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उत्पाद शुल्क हटाने के लिए राज्य सरकार केंद्र पर बनाएगी दबाव
ब्यूरो/अमर उजाला,गाजीपुर
Updated Thu, 17 Mar 2016 12:17 AM IST
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सराफा कारोबारी के धरने में बोलते राज्यमंत्री विजय मिश्रा।
- फोटो : अमर उजाला
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गहनों पर उत्पाद शुल्क लगाने के विरोध में चल रहे सराफा की हड़ताल के चलते रोज कमाने-खाने वाले कारीगरों की हालत खस्ता हो गई है। रोजाना आभूषण बनाकर तीन से पांच सौ रुपये कमाने वाले कारीगर आठ दिन की हड़ताल के बाद टूट गए हैं। उनको कर्ज लेकर गुजारा करना पड़ रहा है। हड़ताल ने होली के त्योहार का उत्साह फीका कर दिया है। उनका कहना है कि हड़ताल इसी तरह चलती रही तो उनके सामने कोई और काम तलाशने के सिवाय कोई विकल्प नहीं बचेगा और बच्चों की पढ़ाई पर इसका असर पड़ने की आशंका है।
सराफा कारोबारियों के आंदोलन को समाजवादी पार्टी ने भी समर्थन दिया है। धर्मार्थ कार्य राज्य मंत्री विजय मिश्रा ने चीतनाथ में सराफा व्यापारियों के धरने में शामिल शामिल हुए और उत्पाद शुल्क वापसी के लिए सरकार पर दबाव बनाने का आश्वासन दिया।
उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार के कार्यकाल में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने दबाव बनाकर उत्पाद शुल्क वापस कराया था। जब आभूषण वैट, इम्पोर्ट ड्यूटी, हालमार्क आदि पहले से ही लागू है तो उत्पाद शुल्क का क्या औचित्य है। धरना की समाप्ति के बाद व्यापारियों का दल सराफा व्यापार मंडल के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद के नेतृत्व में दिल्ली 17 मार्च को आयोजित रैली में भाग लेने के लिए रवाना हो गया।
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धरना देने वालों में महामंत्री संतोष कुमार वर्मा, संरक्षक गुलाब चंद्र वर्मा, जवाहर लाल वर्मा, अजय अग्रहरि, विनय वर्मा, राजेश अग्रहरि, लाल चंद्र वर्मा, संजय अग्रहरि, संजय वर्मा, विनय गुप्ता, विजय वर्मा, सुभाष चंद्र, मनोज वर्मा, नंदलाल वर्मा, अवधेश वर्मा, ओमप्रकाश वर्मा, गौरव अग्रहरी, केशव वर्मा, रमेश चंद्र जयप्रकाश वर्मा आशीष कुमार वर्मा शामिल रहे।
होली में गहनों बिक्री होती है। लोग होली पर अन्य सामान तो लोग खरीद ले रहे हैं लेकिन दुल्हनों के लिए गहनों की खरीद नहीं हो पा रही है। पुराने गहनों की सफाई और मरम्मत का काम भी ठप है।
सराफा कारोबारियों के यहां लोग गहने गिरवी रखकर कम अवधि का कर्ज लेते हैं। अचानक पैसे की जरूरत पड़ने पर आमतौर पर लोग घर की महिलाओं के कुछ जेवर गिरवी रखकर लिए गए पैसे से काम चला लेते हैं और बाद में आय होने पर उसे छुड़ा लेते हैं। सराफा में हड़ताल से जेवर को गिरवी रखना भी संभव नहीं है। मऊ रोड के रहने वाले रामदरश ने बताया कि उनका बेटा कोटा में कोचिंग करता है। उसे पच्चीस हजार रुपये की जरूरत है लेकिन पैसे नहीं मिल रहे हैं।
