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Ghazipur News: यूपीसीडा को हस्तांतरित की जाएगी पूर्वांचल सहकारी कताई मिल बड़ौरा
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कैबिनेट की सोमवार को हुई बैठक में सहकारी कताई मिल्स संघ लिमिटेड कानपुर से संबंधित सभी मिलों को औद्योगिक प्रयोग के लिए यूपीसीडा को हस्तांतरित करने का निर्णय लिया गया। राज्य सरकार के इस फैसले से क्षेत्र के लोगों में खुशी है।
पूर्वांचल सहकारी कताई मिल बड़ौरा बहादुरगंज भी इसमें शामिल हैं, जो बंद चल रही है। यूपीसीडा इन मिलों को प्राइवेट कंपनियों को देकर औद्योगिक इकाई लगाएगा।
जिले की एकमात्र पूर्वांचल सहकारी कताई मिल बड़ौरा बहादुरगंज में जुलाई 1985 में उत्पादन शुरू हुआ था। 10 अगस्त 2010 को अधिक देनदारी के कारण लगातार घाटे में चल रही इस मिल को बंद कर दिया गया था। तभी से इस मिल को चलाने के कई बार प्रयास किए गए लेकिन यह मिल चल नहीं सकी।
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मिल में कुल 1250 अधिकारी, कर्मचारी एवं मजदूर काम कर रहे थे। मिल में 25 हजार स्पेंडल से प्रतिदिन 20 हजार किलो धागा का उत्पादन किया जा रहा था। वर्तमान में मिल लावारिस हाल में है। वैसे इन मिलों को चलाने के लिए पहले भी कई सरकारों ने प्रयास किए लेकिन सफल नहीं हुईं। यूपीसीडा इन सभी मिलों को लेकर औद्योगिक विकास के लिए प्राइवेट उद्योगों को स्थापित करने के लिए टेंडर निकालेगा।
अगर इन मिलों को प्राइवेट औद्योगिक घराने चलाने का निर्णय लेते हैं तो क्षेत्र के लोगों को बड़ा तोहफा मिलेगा। इस मिल के चलने पर एक हजार से अधिक लोगों को एक बार फिर रोजगार मिलने की संभावना है।
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पूर्वांचल सहकारी कताई मिल बड़ौरा बहादुरगंज भी इसमें शामिल हैं, जो बंद चल रही है। यूपीसीडा इन मिलों को प्राइवेट कंपनियों को देकर औद्योगिक इकाई लगाएगा।
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जिले की एकमात्र पूर्वांचल सहकारी कताई मिल बड़ौरा बहादुरगंज में जुलाई 1985 में उत्पादन शुरू हुआ था। 10 अगस्त 2010 को अधिक देनदारी के कारण लगातार घाटे में चल रही इस मिल को बंद कर दिया गया था। तभी से इस मिल को चलाने के कई बार प्रयास किए गए लेकिन यह मिल चल नहीं सकी।
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मिल में कुल 1250 अधिकारी, कर्मचारी एवं मजदूर काम कर रहे थे। मिल में 25 हजार स्पेंडल से प्रतिदिन 20 हजार किलो धागा का उत्पादन किया जा रहा था। वर्तमान में मिल लावारिस हाल में है। वैसे इन मिलों को चलाने के लिए पहले भी कई सरकारों ने प्रयास किए लेकिन सफल नहीं हुईं। यूपीसीडा इन सभी मिलों को लेकर औद्योगिक विकास के लिए प्राइवेट उद्योगों को स्थापित करने के लिए टेंडर निकालेगा।
अगर इन मिलों को प्राइवेट औद्योगिक घराने चलाने का निर्णय लेते हैं तो क्षेत्र के लोगों को बड़ा तोहफा मिलेगा। इस मिल के चलने पर एक हजार से अधिक लोगों को एक बार फिर रोजगार मिलने की संभावना है।