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तहसील पर यूनियन जैक हटाकर लहराया था तिरंगा, सात दिन तक आजाद रहा इलाका

Thu, 18 Aug 2022 11:42 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 18 Aug 2022 11:42 PM IST
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The tricolor was hoisted by removing the union jack on the tehsil, the area remained free for seven days
अगस्त क्रांति के इतिहास में मुहम्मदाबाद की अहिंसक क्रांति अद्भुत एवं बेमिसाल थी। तहसील पर तिरंगा लहराने के बाद रणबांकुरों ने जिले के मुहम्मदाबाद इलाके को आजाद करा लिया था। कलेक्ट्रेट मुनरो ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी, इसके बावजूद शेरपुर के नौजवानों ने तहसील पर से यूनियन जैक हटाकर तिरंगा लहरा दिया। सात दिन तक इलाका आजाद रहा। उसके बाद दमन चक्र चला 29 अगस्त को शेरपुर गांव में अंग्रेजों ने उत्पात किया। इन्हीं शहीदों की याद में मुहम्मदाबाद शहीद पार्क में प्रतिवर्ष 18 अगस्त को शहादत दिवस पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है। इस वर्ष देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है, लेकिन उन शहीदों की याद में बना शहीद पार्क, शहीद स्तंभ एवं शहीद स्मृति भवन पूरी तरह उपेक्षित पड़ा है।
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महात्मा गांधी के अंग्रेजों भारत छोड़ो के आह्वान पर देशभर में नौ अगस्त 1942 से अहिंसक आंदोलन (अगस्त क्र ांति) शुरू हो गया था। नौ अगस्त को मुंबई में जिस भारत छोड़ो आंदोलन का ऐलान किया गया था वह गाजीपुर जिले में कुछ ज्यादा ही असरकारी दिखा। 16 अगस्त को गौसपुर हवाई अड्डे को तहस-नहस कर दिया गया और क्रांतिकारियों ने पोस्ट ऑफिस फूंक दिया था।
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17 अगस्त को शेरपुर स्थित जूनियर हाईस्कूल में क्रांतिकारियों की बैठक में तय किया गया कि इलाके को आजाद करा लेना है। तहसील पर यूनियन जैक लहराने नहीं दिया जाएगा। इलाके में बाढ़ आई थी। शेरपुर शहीद बाग से दो हजार से अधिक युवाओं की टोली ने मुहम्मदाबाद की ओर कूच किया। कुछ नाव से चले तो कुछ तैरकर। मुहम्मदाबाद से पहले नई रणनीति बनी और टीम को दो टोलियों में बांट दिया गया। तय हुआ कि कोई अंग्रेजों के दमन का प्रतिकार नहीं करेगा। एक टोली पीछे से जाकर अंग्रेज सिपाहियों से बंदूकें छीन लेगी। टीम का नेतृत्व कर रहे डॉ. शिवपूजन राय सामने से तहसील भवन में दाखिल हुए जबकि डॉ. तिलेश्वर राय के नेतृत्व वाली टोली पीछे से दाखिल हुई। आंदोलन की सूचना पर गाजीपुर का कलेक्टर मुनरो भी पुलिस फोर्स के साथ वहां पहुंच गया था। पीछे से आई टोली में शामिल नौजवानों ने दो सिपाहियों से उनकी बंदूकें छीन ली। तब तक सामने की तरफ से गोलीबारी शुरू हो गई। जिसमें तहसील भवन पर तिरंगा फहराते समय आठ लोग शहीद हो गए थे। इनमें डॉ. शिवपूजन राय, वंशनारायण राय, रामबदन उपाध्याय, वशिष्ठ राय, ऋषेश्वर राय, नारायण राय, राजनारायण राय, वंश नारायण राय द्वितीय शामिल थे।
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इसी बीच सीताराम राय ने तहसील पर तिरंगा लहरा दिया, उन्हें आठ गोलियां लगी। उनको जिंदा शहीद कहा जाता था। घटना के बाद आंदोलन और उग्र हो गया। अंग्रेज सिपाहियों ने शेरपुर गांव में सात दिन बाद कहर बरपाया। 29 अगस्त 1942 को अंग्रेजी फौज लगाकर शेरपुर गांव में लूटपाट, आगजनी की गई। भागते पुरुषों एवं महिलाओं पर गोलियां चलाई गई जिसमें तीन लोग रमाशंकर लाल श्रीवास्तव, खेदन सिंह यादव एवं राधिका पांडेय शहीद हुईं। गांव में सामूहिक अर्थदंड लगाकर जबरन वसूली की गई।
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