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Ghazipur News: धन के दुरुपयोग में छह अधिकारियों पर मुकदमा
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गाजीपुर। सदर तहसील निर्माण में हो रही देरी पर अब कार्रवाई शुरू हो गई है। डीएम के आदेश पर कार्यदायी संस्था के छह अधिकारियों पर शहर कोतवाली में शुक्रवार की रात मुकदमा दर्ज किया गया। यह मुकदमा भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निवारण की अलग-अलग धाराओं में दर्ज हुआ है। प्रकरण की जांच सीओ सिटी को सौंपी गई है।
प्रभारी निरीक्षक दीन दयाल पांडेय ने बताया कि नजारत कलेक्ट्रेट सालिकराम की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया है। कोतवाली में दी गई तहरीर के मुताबिक तहसील सदर के भवन निर्माण के लिए 31 दिसंबर 2016 को 5 करोड़ 10 लाख 39 हजार रुपये स्वीकृत हुआ। इसमें 340.26 लाख रुपये अनावासीय भवन और आवासीय भवन के निर्माण के लिए 264.23 लाख स्वीकृत हुआ। अनावासीय भवनों के निर्माण के लिए पहली किस्त 170.13 लाख और आवासीय भवनों के लिए पहली किस्त 132.00 लाख जारी किया गया। निर्माण का कार्य कार्यदायी संस्था उप्र राजकीय निर्माण निगम को दी गई। निर्माण कार्य उसकी भदोही इकाई की ओर से जनवरी 2018 में शुरू कराई गई। शेष दूसरी किश्त भी 16 दिसंबर को 2019 को दे दिया गया। आरोप है कि संपूर्ण भुगतान के बाद भी कार्यदायी संस्था ने निर्माण कार्य को पूरा नहीं किया गया है। कार्य पूरा न करने के कारण कई बार स्पष्टीकरण और उपयोगिता प्रमाणपत्र की मांग की गई लेकिन स्पष्टीकरण में यह बताया गया कि उनकी ओर से संपूर्ण धनराशि खर्च की जा चुकी है। निर्माण कार्य मूल लागत में पूर्ण किया जाना संभव नहीं है। उपयोगिता प्रमाण पत्र में कार्यदायी संस्था की ओर से आवासीय भवन निर्माण की भौतिक प्रगति 49 प्रतिशत, वित्तीय प्रगति 99.48 प्रतिशत और अनावासीय भवनों के निर्माण की भौतिक प्रगति 48 प्रतिशत व वित्तीय प्रगति 99.73 प्रतिशत दर्शाई गई है।
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प्रभारी निरीक्षक दीन दयाल पांडेय ने बताया कि नजारत कलेक्ट्रेट सालिकराम की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया है। कोतवाली में दी गई तहरीर के मुताबिक तहसील सदर के भवन निर्माण के लिए 31 दिसंबर 2016 को 5 करोड़ 10 लाख 39 हजार रुपये स्वीकृत हुआ। इसमें 340.26 लाख रुपये अनावासीय भवन और आवासीय भवन के निर्माण के लिए 264.23 लाख स्वीकृत हुआ। अनावासीय भवनों के निर्माण के लिए पहली किस्त 170.13 लाख और आवासीय भवनों के लिए पहली किस्त 132.00 लाख जारी किया गया। निर्माण का कार्य कार्यदायी संस्था उप्र राजकीय निर्माण निगम को दी गई। निर्माण कार्य उसकी भदोही इकाई की ओर से जनवरी 2018 में शुरू कराई गई। शेष दूसरी किश्त भी 16 दिसंबर को 2019 को दे दिया गया। आरोप है कि संपूर्ण भुगतान के बाद भी कार्यदायी संस्था ने निर्माण कार्य को पूरा नहीं किया गया है। कार्य पूरा न करने के कारण कई बार स्पष्टीकरण और उपयोगिता प्रमाणपत्र की मांग की गई लेकिन स्पष्टीकरण में यह बताया गया कि उनकी ओर से संपूर्ण धनराशि खर्च की जा चुकी है। निर्माण कार्य मूल लागत में पूर्ण किया जाना संभव नहीं है। उपयोगिता प्रमाण पत्र में कार्यदायी संस्था की ओर से आवासीय भवन निर्माण की भौतिक प्रगति 49 प्रतिशत, वित्तीय प्रगति 99.48 प्रतिशत और अनावासीय भवनों के निर्माण की भौतिक प्रगति 48 प्रतिशत व वित्तीय प्रगति 99.73 प्रतिशत दर्शाई गई है।
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