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जहरीली शराब यहां भी ले चुकी है कइयों की जान
Fri, 08 Feb 2019 11:55 PM IST
बीना
शराब
शराब
Published by: बीना
Updated Fri, 08 Feb 2019 11:55 PM IST
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गाजीपुर। जिला पुलिस प्रशासन और आबकारी विभाग की लापरवाही से जहरीली शराब लहुरीकाशी में भी कइयों को मौत की नींद सुला चुकी है। बावजूद इसके शराब तस्करों का तिलिस्म अभी तक टूट नहीं पाया है। तस्कर बेखौफ होकर बाहरी प्रांतों से शराब की खेप लाकर यहां बेच रहे हैं, लेकिन तस्करों पर शिकंजा कसने के लिए जिला पुलिस प्रशासन और आबकारी विभाग की ओर से महज लकीर ही पीटा जाता रहा है। यही वजह है कि जिले में शराब के गोरखधंधे का खेल बंद नहीं हो पा रहा है। सहारानपुर, रुढ़की और कुशीनगर में जहरीली शराब से हुई मौतों की घटना ने एक बार फिर से जिम्मेदार अफसरों के साथ ही पियक्कड़ों को बहुत कुछ सोचने पर मजबूर कर दिया है।
वर्ष 2013 के 29 मार्च को होली पर्व के दौरान सुहवल थाना क्षेत्र के त्रिलोकपुर गांव निवासी रामप्यारे राम, राम सिंह, बृजेश, नरेंद्र कुशवाहा, अमरनाथ और नवली गांव निवासी चमकीला पांडेय, डेढग़ांवा गांव निवासी सोनू खरवार तथा अवती गांव निवासी सोनू राम और अजय की जहरीली शराब का सेवन करने से मौत हो गई थी। जबकि तीन लोगों के आंखों की रोशनी चली गई थी। इससे मृतकों के घरों में होली का रंग बदरंग हो गया था। मौज-मस्ती के लिए पी गई शराब मृतकों के परिजनों के साथ ही गांवों के लिए अभिशाप बन गई थी। इस जहरीली शराब कांड में संलिप्तता उजागर होने पर मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने 11 लोगों को जेल भेजा था। इस घटना से पुलिस प्रशासन के साथ आबकारी विभाग में हड़कंप मच गया था। विभाग ने ताबड़तोड़ ईंट भट्ठों पर छापेमारी करने के साथ ही दुकान पर शराब की जांच-पड़ताल शुरु कर दी गई थी, लेकिन यह कवायद कुछ ही दिनों तक जारी रही। जिले में आए दिन बड़ी मात्रा में अन्य प्रांतों की शराब बरामद होना आम बात है। करीब तीन माह में पुलिस ने विभिन्न स्थानों के साथ ही छोटे-बड़े वाहनों से बड़ी मात्रा में अवैध शराब बरामद करने में सफलता पाई है। पुलिस की पूछताछ में तस्करों ने यह कबूल किया था कि वह इन शराब की बिक्री जिले के साथ ही बिहार में करते हैं। बिहार में शराब बंदी होने से शराब आराम से खप जाती है।
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वर्ष 2013 के 29 मार्च को होली पर्व के दौरान सुहवल थाना क्षेत्र के त्रिलोकपुर गांव निवासी रामप्यारे राम, राम सिंह, बृजेश, नरेंद्र कुशवाहा, अमरनाथ और नवली गांव निवासी चमकीला पांडेय, डेढग़ांवा गांव निवासी सोनू खरवार तथा अवती गांव निवासी सोनू राम और अजय की जहरीली शराब का सेवन करने से मौत हो गई थी। जबकि तीन लोगों के आंखों की रोशनी चली गई थी। इससे मृतकों के घरों में होली का रंग बदरंग हो गया था। मौज-मस्ती के लिए पी गई शराब मृतकों के परिजनों के साथ ही गांवों के लिए अभिशाप बन गई थी। इस जहरीली शराब कांड में संलिप्तता उजागर होने पर मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने 11 लोगों को जेल भेजा था। इस घटना से पुलिस प्रशासन के साथ आबकारी विभाग में हड़कंप मच गया था। विभाग ने ताबड़तोड़ ईंट भट्ठों पर छापेमारी करने के साथ ही दुकान पर शराब की जांच-पड़ताल शुरु कर दी गई थी, लेकिन यह कवायद कुछ ही दिनों तक जारी रही। जिले में आए दिन बड़ी मात्रा में अन्य प्रांतों की शराब बरामद होना आम बात है। करीब तीन माह में पुलिस ने विभिन्न स्थानों के साथ ही छोटे-बड़े वाहनों से बड़ी मात्रा में अवैध शराब बरामद करने में सफलता पाई है। पुलिस की पूछताछ में तस्करों ने यह कबूल किया था कि वह इन शराब की बिक्री जिले के साथ ही बिहार में करते हैं। बिहार में शराब बंदी होने से शराब आराम से खप जाती है।
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