फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ghazipur News ›   The truth of plantation: Parks and roads are not green even after spending crores

पौधरोपण का सच: करोड़ों खर्च के बाद भी हरे-भरे नहीं हैं पार्क व सड़कें

Fri, 17 Jul 2020 11:00 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 17 Jul 2020 11:00 PM IST
विज्ञापन
The truth of plantation: Parks and roads are not green even after spending crores
गाजीपुर। ग्लोबल वार्मिंग की खतरे से पूरी दुनिया जूझ रही है। पिछले दो दशक में मौसम के रूख में भी भारी परिवर्तन आया है। लॉकडाउन के शुरूआती दिनों में वाहनों का परिचालन लगभग ठप होने से एकबार मौसम ने अपने दशकों पहले वाले दिन को दोहराना शुरू भी कर दिया था। लेकिन फिर से वाहनों के आवागमन ने जहां मौसम के तापमान को फिर से असंतुलित कर दिया, वहीं बरसात पर भी इसका असर काफी दिखा। इधर मौसम के इस बिगड़ते स्वरूप के बीच हरियाली लाने वाले जिम्मेदार लोगों द्वारा पौधरोपण जरूर किए गए। लेकिन देखभाल न होने से सबकुछ बेकार साबित हुआ। यह स्थिति हर साल की है। जानकर हैरत होगा कि नगर पालिका पिछले कई सालों में शहर में पौधरोपण पर कोई बजट खर्च नहीं कर रही है।
विज्ञापन

नपा के अधिकारियों व कर्मचारियों का कहना है कि प्रशासन से मिलने वाले पौधों को ही सार्वजनिक स्थल और सड़कों के किनारे रोपकर कर्त्तव्य से इतिश्री कर लिया जा रहा है। हालत ऐसे हैं कि शहरी क्षेत्र में अभी तक जरूरत के अनुसार टी-गार्ड तक नहीं बनाया गया है। कहीं-कहीं टी-गार्ड दिखाई दे जाते हैं। ऐसे में पौधे लगने के बाद भी सड़कों का किनारा व डिवाइडर सूने हैं। अफसरों के कार्यालय और कुछ चुनिंदा स्थलों पर टी-गार्ड की स्थापना करके पौधे लगाए गए हैं, लेकिन देख-रेख और सुरक्षा के अभाव में इनमें से 30 फीसदी से अधिक पौधे बचाए नहीं जा सके।
विज्ञापन

देखा जाए तो पिछले कुछ सालों में अलग-अलग विभागों से शहर में पौधरोपण पर करोड़ो खर्च किया गया। लेकिन शहर की अधिकांश सड़कें अभी भी सूनी हैं। लगाए गए पौधों में व्यक्तिगत हिस्सा लेने वाले लोगों के हाथों ही पौधे सुरक्षित हो पाए और आज वे पेड़ का रूप ले सकी हैं। देखा जाय तो वर्ष 2017 में जिले में 10 लाख 90 हजार और 2018 में 190 हेक्टेयर भू भाग में 4 लाख 97 हजार पौधे लगाए गए। जबकि 2018 में 26 विभागों के हाथों 10 लाख 90 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य सौंपा गया। इसीक्रम में 2019 में 41 लाख 50 हजार पौधा लगाने के लिए शासन से 22 विभागों को जिम्मेवारी दी गई थी। लेकिन मौजूदा समय में इन लाखों पौधों में से मुट्ठी भर ही पेड़ का स्परूप ले पाए।
विज्ञापन
विज्ञापन

.
.पिछले कुछ सालों में पौधे लगाने के प्रति शासन-प्रशासन ने दिलचस्पी दिखाया है। लेकिन पौधों का देखरेख सही नहीं हो रहा है।
गोपाल विश्वकर्मा।
गांधी पार्क में हरसाल पौधे लगाए जाते हैं। लेकिन देखरेख के अभाव में ये पौधे बड़े होने से पहले ही दम तोड़ दे रहे हैं। ऐसे में पौधे लगाने से ज्यादा उनकी सुरक्षा के प्रति ज्यादा ध्यान देना होगा।

कृष्ण शंकर
कुछ जागरूक संगठनों का पौधरोपण में सकरात्मक तस्वीर आया है। लोग व्यक्तिगत रूप से लगाए गए पौधों की देखरेख तो कर रहे हैं लेकिन सड़कों के किनारे लगाए जाने वाले पौधे सुरक्षा के मामले में उपेक्षित हैं।
डा. पीयूष कांत सिंह।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed