: किरन रौतेला Updated Wed, 07 Sep 2022 11:57 AM IST
सार

उसरी चट्टी हत्याकांड मामले में मंगलवार को करीब दो से ढ़ाई घंटे तक जिरह चली। जिरह के दौरान आरोपी बृजेश सिंह कोर्ट में मौजूद रहे और दूसरा आरोपी त्रिभुवन सिंह वीडियो कांफेंसिंग के जरिए कार्यवाही में शामिल हुए। 

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The witnesses of the Usri incident were cross examined Brijesh Singh was present in the court
बृजेश सिंह - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उसरी चट्टी हत्याकांड मामले में मंगलवार को गवाह रमेश राम की जिरह वीडियो कांफ्रेंसिंग रूम में हुई। करीब दो से ढ़ाई घंटे तक चले जिरह के दौरान आरोपी बृजेश सिंह कोर्ट में मौजूद रहा और दूसरा आरोपी त्रिभुवन सिंह वीडियो कांफेंसिंग के जरिए कार्यवाही में शामिल हुआ। अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम, एमपी एमएलए कोर्ट रामशुध सिंह की अदालत ने बाकी की जिरह के लिए 13 सितंबर की तारीख नियत की है।

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मालूम हो कि 15 जुलाई 2001 को मुख्तार अंसारी अपने निर्वाचन क्षेत्र मऊ जा रहे थे। दिन में साढ़े बारह बजे उसरी चट्टी पर उनके काफिके पर पहले से तैयार हमलावरों ने स्वचलित हथियारों से फायरिंग किया। जिसमें मुख्तार अंसारी के सरकारी गनर रामचंदर उर्फ प्रदीप की मौके पर मृत्यु हो गई और वहीं रुस्तम उर्फ बाबू घायल हो गया। जिसकी  ईलाज के दौरान मौत हो गई।
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वहीं, हमलावरों में से एक की मौत हो गई थी। मुख़्तार अंसारी के साथ चलने वाले हमराहियों को भी चोट आई थीं। इस मामले में मुख्तार अंसारी ने बृजेश सिंह व त्रिभुवन सिंह को नामजद करते अन्य 15 अज्ञात के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया गया। विवेचना के बाद पुलिस ने चार लोगों के विरुद्ध आरोप-पत्र प्रेषित किया। इसमें से दो आरोपियोंं की विचारण के दौरान मौत हो गई।
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मंगलवार को मामले की दूसरी गवाही रमेश राम के द्वारा हुई। इससे पहले इलाहाबाद में डा. ओम प्रकाश की एक गवाही हो चुकी है। गवाह रमेश राम ने अपनी सुरक्षा को लेकर प्रार्थना-पत्र पिछली तारीख को दिया था। इस संबंध में  सहायक शासकीय अधिवक्ता नीरज कुमार श्रीवास्तव ने प्रार्थना-पत्र दिया कि विगत तिथि को गवाह ने प्रार्थना-पत्र में कहा था कि आरोपियों को देखकर पहचान सकता हूं, लेकिन मुख्य परीक्षा में यह बात पूछने से छूट गई थी। पुनः मुख्य परीक्षा में यह प्रश्न पूछने के लिए प्रार्थना-पत्र दिया गया। जिसे मंगलवार को न्यायालय ने खारिज कर दिया।

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