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गर्मी : कर्मनाशा नदी में उभरे टापू, दो लाख किसान चिंतित

Fri, 06 Jun 2025 12:18 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 06 Jun 2025 12:18 AM IST
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Summer: Islands emerge in Karmanasha river, two lakh farmers worried
कर्मनाशा नदी जनपद में यूपी व बिहार की सीमा को रेखांकित करती है। लेकिन, वर्तमान में उसका अस्तित्व खतरे में है।
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नदी का पानी सूख गया है। जगह-जगह टापू बन गए हैं। कुछ जगहों पर पानी इतना कम है कि लोग पैदल ही इस पार से उस पार जा सकते हैं।
चंदौली से निकलकर कर्मनाशा नदी जनपद के अंतिम छोर पर बसे बारा गांव के पास गंगा में विलीन हो जाती हैं। हर बार गर्मी के मौसम में कर्मनाशा का अधिकांश पानी घट जाता है। लेकिन, पांच वर्ष पहले कुछ हद तक स्थिति बेहतर थी। जनपद के सीमावर्ती इलाकों में बसे गांवों के लिए कर्मनाशा नदी जीवन रेखा है।
नदी के पानी से लगभग दो लाख किसान सिंचाई करते हैं। बारा, हरकरनापुर, मगरखाई, कुत्तुपुर, भतौरा, सायर, लहना, बरेजी, देवल आदि गांवों के किसान अपने खेत की सिंचाई के लिए कर्मनाशा नदी पर निर्भर हैं। कर्मनाशा नदी में पानी कम होने के कारण आर्थिक रूप से कमजोर किसानों को खेत की सिंचाई में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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वहीं साधन संपन्न किसान अपने निजी संसाधानों से खेतों की सिंचाई कर रहे हैं। कर्मनाशा नदी के तटवर्ती इलाकों में तरबूज, सब्जी, गेहूं व धान की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है।
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