सराफा व्यापार मंडल ने हड़ताल की सफलता के लिए दूकान खोलने वाले व्यापारियों पर जुर्माना लगाने का फैसला किया है। कुछ सराफा व्यापारियों ने बताया कि हड़ताल के दौरान दूकान खोलने वाले छोटे सराफा व्यापारी पर 1100 और बड़े व्यापारी पर 5500 रुपये जुर्माना लगाने का निर्णय सराफा व्यापार मंडल में लिया है। इसके डर से कोई भी सराफा व्यापारी दूकान खोलने की जुर्रत नहीं कर रहा है। हालांकि सराफा व्यापार मंडल के महामंत्री संतोष वर्मा जुर्माने की बात का खंडन करते हुए कहते हैं कि दिल्ली रैली में जाने के लिए 1100 रुपये रजिस्ट्रेशन शुल्क जरूर लिया गया है।
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सराफा कारोबारियों के आंदोलन को समाजवादी पार्टी ने भी समर्थन दिया है। धर्मार्थ कार्य राज्य मंत्री विजय मिश्रा ने चीतनाथ में सराफा व्यापारियों के धरने में शामिल शामिल हुए और उत्पाद शुल्क वापसी के लिए सरकार पर दबाव बनाने का आश्वासन दिया।
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उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार के कार्यकाल में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने दबाव बनाकर उत्पाद शुल्क वापस कराया था। जब आभूषण वैट, इम्पोर्ट ड्यूटी, हालमार्क आदि पहले से ही लागू है तो उत्पाद शुल्क का क्या औचित्य है। धरना की समाप्ति के बाद व्यापारियों का दल सराफा व्यापार मंडल के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद के नेतृत्व में दिल्ली 17 मार्च को आयोजित रैली में भाग लेने के लिए रवाना हो गया।
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धरना देने वालों में महामंत्री संतोष कुमार वर्मा, संरक्षक गुलाब चंद्र वर्मा, जवाहर लाल वर्मा, अजय अग्रहरि, विनय वर्मा, राजेश अग्रहरि, लाल चंद्र वर्मा, संजय अग्रहरि, संजय वर्मा, विनय गुप्ता, विजय वर्मा, सुभाष चंद्र, मनोज वर्मा, नंदलाल वर्मा, अवधेश वर्मा, ओमप्रकाश वर्मा, गौरव अग्रहरी, केशव वर्मा, रमेश चंद्र जयप्रकाश वर्मा आशीष कुमार वर्मा शामिल रहे।
होली में गहनों बिक्री होती है। लोग होली पर अन्य सामान तो लोग खरीद ले रहे हैं लेकिन दुल्हनों के लिए गहनों की खरीद नहीं हो पा रही है। पुराने गहनों की सफाई और मरम्मत का काम भी ठप है।
सराफा कारोबारियों के यहां लोग गहने गिरवी रखकर कम अवधि का कर्ज लेते हैं। अचानक पैसे की जरूरत पड़ने पर आमतौर पर लोग घर की महिलाओं के कुछ जेवर गिरवी रखकर लिए गए पैसे से काम चला लेते हैं और बाद में आय होने पर उसे छुड़ा लेते हैं। सराफा में हड़ताल से जेवर को गिरवी रखना भी संभव नहीं है। मऊ रोड के रहने वाले रामदरश ने बताया कि उनका बेटा कोटा में कोचिंग करता है। उसे पच्चीस हजार रुपये की जरूरत है लेकिन पैसे नहीं मिल रहे हैं।
सराफा व्यापार मंडल ने हड़ताल की सफलता के लिए दूकान खोलने वाले व्यापारियों पर जुर्माना लगाने का फैसला किया है। कुछ सराफा व्यापारियों ने बताया कि हड़ताल के दौरान दूकान खोलने वाले छोटे सराफा व्यापारी पर 1100 और बड़े व्यापारी पर 5500 रुपये जुर्माना लगाने का निर्णय सराफा व्यापार मंडल में लिया है। इसके डर से कोई भी सराफा व्यापारी दूकान खोलने की जुर्रत नहीं कर रहा है। हालांकि सराफा व्यापार मंडल के महामंत्री संतोष वर्मा जुर्माने की बात का खंडन करते हुए कहते हैं कि दिल्ली रैली में जाने के लिए 1100 रुपये रजिस्ट्रेशन शुल्क जरूर लिया गया है।