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Ghazipur News: नन्हे कंधों पर बस्ते का बोझ, नर्सरी के स्कूल बैग का वजन रहा 3.2 किलो

Thu, 07 Aug 2025 11:45 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 07 Aug 2025 11:45 PM IST
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The burden of school bags on little shoulders, the weight of nursery school bag was 3.2 kg
बहरियाबाद में क्षमता से अधिक वजन का बैग लेकर स्कूल जाते बच्चे।   - फोटो : संवाद
गाजीपुर। स्कूली बच्चों का शरीर विकास की अवस्था में होता है। ऐसी स्थिति में आवश्यक है कि वह अपनी उम्र और क्षमता से अधिक भार न उठाएं लेकिन स्थिति यह है कि छात्र-छात्राएं भारी-भरकम बैग लेकर स्कूल जा रहे हैं। सरकार ने बच्चों का बोझ कम करने के लिए दिशा-निर्देश तो जारी कर दिए, लेकिन हकीकत में हालात जस के तस हैं। बृहस्पतिवार को अखबार ने पड़ताल की तो नर्सरी के छात्र के बैग का वजन 3.200 किलो तो कक्षा दो के बैग का वजन 5.400 किग्रा देखा गया। स्कूलों की छुट्टी के बाद जायजा लिया गया तो नन्हे कंधों पर भारी किताबों का बोझ साफ देखा गया। चिकित्सकों की मानें तो स्कूल बस्ते का वजन अधिक नहीं होना चाहिए। ये अभिभावकों के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। कुछ निजी स्कूलों के बाहर बच्चों के बैग के भार की पड़ताल की गई तो चौंकाने वाली स्थिति सामने आई। पाया गया कि बच्चों के बैग का वजन विभाग की ओर से निर्धारित मानकों से कहीं अधिक है। शहर के एक निजी विद्यालय में कक्षा चार के एक विद्यार्थी मानव पुष्पराज के बस्ते का भार जांचा गया तो पता चला कि उसका वजन साढ़े 5 किलो है। इसी तरह एक अन्य विद्यालय के कक्षा दो के छात्र के बस्ते का वजन सात तो कक्षा छह का एक छात्र करीब 9 किलो भार का बस्ता लिए था। मरदह क्षेत्र के तीन अलग-अलग निजी स्कूलों में एक में नर्सरी के छात्र के बैग का वजन 3.200 किग्रा, कक्षा दो के बैग का वजन 5.400 किग्रा तथा कक्षा सातवीं के एक छात्र के बैग का भार 13.700 किग्रा पाया गया। कमोवेश इसी तरह अन्य कक्षाओं के बच्चों के बस्ते के भार का अंदाजा लगाया जा सकता है।
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ये होती हैं सम्स्याएं-कई बार बच्चे एक कंधे पर ही स्कूल बस्ते का वजन रख लेते हैं। ऐसे में संबंधित विद्यार्थी को कंधे संबंधित समस्या होने लग जाती है और कमर दर्द भी होना तय है। ऐसी स्थिति में दोनों कंधों पर बस्ते का वजन होना चाहिए। भारी-भरकम बैग लेकर लगातार चलने से शरीर की मुद्रा बदल सकती है तथा सर्वाइकल की समस्या उत्पन्न हो सकती है। भारी बैग बच्चों में पीठ दर्द, मुद्रा संबंधी समस्याएं और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकते हैं।
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शारीरिक और मानसिक विकास हो रहा प्रभावित, स्कूल बस्ते का वजन कम हो
गाजीपुर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मरदह के डा. रविरंजन, डॉ इमरान मलिक, डॉ. अवधेश प्रसाद ने बच्चों के बैग के भार को लेकर चिंता व्यक्त किया। उनका कहना है कि कम उम्र में ज्यादा वजन उठाना कई प्रकार की जटिल समस्या को उत्पन्न करता है। बच्चों पर बस्ते का बढ़ता बोझ उनकी सेहत के लिए चिंता का कारण बन गया है। इससे न केवल उनकी सेहत पर असर पड़ रहा है, बल्कि मानसिक तनाव भी बढ़ रहा है। बच्चों को भारी बस्ता ढोने के कारण उनकी लंबाई पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। सुबह से दोपहर तक स्कूल की पढ़ाई और फिर बस्ते का भारी बोझ। यही कारण है कि दिन भर की पढ़ाई के बाद वह सामान्य गतिविधियां भी ठीक से नहीं कर पाते। स्कूल से लौटने के बाद थकान के कारण उनका भोजन भी प्रभावित हो रहा है। अत्यधिक भारी बस्ता उठाने से उनके शारीरिक विकास पर प्रतिकूल असर पड़ रहा जिससे उनकी लंबाई कम हो रही है और उनके कंधों पर गंभीर दबाव बन रहा है।
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ये है मानक-मानके के मुताबिक आमतौर पर, नर्सरी और प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों के लिए स्कूल बैग का वजन 1.5 से 2 किलोग्राम से अधिक नहीं होना चाहिए। 3.200 किलो का वजन, खासकर छोटे बच्चों के लिए, उनकी शारीरिक बनावट और विकास के लिए हानिकारक हो सकता है।
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