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आपसी सहमति बनाकर करें विवादों का समाधान : धर्मेंद्र
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केंद्र में मौजूद जनपद न्यायाधीश धर्मेंद्र। संवाद
- फोटो : संवाद
गाजीपुर। लंबित वादों के त्वरित और सौहार्दपूर्ण निस्तारण के उद्देश्य से चल रहे राष्ट्रीय मध्यस्थता अभियान 2.0 के तहत मंगलवार को जनपद न्यायाधीश धर्मेंद्र कुमार पाण्डेय ने सुलह-समझौता केंद्र का निरीक्षण किया।
उन्होंने केंद्र में आए वादकारियों से संवाद कर आपसी सहमति से विवादों के समाधान पर जोर दिया। इस दौरान उन्होंने ने कई मामलों में पक्षकारों को मध्यस्थता से सुलह के लिए प्रेरित किया।
मध्यस्थ अधिवक्ताओं को अधिक वादों का निस्तारण कराने के लिए प्रोत्साहित करते हुए उनकी समस्याएं भी जानीं। कहा कि न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या कम करने के लिए मध्यस्थता एक प्रभावी और मानवीय विकल्प है। , जिससे समय और संसाधनों की बचत होती है तथा आपसी संबंध भी कायम रहते हैं।
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राष्ट्रीय मध्यस्थता अभियान 2.0 की शुरुआत 2 जनवरी से हुई है। इसके तहत आमजन अपने विवादों का सरल, सुलभ और कम खर्च में समाधान करा सकते हैं।
अभियान के अंतर्गत वैवाहिक विवाद, घरेलू हिंसा, दुर्घटना दावा, ऋण वसूली, सेवा विवाद, संपत्ति बंटवारा तथा शमनीय आपराधिक मामलों सहित विभिन्न प्रकार के वादों का सुलह-समझौते के माध्यम से निस्तारण किया जा रहा है।
जनपद न्यायाधीश ने वादकारियों से अपील की कि वे आपसी सहमति से विवादों को समाप्त कर सामाजिक सौहार्द बनाए रखने में सहयोग करें। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता न केवल न्याय पाने का माध्यम है, बल्कि रिश्तों को बचाने का भी एक सकारात्मक प्रयास है।
इस अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव पूर्णकालिक श्रीमती अर्चना-II, विद्वान अधिवक्तागण, मध्यस्थ अधिवक्तागण एवं वादकारीगण उपस्थित रहे।
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उन्होंने केंद्र में आए वादकारियों से संवाद कर आपसी सहमति से विवादों के समाधान पर जोर दिया। इस दौरान उन्होंने ने कई मामलों में पक्षकारों को मध्यस्थता से सुलह के लिए प्रेरित किया।
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मध्यस्थ अधिवक्ताओं को अधिक वादों का निस्तारण कराने के लिए प्रोत्साहित करते हुए उनकी समस्याएं भी जानीं। कहा कि न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या कम करने के लिए मध्यस्थता एक प्रभावी और मानवीय विकल्प है। , जिससे समय और संसाधनों की बचत होती है तथा आपसी संबंध भी कायम रहते हैं।
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राष्ट्रीय मध्यस्थता अभियान 2.0 की शुरुआत 2 जनवरी से हुई है। इसके तहत आमजन अपने विवादों का सरल, सुलभ और कम खर्च में समाधान करा सकते हैं।
अभियान के अंतर्गत वैवाहिक विवाद, घरेलू हिंसा, दुर्घटना दावा, ऋण वसूली, सेवा विवाद, संपत्ति बंटवारा तथा शमनीय आपराधिक मामलों सहित विभिन्न प्रकार के वादों का सुलह-समझौते के माध्यम से निस्तारण किया जा रहा है।
जनपद न्यायाधीश ने वादकारियों से अपील की कि वे आपसी सहमति से विवादों को समाप्त कर सामाजिक सौहार्द बनाए रखने में सहयोग करें। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता न केवल न्याय पाने का माध्यम है, बल्कि रिश्तों को बचाने का भी एक सकारात्मक प्रयास है।
इस अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव पूर्णकालिक श्रीमती अर्चना-II, विद्वान अधिवक्तागण, मध्यस्थ अधिवक्तागण एवं वादकारीगण उपस्थित रहे।