फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ghazipur News ›   Rules and conditions ignored: Land use not changed, plotting on farm and garden land

नियम-शर्ते ताक पर : भूमि का उपयोग बदला नहीं, खेत और बाग की जमीन पर प्लॉटिंग

Tue, 18 Nov 2025 12:46 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 18 Nov 2025 12:46 AM IST
विज्ञापन
Rules and conditions ignored: Land use not changed, plotting on farm and garden land
शहर से सटे सुखदेवपुर के पास की गयी प्लाटिंग। संवाद
गाजीपुर। हाईवे के किनारे के जमीन का खुला अवैध धंधा चल रहा है। भूमि उपयोग (लैंड यूज) में बदलाव के बगैर खेतों और बागों को काट-कर प्लॉट बेचे जा रहे हैं।
विज्ञापन

हैरानी की बात यह है कि इनमें से किसी कॉलोनी का नक्शा विनियत क्षेत्र अधिकारी कार्यालय व निकायों से पास नहीं कराया गया है और न ही किसी विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) लेने की जहमत उठाई है।नियमों के मुताबिक, शहरी क्षेत्र में नगर निकाय व ग्रामीण क्षेत्र में कालोनी बनाने के लिए जिला पंचायत और राजस्व विभाग से अनुमति, लेआउट की मंजूरी, लेनी होती है।
विज्ञापन

बिल्डिंग प्लान के साथ-पर्यावरण संबंधी औपचारिकताएं पूरी करनी जरूरी होती हैं, लेकिन शहर से सटे शेखपुर, सुखदेवपुर, आलमपट्टी, मीरनपुर, सक्का, विन्ध्वलिया, अंधऊ, आदर्शबाजार, फाक्सगंज, महाराजगंज, कठवा मोड, भूतहियाटाड, मनिहारी, नंदगंज आदि इलाकों में प्लांटिंग कर नियमों को दरकिनार कर कालोनियां बनाई जा रही हैं। जानकारों के मुताबिक हाईवे के आसपास की जमीन को लाखों में खरीदकर, प्लॉटिंग के बाद करोड़ों में बेचा जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

ये हैं कॉलोनी बनाने के नियम

कानूनन कॉलोनी बनाने के लिए नगर निकाय, जिला पंचायत, विनियमित अधिकारी और राजस्व विभागों से मंजूरी लेना जरूरी है। मिट्टी की जांच रिपोर्ट, पेड़ काटने की अनुमति और अन्य तकनीकी स्वीकृति भी हासिल करनी होती हैं। अधिकारियों का कहना है कि बिना नक्शा पास कराए प्लॉट काटना और बेचना सीधे दंडनीय कार्रवाई की श्रेणी में आता है। किसी भी नई आवासीय कॉलोनी के लिए न्यूनतम एक एकड़ भूमि, भूमि उपयोग परिवर्तन, और नगर निकाय से लेआउट प्लान की स्वीकृति अनिवार्य है। कॉलोनी में मुख्य सड़क कम से कम 9 मीटर चौड़ी और आंतरिक सड़कें 6 मीटर की होनी चाहिए। वहीं, कुल क्षेत्रफल का 10 से 20 प्रतिशत हिस्सा पार्क व ओपन स्पेस के लिए आरक्षित करना जरूरी है। साथ ही पानी, बिजली और ड्रेनेज व्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी डेवलपर की होती है।

अभी तक कॉलोनी का कोई भी नक्शा पास करने के लिए नहीं आया है। न ही किसी ने प्लॉटिंग के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेने के लिए आवेदन किया है। अगर इस तरह की गतिविधियां संचालित हो रही है तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। -संतोष सिंह, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत, गाजीपुर।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed