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टीबी ने साल भर में ली 75 जानें
ब्यूरो/अमर उजाला,गाजीपुर
Updated Tue, 22 Mar 2016 11:14 PM IST
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दवा
- फोटो : medicin
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इलाज के तमाम बंदोबस्त के बावजूद क्षय रोग ने पिछले साल जिले में 75 रोगियों की जान ले ली। पुनरीक्षित क्षय नियंत्रण कार्यक्रम के तहत जिले के डाट्स केंद्रों पर वर्तमान में 2800 रोगियों का इलाज किया जा रहा है। इसके अलावा तमाम मरीज निजी चिकित्सकों के यहां दवा ले रहे हैं। बीच में दवा छोड़ने वालों की भी बड़ी तादाद है, जिसके चलते मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट (एमडीआर) टीबी के मामले भी सामने आ रहे हैं, जिनमें क्षय रोग की दवाएं काम नहीं कर रही हैं। ऐसे 70 रोगियों का इलाज विभाग के लिए चुनौती बना हुआ है।
क्षय विभाग ने टीबी पर नियंत्रण के लिए जिले में 350 डॉट्स केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां से रोगियों को दवाएं मुहैया कराई जाती हैं। इसके अलावा 26 जांच केंद्र हैं। दस हजार की आबादी पर एक डॉट्स सेंटर की स्थापना की गई है, आशा कार्यकर्ता और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी मरीजों को समय से दवा मुहैया कराते हैं। इन केंद्रों पर 2800 रोगियों का इलाज चल रहा है। इसके अलावा 70 मरीज एमडीआर (मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट) श्रेणी के हैं जिनका विशेष इलाज किया जा रहा है। एमडीआर टीबी की जांच की व्यवस्था यहां नहीं होने के कारण, उनकी जांच बनारस से कराई जाती है। हालांकि सरकार ने जिले में सीबीनेट मशीन उपलब्ध करा दी है, जिससे जल्द ही यहां एमडीआर टीबी की जांच होने लगेगी।
डाट्स में एक दिन के अंतराल पर दवाएं दी जाती हैं। मरीजों की शिकायत है कि ये दवाएं ज्यादा कड़ी होती हैं, जिसके चलते वे दवा खाने वाले दिन परेशान रहते हैं। इससे बचने के लिए तमाम रोगी निजी चिकित्सकों की शरण लेते हैं लेकिन लंबी अवधि तक दवा नहीं कर पाते हैं। चिकित्सा विभाग के अधिकारी भी इस समस्या को महत्वपूर्ण मानते हैं। एक अफसर ने बताया कि जल्द ही डाट्स केंद्रों से भी रोज दवा खिलाने की योजना बनाई जा रही है।
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क्षय विभाग ने टीबी पर नियंत्रण के लिए जिले में 350 डॉट्स केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां से रोगियों को दवाएं मुहैया कराई जाती हैं। इसके अलावा 26 जांच केंद्र हैं। दस हजार की आबादी पर एक डॉट्स सेंटर की स्थापना की गई है, आशा कार्यकर्ता और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी मरीजों को समय से दवा मुहैया कराते हैं। इन केंद्रों पर 2800 रोगियों का इलाज चल रहा है। इसके अलावा 70 मरीज एमडीआर (मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट) श्रेणी के हैं जिनका विशेष इलाज किया जा रहा है। एमडीआर टीबी की जांच की व्यवस्था यहां नहीं होने के कारण, उनकी जांच बनारस से कराई जाती है। हालांकि सरकार ने जिले में सीबीनेट मशीन उपलब्ध करा दी है, जिससे जल्द ही यहां एमडीआर टीबी की जांच होने लगेगी।
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डाट्स में एक दिन के अंतराल पर दवाएं दी जाती हैं। मरीजों की शिकायत है कि ये दवाएं ज्यादा कड़ी होती हैं, जिसके चलते वे दवा खाने वाले दिन परेशान रहते हैं। इससे बचने के लिए तमाम रोगी निजी चिकित्सकों की शरण लेते हैं लेकिन लंबी अवधि तक दवा नहीं कर पाते हैं। चिकित्सा विभाग के अधिकारी भी इस समस्या को महत्वपूर्ण मानते हैं। एक अफसर ने बताया कि जल्द ही डाट्स केंद्रों से भी रोज दवा खिलाने की योजना बनाई जा रही है।
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